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शबद कीर्तन से चढ़ता है दिन, ताश-हुक्के पर गपशप से होती है शाम, तस्वीरों में देखें किसान आंदोलन के रंग 

Sat, 12 Dec 2020 01:02 PM IST
निवेदिता शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सोनीपत में धरने पर बैठे किसानों की दिनचर्या आम दिनों की तरह चलने लगी है। - फोटो : अमर उजाला
कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए सिंघु बॉर्डर पर 27 नवंबर से किसान धरने पर बैठे हैं। केंद्र से हर वार्ता बेनतीजा रही है। आंदोलन कब तक चलेगा, कोई नही जानता। ऐसे में धरने पर बैठे किसानों ने अपनी दिनचर्या तय कर ली है। किसान आंदोलन में दिन की शुरुआत शबद कीर्तन से होती है। फिर चाय नाश्ते के बाद धरना। लंगर में सेवा करने के बाद किसान ताश खेलते हैं, हुक्का गुड़गुड़ाते हैं और फिर शाम के खाने की तैयारी हो जाती है। रात में सेहत फिट रखने के लिए काजू-बादाम वाला दूध भी जरूर पिया जाता है। 
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पंजाब से गद्दे लेकर पहुंचा किसान और धरने में लगाए गए वाटरप्रूफ टेंट। - फोटो : अमर उजाला
पंजाब से पहुंचे गद्दे, सर्दी से बचाएंगे वाटरप्रूफ टेंट 
किसानों ने अपनी ट्रैक्टर-ट्रालियों को घर बनाया हुआ है। खाद्य सामग्री से लेकर सोने तक की व्यवस्था ट्राली के अंदर है। पंजाब से किसानों को ठंड से बचाने के लिए लगातार रजाई, गद्दे पहुंच रहे थे। शुक्रवार को वाटरप्रूफ टेंट भी पहुंचाए गए। इनमें किसान सर्दी से आसानी से बच सकता है। साथ ही यह सुरक्षा के लिहाज से भी बेहतर है। पंजाब का किसान एक हजार रजाई व गद्दे लेकर धरनास्थल पर पहुंचा। 
 
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सब्जी काटते किसान और रोटी सेकती महिला। - फोटो : अमर उजाला
कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे महिला-पुरुष
सिंघु बॉर्डर पर धरने के शुरुआती दिनों में महिला किसान काफी कम थीं, जिससे लंगर तैयार करने से लेकर अन्य सभी कार्य पुरुष किसानों को खुद ही करने पड़ते थे। बाद में पंजाब से काफी संख्या में महिला किसान भी पहुंच गई हैं। अब सब्जी बनाने की जिम्मेदारी पुरुष किसानों की होती है तो रोटी सेकने की जिम्मेदारी महिला किसान उठाती है। शाम की चाय भी ज्यादातर महिला किसान बनाती है। 

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धरने में कपड़े धोते युवा किसान। - फोटो : अमर उजाला
कपड़े धोने के लिए लगाई मशीन
धरनास्थल पर कपड़े धोने के लिए काफी मशीनें लगा दी गई हैं और वहां कपड़े धोने की पूरी जिम्मेदारी युवा किसानों ने संभाली हुई है। युवा किसानों ने इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया है। सफाई की सेवा भी युवा किसान करते हैं, जिससे वहां आसपास गंदगी नहीं रह सके। बर्तन धोने की जिम्मेदारी भी युवा किसान ही निभा रहे हैं। 
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हरियाणा से रोजाना हो रही दूध की सेवा। - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा से हो रही दूध की सेवा
हरियाणा के अलग-अलग गांवों से लोग खाने-पीने का सामान लेकर पहुंच रहे हैं। गांव सेवली से ग्रामीण पुष्कर ने बताया कि वह रोजाना 800-900 लीटर लस्सी, 500 लीटर दूध व आरओ का पानी ट्रालियों में लेकर पहुंचते हैं और किसानों में वितरित करते हैं। यही नहीं किसान यहां सेवा का जिम्मा भी खुद उठाते हैं और बुजुर्गों व महिलाओं की देखरेख में लगे रहते हैं।
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सोनीपत में धरनास्थल पर नमाज अदा करते मुसलमान। - फोटो : अमर उजाला
धरने पर दिख रहा सर्वधर्म का सामंजस्य
कुंडली बॉर्डर पर जमे किसानों को समर्थन देने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों की तादाद लगातार बढ़ रही है। यहां ये लोग लंगर तैयार करने में हाथ बंटा रहे हैं। यहां मौजूद मोबिन, अरशद, फकरूद्दीन व नवाब सिद्दीकी ने बताया कि वह लंगर के समय सेवा में जुट जाते हैं तो बाकी समय में सभा में मौजूद रहते हैं। वह नमाज भी यहीं धरने के बीच सड़क पर बैठकर पढ़ते हैं और फिर सेवा में जुट जाते हैं। शुक्रवार को जुमे की नमाज उन्होंने सड़क पर ही अदा की।
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कुंडली में नाचते किसान। - फोटो : अमर उजाला
थोड़ा मनोरंजन भी... घुड़चढ़ी में नाचे किसान 
विरोध जता रहे किसानों के बीच शुक्रवार को कुंडली का युवक घुड़चढ़ी लेकर पहुंचा तो किसानों ने हंसी खुशी उसे जाने दिया। इतना ही नहीं युवक की घुड़चढ़ी में कई किसान जमकर नाचे और खुशियां मनाईं। इस दौरान दूल्हा व उसके परिवार के सदस्य भी गदगद नजर आए। किसानों ने कहा कि वह शांतिपूर्वक अपना आंदोलन कर रहे हैं। वह यहां किसी की खुशियों में बाधा बनने नहीं आए हैं। वह तो लोगों की खुशियों में भी खुद भी शामिल हैं।  
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