कृत्रिम पैर मिल गए, अब इन चार 'चिरागों' के जीवन में उजियारा ही उजियारा होगा। पढ़ें पहले हादसे और फिर असहनीय दर्द की कहानी, पीड़ितों की जुबानी।
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दिगंबर जैन मंदिर
श्री दिगम्बर जैन मंदिर के पचास वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में चंडीगढ़ में सेक्टर 27 स्थित दिगंबर जैन सोसायटी में पांच दिवसीय निशुल्क कृत्रिम अंग वितरण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। 17 अप्रैल से चल रहा यह शिविर युवाओं के लिए एक नई जिंदगी से कम नहीं है। अपने सपनों को दिल में समेटे युवा लगभग निराश हो चुके थे, लेकिन कृत्रिम अंगों ने उन्हें उम्मीद की एक किरण दिखाई है। नोएडा से आए डॉ. आनंद शुक्ला और डॉ. मेघना बडोला ने बताया कि तीन दिन में 105 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। लगभग सभी को कृत्रिम अंग दिए जा चुके हैं। कुछ लोग रह गए हैं, उन्हें नोएडा बुलाया जाएगा। साथ ही जिन लोगों को कृत्रिम अंग लगाए गए हैं, उन्हें फॉलोअप के लिए नोएडा बुलाया जाएगा। यह शिविर भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति की ओर से ब्रिगेडियर केएल सिंह और रिटायर्ड डीजीपी चंडीगढ़ एसके जैन की सहायता से आयोजित किया जा रहा है।
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चिराग
- फोटो : फाइल फोटो
नाम- चिराग, उम्र-18 वर्ष
पानीपत निवासी चिराग अपने मामा के घर कैथल जा रहा था। स्टेशन पर ट्रेन रुकी। भीड़ ज्यादा होने के कारण चिराग लोगों के उतरने का इंतजार करता रहा। जैसे ही वह उतरने लगा अचानक ट्रेन चलने लगी। हड़बड़ाहट में वह ट्रेन की चपेट में आ गया और उसके दोनों पैर कट गए, लेकिन चिराग के हौसले आज भी बुलंद हैं। सलमान खान के जैसी बॉडी बनाने के लिए वह काफी मेहनत करता है। कृत्रिम पैर लगने के बाद अपने सपनों को साकार कर सकेगा।
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हरदीप सिंह
नाम- हरदीप सिंह, उम्र- 14 वर्ष
अमृतसर निवासी निवासी हरदीप अपने परिवार के साथ लुधियाना जा रहा था। रास्ते में वह ट्रेन से गिर गया। हादसे में उसके दोनों हाथ और दोनों पैर कट गए। डॉक्टरों ने उसे अगस्त में नोएडा बुलाया है। जहां उसे कृत्रिम हाथ व पैर लगाए जाएंगे। ट्रस्ट के इस सहयोग से एक ओर जहां हरदीप के माता पिता काफी खुश हैं। वहीं वह भी अपने दोस्तों के साथ खेलने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
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मनीष
नाम- मनीष शर्मा, उम्र- 22 वर्ष
रायपुररानी निवासी मनीष अपने रिश्तेदार के घर नारायनगढ़ जा रहा था। अचानक एक हादसा हुआ और उसका एक पैर कट गया। मनीष ने हिम्मत ही छोड़ दी थी कि कभी दोनों पैरों से चल सकता है। शिविर में पहुंचा तो डॉक्टरों ने कहा कि कृत्रिम पैर लग जाएगा। डरा हुआ मनीष डॉक्टरों से बार बार पूछने लगा कि मुझे दर्द तो नहीं होगा, लेकनि डॉक्टरों ने उसे पैर लगाने के बाद हाथ पकड़कर चलाया। अब वह काफी खुश है।
नाम- संदीप सिंह, उम्र- 18 वर्ष
अमृतसर निवासी संदीप सिंह एक दिन स्कूल गया था। अचानक किसी बच्चे ने खेल खेल में पैर लगाकर उसे गिरा दिया। अचानक झटका लगने से पीछे आ रहे बच्चे भी पैर पर गिर गए। डॉक्टरों ने कहा कि एक पैर काटना पड़ेगा। मायूस संदीप को शिविर ने जैसे एक नई जिंदगी दे दी। अब वह कृत्रिम पैर से आसानी से चल सकता है और पहले की तरह स्कूल जा सकता है।