500 और 1000 रुपये के नोट ने तो लोगों को परेशान किया ही है, अब 10-10 के भी मुसीबत बने हुए हैं। जानिए क्या है पूरा मामला?
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- फोटो : अमर उजाला
मोदी ने 500 और 1000 के नोट बंद करने का ऐलान करके देश को हिला दिया। वहीं, दूसरी ओर लोग 10-10 के सिक्कों को लेकर भी परेशान हैं। दरअसल, दुकानदार और ऑटो वाले 10-10 के सिक्के नहीं ले रहे हैं। वे यह कहकर सिक्के लेने से इंकार कर रहे हैं कि ये नकली हैं।
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हालांकि यह आरबीआई के नियमों के मुताबिक़ गलत है। बैंक ने दस रुपये का सिक्का चलन से बाहर नहीं किया है। अगर कोई सिक्के लेने से मना करता है तो उसे जेल हो सकती है। एफआईआर दर्ज होने पर पुलिस ऐसे लोगों के खिलाफ चालान करके न्यायालय से सजा दिला सकती है।
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- फोटो : अमर उजाला
आरबीआई के मुताबिक, 10 रुपए का सिक्का पूरी तरह से वैध है, लोग लेनदेन में इसका खुलकर इस्तेमाल करें। इसे लेने से मना करना भारतीय मुद्रा का अपमान है। अगर दुकानदार लेने से इंकार करता है कि उसके खिलाफ कई धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
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नोट बदलने बैंक में उमड़े लोग
- फोटो : अमर उजाला
नोट या सिक्के का जाली मुद्रण, जाली नोट या सिक्के चलाना और सही सिक्कों को लेने से मना करना भारतीय दंड संहिता की धारा 489ए से 489इ के तहत अपराध है। इन धाराओं के तहत किसी विधिक न्यायालय द्वारा आर्थिक दंड, कारावास अथवा दोनों की सजा दी जा सकती है।
एहतियात के तौर पर, अगर आप के भी शहर या कस्बे में भी ऐसा हो रहा हो तो उसका वीडियो या ऑडियो बना कर इलाके के डीएम ऑफिस या थाने में बताएं। इस तरह से भारतीय मुद्रा का बहिष्कार करने वाले को 17 साल की सजा या 20000 रुपये का जुर्माना या फिर दोनों सजा दी जा सकती है।