पीएम मोदी के डिजिटल प्रोजेक्ट में शामिल 'इंजीनियर' ने 35 लाख के असली नोट खपाने के लिए भी बड़ा शातिर तरीका अपनाया। 42 लाख की जाली करेंसी समेत पकड़े गए गिरोह का मास्टर माइंड अभिनव बहुत शातिर है। नोटबंदी की घोषणा के तुरंत बाद वह 500 और 1000 के पुराने नोटों को नई करेंसी में बदलने के कारोबार में जुट गया था। उसके पास जो भी असली नोट आते थे, वह अपनी कंपनी व विश्वास पात्र मुलाजिमों के खातों में जमा करवाता था।
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नकली नोट चलाने वाले शातिर
- फोटो : अमर उजाला
पता चला है कि इस दौरान उसने 35 लाख रुपये अपने मुलाजिमों व कंपनी के खातों में जमा करवाए हैं। पुलिस ने उसकी आनलाइन ट्रांजेक्शन की पूरी डिटेल निकाल ली है। साथ ही पुलिस उसकी ईमेल की भी बारीकी से जांच कर रही है।
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पुलिस को यह भी लग रहा है कि उसकी कंपनी ने नेत्रहीनों के लिए जो छड़ी बनाई थी। उसे इंटरनेशनल स्तर पर भी काफी प्रशंसा मिली थी। ऐसे में उसे विदेशी संस्थाओं से भी पैसा आया होगा। पुलिस ऐसे संपर्कों को भी जांच रही है।
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पुलिस का कहना है दोनों ड्राइवरों को पकड़ने के लिए छापेमारी चल रही है। उम्मीद है कि जल्द ही आरोपी गिरफ्तार कर लिए जाएंगे। दूसरी तरफ बुधवार को अदालत में पुलिस को उसके वकील द्वारा दायर की गई याचिका पर जवाब देना है। जिसमें उसके वकील ने चेक बुक जारी करने की मांग की थी।
जिक्रयोग है कि आरोपियों को पुलिस ने 29 नवंबर को तीनों आरोपियों अभिनव वर्मा, उसकी कजिन विशाखा व सूरज नागपाल को जगतपुरा से गिरफ्तार किया था। वह हरियाणा नंबर वाली लाल बत्ती लगी ऑडी कार में जाली करेंसी लेकर जा रहे थे। पुलिस ने आरोपियों को काबू करते समय बताया था कि उनके पास से 42 लाख की जाली करेंसी मिली थी। सारे दो-दो हजार के नोट थे। उक्त लोग तीस फीसदी रकम काटकर लोगों के पुराने नोट नए नोटों में बदलते थे।