2000 रुपये के असली नोट को स्कैन कर साधारण पेपर पर जाली नोट छाप दिए और मार्किट में चला भी दिया। देखिए इस गोरखधंधे का खुलासा कैसे हुआ?
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संगरूर में पकड़े गए दो हजार रुपये के नकली नोट
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, मोहाली के बाद संगरूर में 4 युवक 2000 रुपये के नकली नोटों के साथ पकड़े गए, जिन्होने पूछताछ में पुलिस के सामने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
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संगरूर में पकड़े गए दो हजार रुपये के नकली नोट
गिरफ्तार युवकों के नाम हरभजन दास निवासी बलियाल, जसवीर सिंह जस्सी निवासी भवानीगढ़, जयदेव उर्फ जज्जी निवासी संगरूर व भगवान दास उर्फ भलवान निवासी संगरूर बताए जा रहे हैं। इनकी निशानदेही पर पुलिस ने जाली नोट तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला स्कैनर, प्रिंटर व अन्य सामान बरामद किया।
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संगरूर में पकड़े गए दो हजार रुपये के नकली नोट
भवानीगढ़ पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान एक कार में सवार इन चारों युवकों से 100 व 2000 के जाली नोटों की 4 लाख 15 हजार रुपये की करेंसी बरामद की। इनमें से 2000 के नोटों के रूप में 4 लाख और 100 रुपये के 15 हजार की करेंसी थी।
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संगरूर में पकड़े गए दो हजार रुपये के नकली नोट
- फोटो : अमर उजाला
एसएसपी प्रितपाल सिंह थिंद ने बताया कि थाना भवानीगढ़ के प्रभारी गुरदीप सिंह ने बस स्टैंड के पास नाका लगाए हुआ था। इसी बीच उन्हें गुप्त सूचना मिली कि कुछ व्यक्ति जाली करेंसी का कारोबार करते हैं, जिसपुर उनकी टीम ने गांव रामपुरा के टी-प्वाईंट पर नाकाबंदी कर दी।
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संगरूर में पकड़े गए दो हजार रुपये के नकली नोट
नाकाबंदी के दौरान एक सफेद रंग की जैन कार रोकी गई, जिसमें चार लोग सवार थे। पुलिस ने तलाशी के दौरान कार सवार हरभजन दास, जसवीर सिंह, भगवान दास, जैदेव को काबू करके इनसे जाली करेंसी बरामद की। इनसे पूछताछ जारी है और कई अहम सुराग लगने की संभावना है। इनके बाकी साथियों की भी पुलिस तालाश कर रही है।
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संगरूर में पकड़े गए दो हजार रुपये के नकली नोट
एसएसपी थिंद ने बताया कि यह गिरोह पहले भी 100, 500 व 1000 रुपये के नोट जाली तैयार करता था। अब नोटबंदी के बाद उन्होंने 2000 का नकली नोट भी बना दिया। वह लाखों की कीमत के यह नोट मार्केट में पहुंचा भी चुके हैं।
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संगरूर में पकड़े गए दो हजार रुपये के नकली नोट
- फोटो : अमर उजाला
चारों युवक 2000 रुपये के असली नोट को स्कैनर की मदद से स्कैन करते थे। इसके बाद साधारण पेपर पर भी इनकी कापी निकालते थे। पेज पर कलर प्रिंटर की मदद से नोट छापकर इनकी बड़ी ही सावधानी से कटिंग की जाती थी, ताकि किसी प्रकार से जाली नोट की पहचान न हो पाए।
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दो हजार रुपये का नकली नोट
पुलिस ने खुलासा किया कि गिरोह से बरामद हुए जाली नोटों में एक ही सीरियल नंबर के कई-कई नोट छापे गए हैं। नोट को स्कैन करके उनकी उनकी कई कापियां तैयार कर दी जाती थी। जाली नोट की प्रिंटिंग में किसी प्रकार की खामी नहीं दिखाई दे रही है, जबकि पेपर क्वालिटी से ही नोट जाली लगता है।
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दो हजार रुपये का नोट
- फोटो : फाइल फोटो
प्राथमिक जांच व पूछताछ दौरान सामने आया कि उक्त गिरोह के सदस्य खुद ही जाली करंसी तैयार करते थे। इसके बाद इस नकदी को बाजार में उतारने के लिए अलग-अलग लोगों का सहारा लेते थे। उक्त गिरोह यह जाली करंसी गुलशन कुमार व राजेश शर्मा निवासी संगरूर, बग्गा निवासी चीका, प्रेम व बृजेश निवासी धनास चंडीगढ़, विजय कुमार निवासी मंगवाल को देते थे। यह व्यक्ति उक्त गिरोह से पिछले समय दौरा काफी जाली करंसी ले चुके हैं व बाजारों में इन्हें चला चुके हैं। पुलिस ने इन्हें भी मामले में नामजद करके उनकी तलाश शुरू कर दी है।
गिरोह के उक्त सदस्य जाली करंसी आधे रेट पर सप्लाई करते थे। 50 हजार की असली करंसी के बदले 1 लाख रुपये दिए जाते थे। एसएसपी थिंद ने बताया कि पुछताछ दौरान गिरोह के सदस्यों ने बताया है कि वह जाली करंसी के बदले में आधी रकम लेते थे। 20 हजार रुपये में 40 हजार, 30 हजार रुपये में 60 हजार व 50 हजार रुपये में 1 लाख रुपये जाली देते थे। यह लोग अब तक कितनी 2000 रुपये की नकली करंसी बाजार में चला चुके हैं, इसका अभी खुलासा नहीं हो पाया है।