गणेश चतुर्थी के मौके पर हम आपको बता रहे हैं देश में मौजूद एक ऐसे अनोखे मंदिर के बारे में, जहां गणपति बप्पा के सामने लिखने या मूषक के कान में बोलने से हर मुराद पूरी हो जाती है।
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सिद्धिविनायक मंदिर
यह मंदिर कोई और नहीं, बल्कि मुंबई के प्रभा देवी इलाके में स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर हिंदू ही नहीं, बल्कि विभिन्न धर्मों के लोगों के लिए गहरी आस्था व पर्यटन का प्रतीक है। अपनी मुरादें लेकर देश व दुनिया से हजारों भक्त रोजाना इस मंदिर में बप्पा के समक्ष नतमस्तक होते हैं। मगर इस मंदिर में कुछ ऐसी गजब प्रथाएं भी हैं, जो भक्तों की बप्पा के प्रति अटूट अस्था को दर्शाती हैं।
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सिद्धिविनायक मंदिर
बिना स्याही बप्पा के सामने दीवार पर लिखते हैं मुराद
मंदिर में जहां श्री सिद्धिविनायक विराजमान है, उसके ठीक सामने एक दीवार पर संगमरमर का पट लगा हुआ है। बप्पा के दर्शनों के बाद जैसे ही भक्त दूसरे द्वार से बाहर आते हैं, तो वे बप्पा के सामने इस दीवार पर बिना स्याही अपनी अंगुली से अपने मन की मुराद लिख देते हैं। भक्तों का मानना है कि यहां जो मन की मुराद लिखी जाती है, वे भले ही किसी को नहीं दिखती, लेकिन सामने बैठे बप्पा न केवल उसे पढ़ लेते हैं, बल्कि उसे पूरी भी कर देते हैं। मुराद पूरी होने पर भक्त फिर से मंदिर आकर बप्पा का धन्यावाद भी करते हैं।
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सिद्धिविनायक मंदिर
मूषकों के कान में भी बोलते हैं मुराद
इसी तरह मंदिर परिसर में ही श्री सिद्धिविनायक मूर्ति भवन के बगल में ही चांदी के चार बड़े-बड़े मूषक (चूहा) विराजमान है। एक और गजब प्रथा के चलते भक्तजन मूषक के एक कान को अपने हाथ से बंद करते हैं और फिर दूसरे कान में अपनी मुराद बोलकर उसे बप्पा तक पहुंचाने की प्रार्थना की जाती है। भक्तों का मानना है कि मूषकों के कान में कही मुराद बप्पा तक पहुंचती है और बप्पा उनकी मुराद पूरी करते हैं।
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सिद्धिविनायक मंदिर
गर्भग्रह में चित्रित हैं दशावतार विष्णु की भी आकृतियां
मंदिर का गर्भग्रह इस तरह बनाया गया है कि अधिक से अधिक भक्त बप्पा के सभामंडप से सीधे दर्शन कर सके। गर्भग्रह के तीन दरवाजे हैं, जहां अष्ट विनायक, अष्टलक्ष्मी व दशावतार भगवान विष्णु की अकृतियां चित्रित हैं। किवदंती के अनुसार श्री सिद्धिविनायक मंदिर की स्थापना संवत 1692 में हुई थी। मगर सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक इस मंदिर का निर्माण 19 नवंबर 1801 को किया गया था। हर साल यहां गणेश उत्सव खासे उत्साह से मनता है। पांच मंजिला इस मंदिर में प्रवचन गृह, गणेश संग्रहालय, गणेश विपीठ, निशुल्क अस्पताल व रसोईघर मौजूद है।
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सिद्धिविनायक मंदिर
सिद्धिविनायक मंदिर न केवल मुंबई बल्कि पूरे भारत में सबसे प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में से एक है। शुरुआत में यह एक छोटा मंदिर था, लेकिन आज यह छह मंजिला विशाल मंदिर है इसका निर्माण 1801 में हुआ था। यह मुंबई के सबसे व्यस्त मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में प्रवेश के लिए दो द्वार हैं सिद्धि गेट से आप मुफ्त में भगवान के दर्शन कर सकते हैं जबकि रीद्धि गेट से सामान्य दर्शन होते हैं। यहां पर सीनियर सिटीजन, बच्चों, विकलांग, छोटे बच्चों के साथ महिलाएं, एनआरआई और विदेशी श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खास सुविधा होती है।
सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचने के लिए आपको पहले मुंबई पहुंचना होगा। मुंबई देश के सभी प्रमुख शहरों से हवाई, वायु और सड़क मार्ग के जरिए जुड़ा है। यहां तक जाने के लिए आप बस या टैक्सी का सहारा ले सकते हैं। मुंबई के कई हिस्सों से यहां आने के लिए सीधी बस सेवा उपलब्ध है। ट्रेन- अगर आप ट्रेन से आना चाहते हैं तो दादर की ट्रेन पकड़ें यहां से सिद्धि विनायक मंदिर आप 15 मिनट में पैदल चलकर पहुंच जाएंगे। यहां आने के लिए आपको लोकल ट्रेन महालक्ष्मी, एलफिनस्टोन रोड और लोअर परेल से मिल जाएंगी।