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चंडीगढ़ के एक सोफे में क्या है खास, जो विदेश में 32 लाख में बिका, क्यों यहां के फर्नीचर की दुनिया दीवानी

Tue, 19 Jan 2021 01:45 AM IST
ajay kumar रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर। - फोटो : फाइल फोटो
चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर की दुनिया भर में चर्चा होती है। लेकिन देश के लोगों को इसकी जानकारी बहुत कम है। दुनिया के कई देशों में चंडीगढ़ की विरासत नीलाम होती रही है। चंडीगढ़ प्रशासन का ढुलमुल रवैया और लोगों में जानकारी का अभाव भी इसके लिए जिम्मेदार है। ऐसे में अमर उजाला चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर से जुड़ी जानकारी लेकर आया है, जो आपको पढ़नी चाहिए...
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चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर। - फोटो : फाइल फोटो
अमर उजाला ने हेरिटेज फर्नीचर से संबंधित सभी सवाल हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल के सदस्य अजय जग्गा और प्रशासक के सलाहकार और हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल के चेयरमैन मनोज परिदा से पूछे। अमर उजाला के इस डिजिटल विशेष में आप जानेंगे कि हेरिटेज फर्नीचर क्या है, इनकी इतनी मांग क्यों है, शहर में कहां-कहां है, विदेश में महंगे क्यों बिकते हैं, चंडीगढ़ से विदेश ये पहुंच कैसे रहे हैं, चंडीगढ़ के अधिकारी इनको बचाने के लिए क्या कर रहे हैं।
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चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर। - फोटो : फाइल फोटो
यह हैं हेरिटेज फर्नीचर
चंडीगढ़ देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के सपनों का शहर है। जवाहरलाल नेहरू ने स्विस-फ्रांसीसी आर्किटेक्ट ली कार्बूजिए को चंडीगढ़ के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी थी। उनके चचेरे भाई पियरे जेनरे और उन्होंने मिलकर चंडीगढ़ के लिए हेरिटेज फर्नीचर डिजाइन किया। उन्होंने सिर्फ फर्नीचर ही नहीं, बल्कि मैनहोल कवर, फुट लैंप्स, कंक्रीट लाइट फिक्सचर (जो सुखना लेक पर लगे हैं) और कुछ लोहे के पल्ले भी डिजाइन किए। यह सभी काफी पुराने हैं और काफी अलग है। यह चंडीगढ़ की विरासत है।

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चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर। - फोटो : फाइल फोटो
इन हेरिटेज आइटम्स की इतनी मांग क्यों है
ली कार्बूजिए और पियरे जेनरे के काम को पसंद करने वालों की संख्या लाखों-करोड़ों में हैं। उनके चाहवान कीमत की परवाह किये बिना, उनके द्वारा डिजाइन किये गए सामानों को खरीदते हैं। ली कार्बूजिए और पियरे जेनरे ने काफी साल रहकर चंडीगढ़ में काम किया। इसलिए उनके डिजाइन किये गए कई सामान चंडीगढ़ में बिखरे पड़े हैं। इन फर्नीचरों की मांग कितनी है, इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि वर्ष 2020 में चंडीगढ़ का एक सोफा करीब 32 लाख रुपये में बिका था।
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चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर। - फोटो : फाइल फोटो
चंडीगढ़ में ये हेरिटेज फर्नीचर कहां-कहां मौजूद हैं
पियरे जेनरे ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट, विधानसभा, सचिवालय, पंजाब विश्वविद्यालय, शैक्षणिक संस्थान और दूसरी प्रशासनिक बिल्डिंग के लिए फर्नीचर डिजाइन किए थे। पंजाब यूनिवर्सिटी में यह फर्नीचर सबसे बड़ी मात्रा में उपलब्ध है। अभी भी इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि प्रशासन के पास ऐसी कोई निश्चित संख्या नहीं है।
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चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर। - फोटो : फाइल फोटो
अगर फर्नीचर हेरिटेज है तो ये विदेश में नीलामी कैसे
चंडीगढ़ प्रशासन ने 2014 में खुद बड़ी मात्रा में हेरिटेज फर्नीचर को बेच दिया। बजाए यह अंदाजा लगाए कि इसकी अंतरराष्ट्रीय मार्केट में वेल्यू बहुत ज्यादा है। बाद में प्रशासन ने खुद अंतरराष्ट्रीय मार्केट में इसे बेचने की सोची लेकिन तब तक केंद्र सरकार इसको बेचने पर रोक लगा चुकी थी। यह खरीदने वाले भी विदेशी ही थे, जिन्होंने पहले शहर का दौरा किया था और फिर उन्होंने प्रशासन के सामने प्रस्ताव रखकर फर्नीचर को खरीदकर ले गए थे। अब वही फर्नीचर अलग-अलग देशों में नीलाम हो रहे हैं।
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चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर। - फोटो : फाइल फोटो
अगर प्रतिबंध है तो चंडीगढ़ से ये फर्नीचर विदेश पहुंचे कैसे
पिछले साल नवंबर महीने में क्राइम ब्रांच ने पंजाब विश्वविद्यालय से हैरिटेज कुर्सियां चोरी करने वाली महिला, बढ़ई और कबाड़ी को गिरफ्तार किया था। इनके कब्जे से टीम ने करीब 35 हैरिटेज कुर्सियां बरामद की थी। जांच में सामने आया कि बढ़ते मांग के आधार पर पसंदीदा हैरिटेज फर्नीचर को चोरी किया जाता है। 

