जीएसटी छूट के बाद मकान खरीदना सस्ता नहीं, बल्कि महंगा ही पड़ेगा। हैरान हो गए न यह जानकर, मामला समझने के लिए यहां क्लिक करें। पता चला जाएगा कि यह फटका कैसे लगेगा।
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सांकेतिक तस्वीर
हरियाणा के विभिन्न जिलों में हाउसिंग बोर्ड के अफोर्डेबल हाउसिंग (किफायती) प्रोजेक्ट के तहत तैयार किए गए फ्लैट खरीदना अब आवंटियों (फ्लैट मालिकों) को महंगा पड़ेगा। सरकार की ओर से फ्लैट की खरीद पर वसूली जाने वाली जीएसटी एक अप्रैल से घटा दी गई है, लेकिन हाउसिंग बोर्ड अभी भी अपने आवंटियों से जीएसटी की पुरानी दर ही वसूल रहा है। आवंटियों द्वारा एतराज जताने पर हरियाणा हाउसिंग बोर्ड के अफसरों का कहना है कि अभी तक उनके पास इस बाबत अधिसूचना व कोई दिशा-निर्देश नहीं पहुंचे हैं। इसलिए पुरानी दर से ही जीएसटी लग रही है।
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हरियाणा में इस योजना के तहत हर जिले में हाउसिंग बोर्ड के हजारों अफोर्डेबल फ्लैट तैयार किए गए हैं। जिनकी खरीद ड्रा के बाद लोगों द्वारा दस साल की किस्तों में की गई है। हर महीने की दस तारीख तक आवंटियों को ये किस्त जमा करवानी है। लेकिन इन किस्तों की गणना में हरियाणा हाउसिंग बोर्ड अभी भी 12 प्रतिशत जीएसटी लगा रहा है। जबकि केंद्र सरकार द्वारा 25 फरवरी 2019 को घोषणा करके 1 अप्रैल 2019 से अर्फोडेबल हाउस (45 लाख तक के मकान) के लिए जीएसटी की दर घटाकर 1 प्रतिशत कर दी गई है। ऐसे में हाउसिंग बोर्ड के अर्फोडेबल घर खरीदने वालों को जबरदस्त फटका लग रहा है।
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आवंटियों ने बताया कि वे एक अप्रैल से हाउसिंग बोर्ड हरियाणा के चक्कर काट रहे हैं। हमने केंद्र की घोषणा का हवाला देते हुए बताया कि किफायती घरों की खरीद पर जीएसटी दर एक प्रतिशत हो गई है। लेकिन कोई भी अफसर यह सुनने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि अभी तक उनके पास इस संबंध में न तो कोई नोटिफिकेशन पहुंची है और न ही कोई दिशा-निर्देश। इसलिए अफसर उन्हें पुरानी जीएसटी पर ही किस्त जमा करवाने को मजबूर कर रहे हैं। बहुत से आवंटियों ने तो पेनल्टी लगने के डर से उसी दर पर किस्तें जमा करवा भी दी हैं। उधर, हरियाणा हाउसिंग बोर्ड की सचिव ममता शर्मा कहती है विभाग संबंधित अधिसूचना का इंतजार कर रहा है। उसके बाद ही आगामी कार्रवाई हो पाएगी।
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आवंटियों ने अपने फ्लैट की जीएसटी समेत पूरी राशि एकमुश्त चुकाने के लिए बैंकों में ऋण (जीएसटी की तुलना में कम दर पर) के लिए आवेदन भी किया था। इसके लिए उन्होंने तीन महीने पहले यह प्रक्रिया शुरू की थी। उन्होंने 10 से 12 हजार रुपये प्रोसेसिंग चार्ज और सर्वेयर खर्च भी बैंक को अदा कर दिया है। अप्रैल माह के पहले हफ्ते तक बैंकों से लोन मिल जाना था। लेकिन जीएसटी रेट कम होने की वजह से आवंटी अब ऋण लेने से कतरा रहे हैं, क्योंकि बैंक लोन लेकर हाउसिंग बोर्ड को पुरानी जीएसटी रेट पर एकमुश्त अदायगी से आवंटियों को काफी नुकसान होगा। लिहाजा उनके बैंक ऋण भी अब लटक गए हैं।
इस केस स्टडी से समझें मामला
पंचकूला में हाउसिंग बोर्ड हरियाणा के एक अर्फोडेबल फ्लैट की कीमत 25,72300 रुपये है। इस फ्लैट के रजिस्ट्रेशन के लिए आवंटी ने 227000 रुपये फीस हाउसिंग बोर्ड को अदा की। ड्रा के बाद आवंटी हाउसिंग बोर्ड में 341000 रुपये और जमा करवाएगा। फ्लैट का कब्जा लेने के दौरान आवंटी से हाउसिंग बोर्ड ने अतिरिक्त सुविधाओं के नाम पर 12 प्रतिशत जीएसटी के साथ 516230 रुपये बतौर अतिरिक्त चार्ज और वसूले। 10 रुपये अलॉटमेंट मनी भी ली गई। इसके बाद वसूले जाने वाले ब्याज पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगाकर 24800 रुपये मासिक किस्त तय हुई। 40000 रुपये अलॉटी से कॉपर्स फंड के नाम पर वसूले गए। अब आगामी 10 सालों तक 12 प्रतिशत जीएसटी के साथ आवंटी को हर महीने मकान की किस्त 24800 रुपये भरनी है।