हरियाणा में हड़प्पा कालीन सभ्यता के गांव राखी गढ़ी में खुदाई के दौरान निकले नर कंकालों ने एक स्पष्ट मैसेज दिया है। दरअसल नर कंकालों से स्पष्ट है कि हड़प्पाकालीन सभ्यता के दौरान लोगों को मरने के बाद जलाया नहीं जाता था बल्कि उनको जमीन में दफन किया जाता था। पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञ भी अब इस बात की पुष्टि करने लगे हैं। शव को दफनाते समय उसका सिर उत्तर दिशा की तरफ और पांव दक्षिण की तरफ रखे जाते थे।
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खुदाई में निकले 'नर कंकालों' ने खोला चौंकाने वाला राज
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गौरतलब है कि गांव राखी गढ़ी में खुदाई के दौरान पांच हजार वर्ष पुराने कई कंकाल मिल चुके हैं। अब एक प्रतीकात्मक कंकाल भी मिला है। राखी गढ़ी के टीलों पर खुदाई में जुटे पूना की डेक्कन यूनिवर्सिटी के छात्र भी काफी उत्साहित हैं। छात्रों में हड़प्पाकालीन संस्कृति की जीवन शैली को जानने की उत्सुकता बढ़ी हुई है।
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रोज निकल रहे अवशेषों ने छात्रों को रोमांचित कर दिया है। छात्र उस समय की सभ्यता के साथ-साथ लोगों के जीवन और उनकी शैली को भी गहनता से जानने का प्रयास कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर व खुदाई इंचार्ज निलेश जाघव के निर्देशन में इन विद्यार्थियों की ओर से खुदाई का काम निरंतर चल रहा है।
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पुरातत्व विशेषज्ञों ने खुदाई के दौरान निकले इन कंकालों को तीन क्षेणियों में बांटा है। पूरा कंकाल, अधूरा कंकाल और प्रतीकात्मक कंकाल। विशेषज्ञों का मानना है कि जो कंकाल आज तक भी पूरी तरह से सुरक्षित है, वह पूरा कंकाल है। साथ ही अंदाजा लगाया गया है कि उस व्यक्ति की मौत अपने घर पर ही किसी बीमारी के दौरान हुई होगी।
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अधूरा कंकाल उस व्यक्ति का पाया जाता है, जिसकी मौत किसी हादसे में हुई हो और प्रतीकात्मक कंकाल उन लोगों के माने हैं, जिनका मरने के बाद शव परिजनों को मिला ही नहीं हो। उसकी शांति के लिए उसका संस्कार भी रस्मों के साथ किया हो। जिस व्यक्ति का मरने के बाद शव उनके परिजनों को नहीं मिलता था, तो परिजन रस्मों के हिसाब से तीस अलग-अलग बर्तनों में खाना भरकर उसके स्थान पर दफना देते थे। मान्यता थी कि इस प्रकार मृतक की आत्मा को शांति मिल जाती थी।
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खुदाई प्रभारी निलेश जाघव ने बताया कि खुदाई के दौरान चार नर कंकाल मिले हैं। वहीं साथ में एक प्रतीकात्मक कंकाल की निशानी भी पाई गई हैं। वहां पर सिर्फ 30 बर्तन ही मिले हैं। शव की एक भी हड्डी वहां पर नहीं मिल पाई गई। ऐसी स्थिति में पाई जाने वाली जगह को प्रतीकात्मक कंकाल की जगह मानी जाती है। उस जगह की मिट्टी के सैंपल लिए गए हैं। इससे आगे की जांच-पड़ताल की जाएगी।
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हड़प्पाकालीन संस्कृति के मानव नर कंकाल हरियाणा के फरमाणा व यूपी के सनौली में भी मिल चुके हैं, लेकिन वे कंकाल पूरी तरह से सुरक्षित नहीं थे। इस वजह से उन कंकालों का डीएनए टेस्ट नहीं हो सका था और राखी गढ़ी के टीलों पर पाए गए कंकाल पूरी तरह से सुरक्षित हैं। जल्द ही इनका डीएनए टेस्ट हो जाएगा