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कहीं आपका बच्चा यौन शोषण का शिकार तो नहीं...ऐसे पहचानें और सावधानी बरतें

Sat, 19 Aug 2017 09:16 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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बच्चों का यौन शोषण
क्या आपके बच्चे का स्वभाव बदल रहा है। वह बुरे सपने देखता है, उठकर चिल्लाने लगता है तो समझें कि वो यौन शोषण का शिकार हो रहा है। जानिए ऐसे ही और लक्षण।
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बच्चों का यौन शोषण
बच्चा विचलित रहने लगा है या अजीब हरकतें करता है। खाने से मना करना करता है। भूख कम हो गई है, कुछ निगलने में मुश्किल महसूस होती है। अचानक गुस्सा होने या खुद को असुरक्षित महसूस करने लगा है। क्ल्यू मिलने पर यौन संबंधी चर्चा करना चाहता है। उसे कुछ स्थानों या लोगों से अजीब सा डर पैदा होता है। किसी व्यस्क या बड़े बच्चे के साथ साझा रहस्य को चर्चा करने से रोकना।
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बच्चों का यौन शोषण - फोटो : डेमो फोटो
यौन और भयावह चीजों को लिखना, ड्राइंग करना, खेलना और सपने आना, किसी बड़े दोस्त के बारे में बात करना, अचानक पैसे, खिलौने और उपहार की बिना किसी कारण मांग करना, प्रतीकात्मक रूप में शरीर के बारे में बुरा या गंदा सोचना और बड़े व्यक्ति की तरह यौन संबंधी व्यवहार या भाषा बोलना आदि ऐसे लक्ष्ण है जो साबित करते हैं कि  आपका बच्चा यौन शोषण का शिकार है।
 

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बच्चों का यौन शोषण
चाइल्ड राइट्स कमीशन की एडवाइजरी जारी
पॉक्सो एक्ट के तहत यौन शोषण मामले में तुरंत रिपोर्ट जरूरी है। यह बात पेरेंट्स, डॉक्टर्स और स्कूल प्रबंधकों पर भी लागू होती है। अगर कोई इस तरह की जानकारी छिपाता है तो वह भी कानून का उल्लंघन कर रहा है। जिसे इस बारे में जानकारी है वह सीधे पुलिस और मजिस्ट्रेट को शिकायत दे सकता है।
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बच्चों का यौन शोषण
झूठी सूचना या शिकायत भी अपराध
यौन शोषण की जानकारी होने के बावजूद कमीशन या पुलिस को जानकारी न देने वाले के लिए भी सजा का प्रावधान होगा। इसके तहत उसे 6 महीने से 1 साल सजा, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। पॉक्सो एक्ट के तहत झूठी सूचना या शिकायत देने वाले के खिलाफ 6 माह सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। बच्चे के खिलाफ झूठी सूचना देने पर एक साल की सजा हो सकती है।
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बच्चों का यौन शोषण - फोटो : demo pics
बच्चों के बयान दर्ज करने का तरीका
बच्चों के बयान उनके घर या उसकी पसंद की जगह पर रिकॉर्ड किए जाने चाहिए। बयान सादी वर्दी में सब इंस्पेक्टर रैंक की महिला पुलिस ऑफिसर ही ले सकती है। जांच के समय या बच्चे से बात करते समय इस बात का ध्यान हो कि बच्चा आरोपी के संपर्क में न आए। बच्चे को रात को पुलिस स्टेशन में नहीं रखा जा सकता। बच्चे की पहचान किसी भी तरह से उजागर नहीं होनी चाहिए।
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बच्चों का यौन शोषण
सबसे ज्यादा रिश्तेदार करते यौन शोषण
भारत में चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज पर बहुत ही कम स्टडी हुई है। अगर हुई हैं तो उनके सैंपल साइज बहुत ही कम थे। साल 2002 में यूएस की एक स्टडी के मुताबिक घर में इस अपराध में सबसे ज्यादा संलिप्त पिता होते हैं। इसके बाद रिश्तेदारों का नंबर आता है। आसानी से झांसे में आने के कारण बच्चों को सबसे ज्यादा रिलेटिव ही निशाना बनाते हैं। न पकड़े जाने पर धीरे-धीरे इस क्राइम के आदी हो जाते हैं।

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बच्चों का यौन शोषण - फोटो : amar ujala
ऐसे बचाएं बच्चों को
बच्चों को समझाएं कि शरीर के किस अंग पर छूना अपराध है, जब भी बच्चा घर से बाहर जाए तो उससे पूछें कि किसी ने आपको छुआ तो नहीं, बच्चा अगर घर पर हो तब भी उससे इस बारे में अक्सर पूछते रहें। बच्चों से पूछे कि स्कूल या खेलकूद के दौरान उन्हें फोटोग्राफी या वीडियो तो नहीं दिखाया जाता। हावभाव से पता चल जाता है कि उसके साथ गलत तो नहीं हुआ। पेरेंट्स आसानी से समझ सकते हैं ये हावभाव। 
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बच्चों का यौन शोषण - फोटो : demo pic
ऐसे व्यक्ति से बचें
बच्चों के साथ ज्यादा घुलने-मिलने की कोशिश करते हों। बच्चों को अक्सर अकेले बाहर ले जाने की बात करते हों।  बच्चों को अनडिमांड व सरप्राइज गिफ्ट देते हों। बच्चों को जबरदस्ती किस, गले मिलना और उन्हें पकड़ते हों। किसी व्यक्ति की पर्सनल सेक्सुअल लाइफ डिस्टर्ब हो। मनोचिकित्सक बताते हैं कि एनजीओ, नारी निकेतन केंद्र और समाजसेवी संस्थाएं इस तरह के क्राइम के लिए सबसे सुरक्षित स्थान माने जाते हैं। 
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