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GST को लेकर खड़ी हुई नई मुसीबत, सरकार ने लिया एक और बड़ा फैसला

Wed, 04 Oct 2017 09:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब)
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जीएसटी - फोटो : Amar Ujala
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर अब एक और नई मुसीबत खड़ी हो गई है। सरकार ने बड़ा फैसला लिया है, जिससे कारोबारियों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
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GST
दरअसल, देश में जीएसटी लागू होने के बाद सरकार एक अक्तूबर से विभिन्न उत्पादों के निर्यात पर मिल रहे ड्रॉबैक की दरों को कम करने जा रही है। मसलन, साइकिल पर अभी करीब 11.7 फीसदी तक ड्रॉबैक मिल रहा है, जो अक्तूबर से मात्र दो फीसदी रह जाएगा। इसी तरह कॉटन गारमेंट पर ड्रॉबैक 7.7 फीसदी से कम होकर दो फीसदी रह जाएगा। सरकार के इस कदम से उद्यमी नाराज हैं।

 
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GST SHIMLA
उनका तर्क है कि अभी जीएसटी की उलझनें दूर नहीं हुई हैं, रिफंड मिल नहीं रहा है और ऐसे में ड्रॉबैक की दरों में कटौती बर्दाश्त से बाहर होगी। दूसरी बात, इससे उत्पादों की लागत बढ़ रही है। विदेशी बाजारों में खरीदार अधिक कीमत देने को तैयार नहीं है। नतीजतन नए ऑर्डर मिलने में दिक्कतें आ रही हैं और पहले से मिले ऑर्डर भी रद्द हो रहे हैं। नतीजतन, निर्यातक संगठनों ने सरकार से आग्रह किया है कि मार्च 2018 तक जीएसटी ड्रॉबैक की मौजूदा दरें यथावत रखी जाएं।

 

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जीएसटी लागू होने के बाद परेशान कपड़ा व्यापारी - फोटो : अमर उजाला
अपैरल एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल के कार्यकारिणी सदस्य तथा प्रमुख अपैरल निर्यातक हरीश दुआ का कहना है कि ड्रॉबैक दर घटने से इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ेगा। मसलन, अब कॉटन गारमेंट पर 7.7 फीसदी की बजाय दो फीसदी ड्रॉबैक मिलेगा। साथ ही 3.69 फीसदी रिबेट ऑन स्टेट लेवी (आरओएसएल) की बजाय अब केवल 0.96 ही मिलेगा। पहले ही वैश्विक बाजार में भारतीय गारमेंट निर्यातकों की हालत खराब है। अब केवल पांच फीसदी जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलेगा।
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Chandigarh GST
यदि धागा 250 रुपये किलो है, तो उस पर पांच फीसदी जीएसटी के हिसाब से 12.5  रुपये इनपुट क्रेडिट मिलेगा। जी-13 बाईसाइकिल के प्रधान यूके नारंग ने कहा कि साइकिल  निर्यातक ड्रॉबैक का लाभ विदेशी खरीदारों को देकर बाजार में  प्रतिस्पर्धा कर रहे थे, लेकिन अब यह लाभ वे आगे नहीं दे पा रहे हैं। साफ है कि इससे निर्यात पर  विपरीत असर पड़ेगा। विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा में दिक्कत आएगी। दूसरा, इनपुट लागत में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में इस खाई की भरपाई नहीं हो पाएगी।
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Chandigarh GST
पहले ही अर्थव्यवस्था नाजुक है, ऐसे में ड्रॉबैक जारी रख कर उद्योग को राहत दी जा सकती है। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश ढांडा का कहना है कि साइकिल पर ड्रॉबैक 12 फीसदी से कम कर दो फीसदी किया गया है। जबकि कम से कम सवा छह फीसदी ड्रॉबैक मिलना चाहिए। इस संबंध में पूरी गणना के साथ दस्तावेज तैयार करा लिए गए हैं। चार अक्तूबर को इस बाबत केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव ड्रॉबैक के दफ्तर में अपील की जाएगी।
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