चंडीगढ़ के सबसे पॉश एरिया में शामिल सेक्टर-10 स्थित कोठी नंबर-575 में बुधवार शाम को हैंड ग्रेनेड के धमाके से सिटी ब्यूटीफुल में दहशत का माहाैल है।
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चंडीगढ़ में हैंड ग्रेनेड हमला
- फोटो : अमर उजाला
रिटायर्ड प्रिंसिपल रहते हैं कोठी में
पुलिस सूत्रों के मुताबिक कोठी नंबर 575 में रहने वाले रिटायर्ड प्रिंसिपल गोपेश मल्होत्रा को आज से पहले किसी भी प्रकार कोई फिरौती या फिर अन्य कोई धमकी नहीं मिली है और न ही उनके साथ किसी की कोई दुश्मनी है। फिर भी कोठी पर हैंड ग्रेनेड क्यों फेंका गया। इसके लिए इस कोठी का इतिहास जानना जरूरी है।
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चंडीगढ़ में हैंड ग्रेनेड हमला
- फोटो : अमर उजाला
बनी थी पंजाब के पूर्व एसएसपी की हत्या की योजना
यह वही कोठी है जिसमें किराए पर रहने वाले पंजाब पुलिस के पूर्व एसएसपी जसकीरत सिंह चहल की पहले भी हत्या करने की योजना बनाई गई थी और चंडीगढ़ व मोहाली पुलिस ने उसका भंडाफोड़ किया था। जसकीरत चहल को पंजाब में आतंकवाद के खिलाफ मुहिम छेड़ने पर भी परिवार सहित जान से मारने की धमकियां मिली थी। इस हमले से पहले यहां रैकी भी की गई थी।
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चंडीगढ़ में हैंड ग्रेनेड अटैक
- फोटो : अमर उजाला
कोठी में दो साल तक रहे थे पूर्व एसएसपी
इस कोठी में दो साल पहले तक रहने वाले पंजाब पुलिस के पूर्व एसएसपी जसकीरत सिंह चहल का पंजाब में आतंकवाद के साथ आज से नहीं बल्कि कई साल से पुराना नाता है। नाै अप्रैल 1977 को एएसआई के पद से पंजाब पुलिस में आने वाले चहल को एक जुलाई 1983 को सब इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नति मिली। फिर 21 जून 1985 को वे इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोट हुए। इस दौरान पंजाब में आतंकी गतिविधियों का काफी जोर था और वह अक्सर आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने में आगे रहते थे।
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चंडीगढ में हैंड ग्रेनेड हमला
- फोटो : अमर उजाला
मिला था वीरता पदक
पुलिस में अनुकरणीय सेवाओं के लिए चहल को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था। 1996 में पुलिस अधीक्षक के रूप में बारी से पहले उन्हें पदोन्नति भी दी गई थी।
कई बार मिली थी धमकियां
आतंकी दौर के दौरान उन्हें व उनके परिवार को कई बार जान से मारने की धमकियां भी मिली और इसी कारण कुछ साल पहले जालंधर में बतौर एसएसपी के पद से रिटायर होने वाले चहल को पंजाब पुलिस ने सुरक्षा भी मुहैया करवाई हुई थी। लेकिन अप्रैल 2017 में पंजाब सरकार ने चहल की सुरक्षा को हटा दिया था जिसके चलते उसे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भी जाना पड़ा था। चहकीरत चहल का कहना है कि पंजाब में आतंकवाद के दौर में उन्होंने कार्रवाई करने में उल्लेखनीय भूमिका अदा की थी। इस दौरान उनके घर को भी आग लगा दी गई थी। इंटेलिजेंस की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए चहल की सुरक्षा को वापिस लिया गया था।