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कोटा के बाद देश में टॉपर्स का नया हब बना चंडीगढ़, खूबियां जानना चाहेंगे

Tue, 13 Jun 2017 11:01 AM IST
सुशील गंभीर/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कॉलेज के स्टूडेंट्स
कोटा के बाद चंडीगढ़ देश में टॉपर्स का नया हब बन रहा है। यहां ऐसी ऐसी सुविधाएं मौजूद हैं, जिनका फायदा उठाएंगे तो अच्छे परिणाम ही मिलेंगे।
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खुशियां मनाते स्टूडेंट्स - फोटो : amar ujala
चंडीगढ़ ने पहली दफा देश को टॉपर दिया है और इसकी वजह भी काफी चौंकाने वाली है। हालांकि पिछले सेशन में टॉप 10 में एक स्टूडेंट आ गया था। जबकि इस बार तीन स्टूडेंट टॉप 10 में हैं। शहर का एन्वायरमेंट और छात्रों की भीड़ न होना इस सफलता का मुख्य कारण है। परीक्षाओं की तैयारी केलिए कोटा अभी तक हब रहा है, लेकिन वहां लगातार बढ़ रही छात्रों की भीड़ अब माहौल का रुख बदल रही है।
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परीक्षा देकर परीक्षा केंद्र से बाहर आते अभ्यर्थी - फोटो : अमर उजाला
एक्सपर्टस के मुताबिक कोटा में साढ़े तीन से चार लाख छात्र हर साल परीक्षा देते हैं। कहीं न कहीं इतनी भीड़ ही कारण है कि चंडीगढ़ अब कोटा को पछाड़ने लगा है। क्योंकि चंडीगढ़ से हर साल 10 से 12 हजार छात्र ही रहते हैं। स्कूल और कोचिंग सेंटर्स में छात्रों के बैच छोटे हैं, जो तैयारी को सही ढंग से कर पाने का मुख्य कारण हैं।

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exam
तकनीक का हो रहा पढ़ाई में इस्तेमाल
परीक्षा पर पार पाने केलिए तकनीक का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। कोचिंग सेंटर्स में रिकॉर्ड किए गए लेक्चर्स छोटी-छोटी अवधि में स्टूडेंट्स को उपलब्ध कराए जाते हैं। जब मन करे स्टूडेंट अपने कंप्यूटर पर लेक्चर देख सकता है और अपनी दुविधा दूर सकता है।
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exam
स्कूल की पढ़ाई को नहीं किया जा सकता दरकिनार
एक्सपर्ट केमुताबिक स्कूल की पढ़ाई को दरकिनार नहीं किया जा सकता। क्योंकि बेस वहीं से बनता है। कोचिंग सेंटर्स उससे आगे की तैयारी कराते हैं, जो इस तरह की परीक्षाओं में इस्तेमाल में आती है।
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JEE advance 2017
शहर का वातावरण कोटा के मुकाबले पढ़ाई के लिहाज से काफी अच्छा है। शुरू से ही चंडीगढ़ ने अच्छे नतीजे दिए हैं और अब इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जो भविष्य के लिहाज से काफी अच्छा है।
विनिता अरोड़ा, प्रिंसिपल भवन विद्यायल, चंडीगढ़
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परीक्षा देकर निकलते छात्र - फोटो : अमर उजाला
इस शहर का एन्वायरमेंट स्टूडेंट फ्रेंडली है। दूसरा यहां स्टूडेंट्स की ज्यादा भीड़ नहीं है, तो छोटे बैच होने से पढ़ाई अच्छे तरीके से हो पाती है। चंडीगढ़ कोटा को पीछे छोड़ रहा है।
साहिल हरजई, डायरेक्टर लक्ष्य
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