एक जुलाई से लागू हुए जीएसटी बिल का एक और नया सच सामने आया है, जिसके बारे में लोगों को बताया ही नहीं गया है। आप भी जान लीजिए, झटका लग सकता है।
विज्ञापन
2 of 8
gst himachal
दरअसल, हाल ही में तय किया गया है कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर सहित पर्वतीय राज्यों में उद्योगों को मार्च 2027 तक वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में छूट की सुविधा मिलती रहेगी। हालांकि उद्योगों को यह सुविधा रिफंड के रूप में मिलेगी। एक जुलाई से लागू होने के बाद इन राज्यों में लगने वाले उद्योगों को परोक्ष कर में छूट की सुविधा को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
विज्ञापन
3 of 8
GST SHIMLA
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार की कैबिनेट मीटिंग में यहा फैसला लिया गया। इसके तहत उद्योगों को 31 मार्च 2027 तक टैक्स रिफंड की सुविधा जारी रहेगी। सरकार अपने बजट से राशि आवंटित कर इन राज्यों में लगने वाली औद्योगिक इकाइयों को रिफंड जारी करेगी। जिन राज्यों को यह सुविधा मिलेगी उनमें सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, असम, मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड और त्रिपुरा भी शामिल हैं।
4 of 8
Chandigarh GST
वहीं, देश में बाकी राज्यों में जीएसटी ने हर उद्योग को बुरी तरह प्रभावित किया है। कुश्ती हो या कबड्डी, हॉकी हो या क्रिकेट, हर खेल में अव्वल रहने वाले हरियाणा के खेल कारोबार को जीएसटी ने बुरी तरह से प्रभावित किया है। गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू होने के दो माह के भीतर ही खेलों के सामान का कारोबार प्रदेश में 35 से 40 फीसदी तक नीचे गिर गया है। वहीं सामान की गुणवत्ता के कारण खेल पर भी असर पड़ रहा है।
विज्ञापन
5 of 8
GST
हरियाणा में औसतन हर घर से एक खेल प्रतिभा निकलती है, इसलिए यहां खेलों के सामान की भी बड़ी डिमांड रहती है। प्रदेश खेल सामान के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर है। खेल विभाग से लेकर कई यूनिवर्सिटी और खेल अकादमियों में मेरठ, दिल्ली और पटियाला से सामान आता है। मेरठ में तैयार क्रिकेट के सामान के मुरीद भारतीय टीम के खिलाड़ियों के साथ विदेशों में भी है। जीएसटी लागू होने के बाद से हरियाणा में खेल का सामान सप्लाई करने वाली कंपनियां कारोबार में 35 से 40 फीसदी तक गिरावट का दावा कर रही हैं।
विज्ञापन
6 of 8
जीएसटी लागू होने के बाद मार्केट का हाल
टैक्स स्लैब 12 से 28 फीसदी हुआ
खेलों के जिन सामानों पर पहले 0 से 6 फीसदी तक टैक्स लगता था अब उन पर 12 से 28 फीसदी जीएसटी लग रहा है। जीएसटी लागू होने के बाद खेलों के सामान को अलग-अलग कैटेगिरी में रखा गया है। हाईजंप पोल, शॉर्टपुट, जेवलिन, बॉक्सिंग ग्लव्स और जिम के सामान पर 28 फीसदी तक जीएसटी लग रहा है। क्रिकेट हेलमेट पर 18 फीसदी तो वहीं किट बैग और सीटी पर 28 फीसदी जीएसटी है। इससे सामान की डिमांड पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है।
विज्ञापन
7 of 8
gst
- फोटो : अमर उजाला
सात हजार की किट मिल रही 8960 में
क्रिकेट किट पर पहले 14.5 फीसदी टैक्स लगता था, लेकिन अब जीएसटी के बाद 28 फीसदी हो गया है। यानी पहले जो किट सात हजार रुपये की थी अब वह 8960 रुपये की मिल रही है। वहीं स्विमिंग सूट पर पहले 5 फीसदी टैक्स था, अब बढ़कर 28 पर हो गया है। ऐसे में यह भी 1408 रुपये में मिल रहा है। अन्य सामान पर भी अलग-अलग कैटेगिरी में जीएसटी लगा है।
जीएसटी के बाद खेल का सामान काफी महंगा हुआ है। यूनिवर्सिटी में हर साल करीब एक करोड़ रुपये का सामान दूसरे प्रदेशों से मंगाया जाता है। इस वर्ष का बजट अभी पास नहीं हुआ है। ऐसे में असमंजस है कि पहले जितना बजट ही मिला तो उसमें सामान पूरा नहीं मंगाया जा सकता। बजट बढ़वाने के लिए अधिकारियों से बातचीत की जाएगी।
- डॉ. डीएस ढुल, खेल निदेशक, महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी