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राकेश टिकैत के इस बयान पर बढ़ी तकरार, साथी किसान नेताओं की नसीहत, बड़े नेता हैं, सोच-समझकर बोलें

Fri, 26 Feb 2021 01:28 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
किसान आंदोलन को दोबारा से खड़ा करने वाले भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के बयान को लेकर लगातार तकरार बढ़ती जा रही है। जहां एक ओर फसलों को जलाने वाले उनके बयान के बाद किसानों ने खेतों में ट्रैक्टर चलाना शुरू कर दिया तो वहीं अब संसद का घेराव करने वाले उनके बयान पर तकरार शुरू हो गई है। किसान नेताओं ने उनको सोच समझकर बयान देने की नसीहत दी है। किसान नेताओं का मानना है कि राकेश टिकैत के हर बयान पर पूरी दुनिया की नजर रहती है और उनके बयान से निकलने वाला संदेश पूरी दुनिया में जाता है। इसलिए उनको ऐसे बयान देने से बचना चाहिए और उन्होंने इसे उनका निजी बयान बताया। गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली में बवाल के बाद टूटते आंदोलन को भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के आंसुओं ने दोबारा से खड़ा किया था। उसके बाद से राकेश टिकैत ही किसानों के सबसे बड़े नेता बने हुए हैं। उनको उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि हरियाणा, राजस्थान समेत अन्य प्रदेशों में सबसे ज्यादा तवज्जो मिल रही है। लेकिन उनके बयान संयुक्त किसान मोर्चा को परेशान कर रहे हैं और उनके बयान को लेकर तकरार बढ़ती जा रही है। 
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कुंडली बॉर्डर पर बैठे किसान। - फोटो : अमर उजाला
राकेश टिकैत ने सबसे पहले देशव्यापी चक्काजाम को अचानक उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में करने से मना कर दिया था। जिस पर संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने नाराजगी जताई थी। उसके बाद राकेश टिकैत ने फसल जलाने का बयान दिया तो किसानों ने खेतों में खड़ी फसल की जुताई कर नष्ट करना शुरू कर दिया। जिससे किसान नेताओं को फसल नष्ट नहीं करने की अपील करनी पड़ रही है और बैठक कर किसानों को जागरूक करना पड़ रहा है। यह मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब राकेश टिकैत ने 40 लाख ट्रैक्टर लेकर संसद का घेराव करने का बयान दिया है और इस पर फिर तकरार हो गई है।
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मंच से संबोधित करते किसान। - फोटो : अमर उजाला
संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है और राकेश टिकैत को इस तरह के बयान नहीं देने की नसीहत तक दे डाली है। उनका मानना है कि इतने बड़े किसान नेता कोई बयान देते हैं तो उस पर अमल भी होना चाहिए। इस तरह से केवल बयान देने से गलत संदेश जाता है और उनके बयान को इस समय काफी अहम माना जाता है। किसान नेताओं ने यह भी साफ कर दिया कि यह उनका निजी बयान है। उन्होंने कहा कि इस तरह से कोई भी नेता बयान देता है तो वह उसका निजी बयान होगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा का बयान उसे ही माना जाएगा जो बैठक के बाद जारी किया जाएगा। 

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राकेश टिकैत - फोटो : एएनआई
संसद का घेराव करने वाला बयान राकेश टिकैत का निजी बयान है। वह बड़े किसान नेता हैं और उनका आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान है। उनका एक-एक शब्द पूरे देश व दुनिया के किसान सुनते हैं। इसलिए उनको हर बयान सोच-समझकर देना चाहिए। इसके अलावा किसान किसी भी तरह से अपनी फसलों को नष्ट न करें। क्योंकि यह संयुक्त किसान मोर्चा का फैसला नहीं है और इस तरह का फैसला लिया भी नहीं जाएगा। - विकल पचार, अध्यक्ष अखिल भारतीय स्वामीनाथन संघर्ष समिति।
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राकेश टिकैत - फोटो : एएनआई
संसद का घेराव करने का कोई फैसला नहीं हुआ है। राकेश टिकैत ने ऐसा किस वजह से कहा है, इस बारे में वह खुद बता सकते हैं। लेकिन उनके जैसे किसान नेता को इस तरह के बयान नहीं देने चाहिए। उनको वह बयान ही देने चाहिए जो किसानों के लिए काफी अहम हो। किसानों को फसल भी खराब नहीं करनी चाहिए, बल्कि फसल पकने पर कटाई करनी चाहिए और गरीबों की मदद करनी चाहिए। - बूटा सिंह शादीपुर, अध्यक्ष भारतीय किसान मंच एकता।
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