रिहायशी इलाके में क्लोरीन गैस लीक होने से भगदड़ मच गई। अफरा-तफरी में बच्चों को गुरुद्वारा साहिब में भेजकर बचाया गया। देखिए
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Panic grips mohali after chlorine gas leak
- फोटो : अमर उजाला
मोहाली फेज-7 के रिहायशी इलाके में शुक्रवार को उस समय सैकड़ों परिवार आफत आ गए। जब जल घर में क्लोरीन गैस लीक हो गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड तुरंत मौके पर पहुंची। साथ ही गैस को कंट्रोल करने में जुट गई। वहीं, इस दौरान बड़ा हादसा टल गया। जब फायर ब्रिगेड के दो फायर मैन गैस चढ़ने से बेहोश हो गए। इसके बाद दोनों को सिविल अस्पताल ले जाया गया। जहां कई घंटे तक उनका इलाज चला।
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- फोटो : अमर उजाला
जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार सुबह करीब 8:30 बजे के फेज-7 की लाइब्रेरी के पास कुछ लोग सैर कर रहे थे। लोगों ने वातावरण में धुएं जैसी गैस महसूस की। वहीं, इससे लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत आ रही थी। इसी बीच किसी ने फायर ब्रिगेड को सूचना दी। रेसक्यू कॉल मिलने पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी मौके पर पहुंची। इसके बाद फायरमैन गुरविंदर सिंह कजहेड़ी व गुरदीप सिंह ने जल घर में जाकर इस बारे में पूछताछ की।
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- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि कई दिनों से क्लोरीन गैस का सिलेंडर लीक हो रहा था। उन्होंने जैसे ही पानी के टैंक में से गैस सिलेंडर को निकाला। इस दौरान दोनों को अचानक गैस चढ़ गई। इससे दोनों बेहोश होकर गिर गए। वहीं, दूसरे फायर ब्रिगेड कर्मियों ने बड़ी तेजी से सिलेंडर पर पानी डालना शुरू कर दिया। इसके काफी देर बाद गैस खत्म हुई। बेहोश हुए गुरविंदर सिंह व गुरप्रीत सिंह को तुरंत सिविल अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करवाया गया।
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गुरुद्वारा साहिब में बच्चों को भेजकर बचाया
जहां पर क्लोरीन गैस लीक हो रही थी। उस जगह के पास ही सरकारी स्कूल है। जैसे ही फायर ब्रिगेड कर्मियों की नजर स्कूल के बच्चों पर पड़ी। उन्होंने तुरंत स्कूल मैनेजमेंट को आगाह किया। इसके बाद मैनेजमेंट ने बच्चों को थोड़ी दूर पर स्थित गुरुद्वारा साहिब पहुंचाया। इसके बाद गुरुद्वारे में सुबह की मार्निंग असेंबली हुई।
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थोड़ी देर न पता चलता तो कई लोग आते चपेट में
सिविल अस्पताल के डॉक्टरों व फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने बताया कि अगर सही समय पर इस बारे में पता नहीं चलता तो रिहायशी एरिया के काफी लोग गैस की चपेट में आ सकते थे। उन्होंने बताया कि क्लोरीन गैस बहुत खतरनाक होती है। दूसरे विश्व युद्ध में इस गैस का प्रयोग हथियार के रूप में किया गया था। क्योंकि यह गैस व्यक्ति की छाती को बुरी तरह से जकड़ लेती है। साथ ही व्यक्ति का सांस रुकने लगती है। इसके साथ ही गैस से प्रभावित व्यक्ति के शरीर के अंदरूनी हिस्सों में सूजन आ जाती है। जिससे मौत हो जाती है।