आपको जानकर हैरानी होगी कि आज से 53 साल पहले 1964 में ही सरकार ने फलों को पकाने में कैल्शियम कार्बाइड के इस्तेमाल को प्रतिबंधित किया हुआ है। लेकिन ये खतरनाक केमिकल फलों को पकाने के लिए इस्तेमाल हो रहा है।
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आमतौर पर फल व्यापारी इस केमिकल को मसाला कहते हैं और इससे आम, केले या फिर पपीते पकाए जाते हैं। कैल्शियम कार्बाइड हमारे शरीर के लिए बहुत ख़तरनाक होता है। डॉक्टरों के मुताबिक इस खतरनाक कैमिकल के लगातार इस्तेमाल से कैंसर होने की पूरी आशंका रहती है।
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फलों को केमिकल से पकाने वाले फल विक्रेताओं पर शुक्रवार को शिकंजा कसा गया। एसडीएम डॉ. तपस्या राघव के नेतृत्व में फूड सेफ्टी, मार्केट कमेटी व पुलिस ने सवेरे छह बजे चंडीगढ़ के सेक्टर 26 मंडी में छापा मारा। छापे की सूचना मिलते ही मार्केट में हड़कंप मच गया। फल विक्रेता अपना सामान छोड़कर फरार हो गए। जांच में पता चला कि कैल्शियम कार्बाइड केमिकल से पपीते को पकाया जा रहा था।
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इस दौरान आम को विशेष मिश्रण इथिलिन से पकाया जा रहा था। हालांकि अभी इसे लेकर विभाग असमंजस में है। हालांकि फूड सेफ्टी रेग्युलेशन के मुताबिक एक किलोग्राम फल में तीन मिलीग्राम इथिलिन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके बावजूद विभाग ने ईथिलिन को इकट्ठा कर रख लिया है। विभाग के अधिकारी इस बारे में उच्चाधिकारियों से विचार-विमर्श करेंगे।
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डेजिग्नेटेड आफिसर सुखविंदर सिंह ने बताया कि उन्हें काफी दिन से इस बारे में शिकायत मिल रही थी। वीरवार को एसडीएम तपस्या राघव के साथ पहले पूरे मार्केट में रेकी की। इस दौरान पता लगा लिया गया था कि कहां-कहां केमिकल से फलों को पकाया जा रहा है।
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हालांकि जांच में सिर्फ पपीता ही मिला, जिसे कैल्शियम कार्बाइड से पकाया जा रहा था। फल विक्रेताओं ने अधिकारियों को आश्वासन दिया कि वे आगे से केमिकल युक्त फल को नहीं खरीदेंगे।
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फूड सेफ्टी विंग के डेजिग्नेटेड आफिसर सुखविंदर सिंह ने बताया कि केमिकल युक्त फल खाने से न्यूरो से संबंधित बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। डायरिया और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा रहता है।
यदि फल पूरे एक रंग से पक रहा है तो समझ जाइए कि केमिकल का इस्तेमाल किया गया है। बिना केमिकल से फल पर कई रंग होते हैं जैसे कि आम कहीं से पीला होगा या फिर हरा। फल में जगह-जगह सफेद रंग के धब्बे जैसे होंगे। इससे आसानी से फल को पहचाना जा सकता है।