अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में भारत के सांस्कृतिक झरोखों को देखकर पर्यटक भावविभोर हो गए। तस्वीरें
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International Gita Jayanti Festival 2016
अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के एक मंच पर भारत की लोक संस्कृति को देखा जा सकता है। उत्सव में पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान के लोक कलाकारों ने जमकर पर्यटकों का मनोरंजन किया। अहम पहलू यह है कि एनजेडसीसी 2 राज्यों के कलाकारों के साथ गीता जयंती में वर्ष 2002 में पहुंची थी, अब 14 सालों में 12 से ज्यादा राज्यों के कलाकार महोत्सव में शिरकत कर रहे है और लगातार पर्यटकों का मन मोह रहे हैं।
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महोत्सव के आठवें दिन वीरवार को क्राफ्ट और सरस मेला देखने के लिए पर्यटकों की भीड़ बढ़ रही है। महोत्सव में लोग जहां शिल्पकला को पसंद कर रहे हैं, वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आनंद ले रहे हैं। सांस्कृतिक मंच पर सबसे पहली प्रस्तुति हिमाचल प्रदेश के लोक कलाकारों ने दी। इन लोक कलाकारों ने चंबा जिले के पास स्थित मनीमहेश तीर्थ पर भगवान शिव-पार्वती की आराधना को अपने लोक नृत्य और वेशभूषा के माध्यम से दर्शाने का प्रयास किया।
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हिमाचल की प्रस्तुति के बाद उत्तराखंड के लोक कलाकारों ने छपेली लोक नृत्य की प्रस्तुति दी। इसके बाद राजस्थान के घूमर लोक नृत्य ने भी दर्शकों को टकटकी लगाने पर मजबूर कर दिया। किसी भी सांस्कृतिक कार्यक्रम में जान फूंकने का काम पंजाब का भांगड़ा करता है। इस लोक नृत्य की प्रस्तुति देने के लिए पंजाब से विशेष ग्रुप को आमंत्रित किया गया। पंजाब के बाद जम्मू-कश्मीर के लोक कलाकारों ने गीतडू की प्रस्तुति दी।
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उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के अधिकारी जितेंद्र सिंह, राधेश्याम, महेंद्र व कार्यक्रम अधिकारी जरनैल सिंह ने बताया कि एनजेडसीसी के निदेशक के दिशा-निर्देशानुसार ही महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जा रही है। इसके अलावा महोत्सव में एनजेडसीसी की तरफ से बाजीगरों के एक ग्रुप को आमंत्रित किया गया। इस ग्रुप के कलाकार घाटों के मुख्य मंच पर आदमी के सिर के ऊपर मटका रखा और मटके के ऊपर आदमी को खड़ा करके जो करतब दिखाए।
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गीता जयंती महोत्सव में पहली बार सैलानियों की संख्या दर्ज करने के लिए सभी एंट्री गेट पर सेंसर सिस्टम लगाया गया है। इस सिस्टम से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार अब तक 9 लाख से अधिक लोग गीता जयंती महोत्सव में शामिल हो चुके हैं। इस महोत्सव के आगोश में नित रोज कोई ना कोई ऐतिहासिक और यादगार क्षण समा रहा है। पहली बार 8 दिनों में गीता जयंती महोत्सव को लाखों लोगों का पहुंचना हुआ है।
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अहम पहलु यह है कि महोत्सव में सबसे ज्यादा 48 हजार 513 लोगों ने ब्रह्मसरोवर के कृष्णा घाट द्वार और सबसे कम 45 लोगों ने वीवीआईपी घाट द्वार से प्रवेश किया। उपायुक्त सुमेधा कटारिया के अनुसार शिल्प और सरस मेले के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखने के लिए करीब 9 लाख आ चुके हैं। पर्यटकों ने महोत्सव के आठवें दिन सरस और शिल्प मेले में जमकर खरीददारी की और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का जमकर आनंद उठाया।
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उन्होंने कहा कि महोत्सव के सातवें दिन बुधवार को ब्रह्मसरोवर के उत्तरी मुख्य द्वार से 46 हजार 277 पर्यटक, दक्षिणी मुख्य द्वार से 6 हजार 877, अभिमन्यु घाट द्वार से 8 हजार 142, मंदिर घाट से 6 हजार 210, भीम घाट द्वार से 40 हजार 335, वीवीआईपी घाट द्वार से 45, कृष्णा घाट द्वार से 48 हजार 513, जीओ गीता द्वार से 10 हजार 538, अर्जुन घाट द्वार से 46 पर्यटकों सहित 1 लाख 66 हजार 993 लोगों ने शिरकत की। 1 से 7 दिसंबर तक करीब 9 लाख लोग महोत्सव में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर चुके हैं।
मुंबई, दिल्ली, चंडीगढ़ एयरपोर्ट एलईडी स्क्रीन पर गीता
डीसी ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रयासों से ही पहली बार अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव का प्रचार-प्रसार अतरराष्ट्रीय स्तर पर किया गया है। इतना ही नहीं मुंबई, दिल्ली और चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर एलईडी स्क्रीन पर गीता जयंती महोत्सव का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। प्रशासन द्वारा ब्लाक स्तर पर भी एलईडी स्क्रीन लगाकर लोगों को महोत्सव के साथ जोड़ा गया है।