डेंगू दिन प्रतिदिन कहर ढाये जा रहा है। रोजाना लोग काल का ग्रास बन रहे हैं। ऐसे में इससे बचने के उपाय करना बेहद जरूरी है। 11 क्लिक करके जानिए तरीके।
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11 क्लिक करके जानिए, डेंगू को और इससे बचने के तरीके
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डेंगू को ब्रेक बोन बुखार भी कहते हैं। यह एडिस इजिप्टी मच्छरों के काटने से होती हैं। इसका मच्छर ज्यादातर दिन में काटता है। इसमें तेज बुखार के साथ शरीर पर चकते बनने शुरू हो जाते हैं। जहां यह महामारी के रूप मे फैलता है, वहाँ एक समय मे अनेक प्रकार के विषाणु सक्रिय हो सकते है। डेंगू के वायरस से जल्द निजात पाने के लिए इसके लक्षणों को पहचान कर सही समय पर डॉक्टर की सलाह लें।
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अगर उपचार में अधिक देरी हो जाए तो यह हेमोरेजिक फीवर का रूप ले लेता है। इसमें बुखार बहुत तेज हो जाता है। चकतों से रक्तस्त्राव शुरू हो जाता है। शरीर में रक्त की कमी हो जाती है, थ्रोम्बोसाटोपेनिया हो जाता है, कुछ मामलों में डेंगू प्रघात की दशा आ जाती है, जिसमे मृत्यु दर बहुत ऊँची होती है।
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डेंगू बुखार तीन तरह का होता है। पहला क्लासिकल डेंगू बुखार, दूसरा डेंगू हैमरेजिक बुखार व तीसरा डेंगू शॉक सिंड्रोम। बुखार आने पर तुरंत निकट की डिस्पेंसरी व अस्पताल में संपर्क करें। मरीज को किस तरह का डेंगू हुआ है, जानने के लिए टेस्ट बेहद जरूरी है। उसके मुताबिक ही वैक्सीन दी जाएगी। डेंगू से बचाव के लिए फिलहाल कोई टीका नहीं आया है।
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डेंगू अचानक तीव्र बुखार से शुरू होता है, जिसके साथ तेज सिर दर्द होता है, मांसपेशियों मे भयानक दर्द होता है। शरीर पर लाल चकते बन जाते है जो सबसे पहले पैरों पर, फिर छाती पर तथा कभी कभी सारे शरीर पर फैल जाते है। इसके अलावा पेट खराब हो जाना, उसमें दर्द होना, कमजोरी, दस्त लगना, ब्लेडर की समस्या, निरंतर चक्कर आना, भूख ना लगना भी इसके लक्षण है।
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डेंगू से बचने के उपायः घरों के आसपास पानी इकट्ठा न होने दें। कूलरों का पानी सप्ताह में एक बार जरूर निकालें। पानी की टंकी के ढक्कन लगा कर रखें। जमीन में बनी पानी की हौदी को हर हफ्ते साफ करें। छत पर बर्तन, टिन, टायर, घड़े, टूटे हुए गमले व ड्रम को न फेंके। गमलों, बोतलों में लगाए गए पौधों के पानी के सप्ताह को एक बार अवश्य बदलें। अगर लोग ऐसा करेंगे तो डेंगू का लारवा पनप नहीं पाएगा।
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डेंगू से बचने को प्राकृति उपायः मच्छर घर में ना पनपे इसके लिए अपने घर की खिड़कियों पर तुलसी का पौधा भी रख सकते हैं इससे मच्छर नहीं होंगे। कमरों के खिड़की-दरवाजें बंद करके कपूर जला लें और 15 से 20 मिनट कमरों को बंद रखें। इससे आप मच्छरों को आसानी से दूर कर सकते हैं। शाम को घर में नीम का धुआं करने से भी मच्छर नहीं आते। शाम को घर में लैवन्डर अरोमा कैंडल भी जला सकते हैं।
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दूसरी ओर, बारिश डेंगू के लारवा को पनपने में सहायक होती है। इससे मरीजों की तादाद बढ़ सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक डेंगू के लिए 24-35 डिग्री सेल्सियस का तापमान और साथ में उमस का होना, वायरस के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। बारिश से तापमान में कमी तो आएगी साथ ही उमस भी बढ़ने के आसार हो जाते हैं।
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डेंगू के मामले में चंडीगढ़ की स्थिति फिलहाल ठीक है, क्योंकि डेढ़ महीने पहले नेशनल वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (एनवीबीडीसीपी) चंडीगढ़ के सर्वे के दौरान रोजाना 100 जगह से लारवा मिल रहे थे। सर्वे के दौरान अनुमान लगा लिया था कि इस बार डेंगू के केस काफी बढ़ सकते हैं, इसलिए विभाग पहले ही तैयार था।
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मंगलवार को चंडीगढ़ में डेंगू के मरीजों की संख्या 80 तक पहुंच गई है। सोमवार तक डेंगू के केसों की संख्या सिर्फ 62 थी। एक ही दिन में 18 नए मरीज आए हैं। सूचना मिलते ही इन मरीजों के घर में मलेरिया विंग की टीम पहुंची। आसपास के घरों को भी चेक किया गया। छिड़काव कर दिया गया है। लोगों से कहा गया कि वे अपने घर पर पानी न जमा होने दें।
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चंडीगढ़ में डेंगू के केस सेक्टरों से सबसे ज्यादा आ रहे हैं। खासकर सेक्टर 38, 39 से। इस बार जो हाई रिस्क इलाके थे, उनमें इंडस्ट्रियल एरिया शामिल था, उस जगह से एक भी केस नहीं आया है। सर्वे के दौरान पता चला है कि सेक्टरों में स्थित मंदिर, गुरुद्वारा, एनजीओ के भवन और सरकारी बिल्डिंगों के कूलर और छत से काफी लारवा मिल रहे हैं।