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मनोज परिदा व अजय जग्गा। - फोटो : फाइल फोटो
चोर फर्नीचर को कबाड़ियों के हाथों सस्ते दामों में बेच दिया करते हैं और फिर कबाड़ी बढ़ई की मदद से इन फर्नीचर को नया रंगरूप दे देते हैं। इसके बाद दलाल कबाड़ी से संपर्क कर फर्नीचर को महंगे दामों में खरीदकर दिल्ली व मुंबई के एयरपोर्ट तक पहुंचाकर विदेश भिजवा देते हैं, जहां बोली के हिसाब से चोरी के फर्नीचर को बेच दिया जाता है।

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चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर। - फोटो : फाइल फोटो
क्या कर रहा चंडीगढ़ प्रशासन
यूटी प्रशासन सभी हेरिटेज फर्नीचर के डिजाइन को पेटेंट कराने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल के चेयरमैन व प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा के आदेश पर प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा सभी हेरिटेज आइटम की नंबरिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग होगी। इसके लिए एक कमेटी का भी गठन कर दिया गया है। इसके अलावा ली कार्बूजिए की डिजाइन ग्लास बिल्डिंग के नाम से मशहूर सेक्टर-18 गवर्नमेंट प्रेस में हेरिटेज म्यूजियम बनाया जा रहा है। इसका काम भी चल रहा है। यहां सभी तरह के हेरिटेज आइटम को सहेज कर रखा जाएगा।

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चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर। - फोटो : फाइल फोटो
अब तक इन देशों में करोड़ों में हो चुकी नीलामी
चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर की नीलामी यूरोपी देशों में ज्यादा होती है। मुंबई में भी एक बार चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर की नीलामी हुई है। पिछले पांच साल में विभिन्न देशों के नीलाम घरों में बेचे गए हेरिटेज फर्नीचर, मेनहॉल, जेनरे का लिखा लेटर और दूसरी आइटम से नीलाम घर 35 करोड़ से  अधिक का कारोबार कर चुके हैं। सालाना औसत देखें तो हर साल सात करोड़ से अधिक का धंधा हो रहा है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसी पहले से जानकारी के बावजूद इस खेल को रोक नहीं पा रही।
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चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर। - फोटो : फाइल फोटो
क्या अभी भी हेरिटेज फर्नीचर विदेश जा रहा है
चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार हेरिटेज फर्नीचर को लेकर अब जागरुकता फैल गई है। इसलिए अगर कोई इसे चंडीगढ़ से बाहर ले जाने की कोशिश करता है तो वह पकड़ा जाता है। हालांकि तस्करों की नजर अभी भी शहर के हेरिटेज फर्नीचर पर है। इसलिए वह अलग-अलग तरीके से फर्नीचर तक पहुंचने की कोशिश करते रहते हैं। 
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