अगर आप किसी भी वेबसाइट को खोलकर सीधे लॉग इन करते हैं तो संभल जाइए। ‘एस’ फैक्टर का अटैक बड़े नुकसान का कारण बन सकता है, जानिए...
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ऑनलाइन फ्रॉड
- फोटो : फाइल फोटो
‘एस’ फैक्टर का अटैक बड़े नुकसान का कारण बन सकता है। खासकर बैंक की वेबसाइट से नेट बैंकिंग करने के मामले में यह काफी घातक सिद्घ हो सकता है। यूजर को भले ही लगे कि कंप्यूटर या एंड्रायड मोबाइल और उसके बीच तीसरा कोई नहीं है, लेकिन कोई तीसरा व्यक्ति आपकी हर ऑनलाइन एक्टिविटी को अपने अनुसार बदल सकता है। हो सकता है आपके बैंक खाते से मोटी रकम भी दूसरी जगह ट्रांसफर हो जाए। पंजाब यूनिवर्सिटी में वीरवार से शुरू हई तीन दिवसीय साइबर सिक्योरिटी एंड फोरेंसिक वर्कशॉप में एक्सपर्ट्स ने सचेत करने वाली ऐसी जानकारी साझा की।
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एस फैक्टर मतलब सिक्योरिटी
इंटरनेट पर कोई भी वेबसाइट ओपन करते समय हाइपर टेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल (एचटीटीपी) के आगे एस लगा होना बेहद जरूरी है। एचटीटीपी के आगे से एस अगर गायब है तो समझो कोई तीसरा बीच में अटैक कर चुका है। उसके बाद यूजर जो भी करेगा वह उस हैकर को पता होगा। हैकर अपनी मर्जी से कुछ भी कर सकता है। खासकर बैंकिंग ट्रांजेक्शन करते समय सावधान होने की जरूरत है। एस नहीं दिखने के बाद भी सिस्टम को इस्तेमाल करते रहना खतरे से खाली नहीं है।
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सबसे ज्यादा नुकसान लॉग इन करने वाली वेबसाइट के मामले में होता है। लॉग इन करने के बाद हैकर सभी तरह की जानकारी चुरा लेता है। नेट बैंकिंग, जीमेल, फेसबुक और अपनी कंपनी की वेबसाइट के लिए यूजर आईडी का इस्तेमाल करना होता है। इनमें सावधानी बरतनी जरूरी है। कौशल ने बताया कि हैकर को ऐसा करने में केवल दो मिनट लगते हैं। कौशल ने बताया कि वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) को क्रेक करना काफी मुश्किल होता है। इसलिए बैंक ट्रांजेक्शन के लिए ओटीपी का इस्तेमाल करते हैं।
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Fraud
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ऐसे बच सकते हैं अटैक से
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट सौरभ कौशल ने बताया कि ऐसी स्थिति से बचने के लिए तुरंत सिस्टम को शट डाउन कर देना चाहिए। इससे अटैक को रोका जा सकता है। फिर एक्सपर्ट की मदद लेनी चाहिए। एंड्रायड मोबाइल पर लोग अक्सर बहुत सी एप लॉग इन कर छोड़ देते हैं। जीमेल, फेसबुक और पेमेंट बैंक इसमें मुख्य हैं। इन एप को सप्ताह में एक बार लॉग आउट करना बेहद जरूरी है। वैसे तो काम खत्म होने के बाद ही लॉग आउट करना चाहिए।
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साइबर सिक्योरिटी के लिए नेशनल साइबर अथारिटी की जरूरत
पाकिस्तान और चीन रोजाना 60 करोड़ से ज्यादा वेबसाइट हैक करते हैं। हैक होने वाली सबसे ज्यादा वेबसाइट भारत की होती हैं। साइबर क्षेत्र में यह दोनों देश भारत की इतनी कमियां जानते हैं कि देश को पैरालाइज कर सकते हैं। पीयू में आयोजित वर्कशॉप में जानकारी देते हुए पीएमओ में पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे डॉ. एसडी प्रधान ने यह जानकारी दी। डा. प्रधान ने कहा कि इससे बचने के लिए भारत को साइबर सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ पॉलिसी सॉल्यूशन बनानी होगी। इस्राइल ने नेशनल साइबर अथारिटी बनाकर खुद को अभेद बना लिया है। कोई अटैक होता है तो दूसरा सिस्टम टेक ओवर कर लेता है। आधार से सभी चीजों को जोड़ने के साथ उन्होंने इसका बैकअप रखने के लिए लीगल पॉलिसी बनाने की बात भी कही।
बाहरी सोशल साइटों पर रोक की जरूरत
मध्यप्रदेश और लखनऊ में सामने आए आईएसआईएस खुरासन मॉडयूल के बारे में पूछे जाने पर डा. प्रधान ने बताया कि सोशल मीडिया और इंटरनेट पर बहुत सा ऐसा कंटेंट रहता है जिससे युवा भटक जाते हैं। बहुत सी वेबसाइट को बैन किया जाता है लेकिन फिर से और वेबसाइट आ जाती है। सोशल साइट्स का ऑपरेशन देश से बाहर से होता है या तो चाइना की तरह बाहरी सोशल साइटों पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए। लेकिन अभी ऐसा करना संभव नहीं है। भारत सरकार इस मामले में तेजी से काम कर रही है। इससे निपटने का प्लान तैयार हो रहा है।