23 मई को फिर प्रदीप कुमार का फोन आया और उन्हें मिलने सचिवालय बुलाया। यहां पर मंत्री ने राजिंदर को अपने ओएसडी को पांच लाख रुपये देने को कहा। पांच लाख रिश्वत मांगने की रिकॉर्डिंग राजिंदर के पास थी। इसे उन्होंने पुलिस और मुख्यमंत्री को सौंप दी थी। शिकायतकर्ता ने एक फोन नंबर का जिक्र अपनी शिकायत में किया है। इस पर 8, 10, 12, 13 और 23 मई को व्हाट्सएप कॉल आई और उन्हें बार-बार बुलाकर रिश्वत मांगी गई। आखिर में जब आरोपियों को लगा कि बात नहीं बनेगी तो उन्होंने धमकी दी कि यदि कमीशन नहीं दिया तो उनका करियर खराब कर देंगे।