आज से 29 अक्टूबर तक दिवाली के त्योहार रहेंगे, जो भारतीय समाज में बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं। हम आपको बता रहे हैं, इस त्योहारों के शुभ मुहूर्त और पूजन की विधि...
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फाइल फोटो
दीपों का त्योहार दिवाली 27 अक्तूबर को है। इस दिन दीपदान, गणेश पूजन, लक्ष्मी, कुबेर आदि संपूर्ण पूजन शीघ्र से शीघ्र प्रारंभ कर लेना चाहिए। यह कहना है सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का। उन्होंने कहा कि प्रदोष काल शाम छह बजकर 37 मिनट से रात आठ बजकर 32 मिनट तक वृष (स्थिर) लग्न विशेष शुभ रहेगा। इस समय अमृत की चौघड़िया रहने से इस योग में संपूर्ण दिवाली पूजन शीघ्र से शीघ्र प्रारंभ कर लेना चाहिए। यह प्रयास करना चाहिए कि रात्रि आठ बजकर 56 मिनट तक अर्थात नौ बजे से पहले मुख्य पूजन समाप्त हो जाए।
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धनतेरस पर खरीदारी करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
धनतेरस आज खरीदारी का शुभ मुहूर्त
धनतेरस आज शनिवार को है। भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख और कर्मकांडी बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि इस दिन बर्तन खरीदने का शुभ मुहूर्त शाम 5.06 बजे से शाम 6.36 बजे के बीच लाभ की चौघड़िया में रहेगा। इसके अलावा दोपहर 12.06 बजे से 3.36 बजे तक भी समय शुभ है। इसके बाद मध्यम है।
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नरक चतुर्दशी भी आज
सेक्टर-30 के श्री शिव शक्ति मंदिर के पुजारी पंडित श्याम सुंदर शास्त्री का कहना है कि दिवाली के एक रोज पहले नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। इस बार 26 अक्तूबर दिन शनिवार को नरक चतुदर्शी भी है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी, यम चतुर्दशी या फिर रूप चतुर्दशी कहते हैं। उन्होंने कहा कि इस दिन यमराज की पूजा करने और उनके लिए व्रत करने का विधान है। उन्होंने कहा कि हनुमान जी का जन्म भी इसी दिन हुआ था। इस दिन हनुमानजी की विशेष पूजा होती है।
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निशीथकाल
27 अक्तूबर को निशीथकाल रात आठ बजकर 16 मिनट से रात 10 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। निशीथकाल में चर की चौघड़िया 8 बजकर 56 मिनट से रात 10 बजकर 34 मिनट रहेगा। इस समय में मिथुन लग्न और चर की चौघड़िया में पूजा करने का मुहूर्त मध्यम है, इसलिए प्रयास करना चाहिए कि प्रदोष काल में आरंभ पूजा रात 10 बजकर 34 मिनट पर समाप्त हो जाए अन्यथा रात 10 बजकर 34 मिनट से रात 12 बजकर 12 मिनट तक रोक की चौघड़िया रहेगी। इस समय में पूजा समाप्त कर मंत्र तंत्र आदि की साधना करनी चाहिए।
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महानिशीथकाल
रात 10 बजकर 52 मिनट से रात 1 बजकर 28 मिनट तक महानिशीथकाल रहेगा। इस समय में रोग एवं काल की चौघड़िया अशुभ है। परंतु रात्र 10 बजकर 51 मिनट से रात एक बजकर 14 मिनट तक कर्क (चर) लग्न और सिंह विशेष शुभ रहेगा। अशुभ की चौघड़िया में काली उपासना, तंत्रादि क्रियाएं, मंत्र-तंत्र की साधना, शावर मंत्रों की सिद्धि और गणेश लक्ष्मी सुक्त और कनक धारा स्त्रोत का पाठ करना विशेष शुभ माना गया है। रविवार को राहुकाल शाम चार बजकर 30 मिनट से शाम छह बजे तक है। राहुकाल में दिवाली पूजन अशुभ माना गया है। इसलिए राहुकाल में दिवाली पूजन नहीं करना चाहिए। 27 अक्तूबर दिन रविवार को चतुर्दशी दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक है। इसके बाद अमावस्या दोपहर 27 अक्तूबर को 12 बजकर 24 मिनट से प्रारंभ होकर 28 अक्तूबर सोमवार सुबह नौ बजकर 8 मिनट तक है। अमावस्या 27 अक्तूबर को प्रदोष काल में होने के कारण 27 अक्तूबर शनिवार को दिवाली का पर्व मनाया जाएगा।
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28 अक्तूबर को गोवर्धन पूजा
श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष और सेक्टर 18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी और देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि 28 अक्तूबर दिन सोमवार को कार्तिक अमावस्या सुबह नौ बजकर 8 मिनट तक रहेगा। गोवर्धन पूजा, अन्नकूट पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को दोनों पर्व एक ही दिन मनाया जाता है। 28 अक्तूबर सोमवार को सुबह नौ बजकर 9 मिनट पर प्रतिपदा प्रारंभ होगा, इसलिए यह पर्व सोमवार 28 अक्तूबर को मनाया जाएगा। कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि के क्षय होने के कारण सोमवार 28 अक्तूबर को अन्नकूट और गोवर्धन पूजा मनाया जाएगा।
भैया दूज 29 अक्तूबर को
बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि यम द्वितीया (भैया दूज) 29 अक्तूबर को सुबह छह बजकर 13 मिनट पर दिन मंगलवार को द्वितीया प्रारंभ हो जाती है। इस व्रत के देवता यमराज हैं। इस दिन बहन अपने भाइयों को दीर्घायु, सुख, समृद्धि, यश, विद्या के लिए यमराज एवं उनके दूतों की पूजा करती है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन यमुना अपने भाई यम को अपने घर भोजन कराकर तिलक किया था, इसलिए यह तिथि भ्रातृद्वितीया (भैया दूज) के नाम से प्रसिद्ध है। शास्त्र के अनुसार दोपहर कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन दोपहर के समय भाई को बहन तिलक लगाई जाती है। राहुकाल मंगलवार को दोपहर बाद तीन बजे से चार बजकर 30 मिनट तक है, इसलिए बहन अपने भाई को राहुकाल में तिलक न करें। तिलक का शुभ समय दिन में सुबह 10 बजकर 8 मिनट से लेकर सुबह 11 बजकर 38 मिनट से दोपहर तक अमृत की चौघड़िया में तिलक लगाना शुभ रहेगा। दिन में 11 बजकर 38 मिनट से लेकर दोपहर एक बजकर 38 मिनट तक काल की चौघड़िया रहेगी। काल की चौघड़िया में तिलक लगाना अशुभ है।