जानिए उन सात निर्दलीय विधायकों के बारे में, जो आज तय करेंगे कि हरियाणा में खट्टर के सिर दूसरी बार मुख्यमंत्री का ताज सजेगा या नहीं।
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मनोहर लाल खट्टर
- फोटो : अमर उजाला
हरियाणा में भाजपा बहुमत से भले ही दूर रह गई है, लेकिन भाजपा की सरकार बनना लगभग तय हो गया है। पार्टी हाथ आए इस मौके को छोड़ना नहीं चाहती। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संकटमोचक बन कर रण में कूद गए हैं। चुनाव जीतने वाले सात में से पांच निर्दलीय भाजपा के बागी हैं। वीरवार देर रात ही पांच निर्दलीय विधायकों ने भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा और हरियाणा भाजपा के प्रभारी और महासचिव अनिल जैन से मुलाकात की। ये हैं- सिरसा से गोपाल कांडा, पूंडरी से रणधीर गोलन, महम से बलराम कुंडू, रानियां से रणजीत सिंह, बादशाहपुर से राकेश दौलताबाद। दो और निर्दलीय विधायक दादरी से सोमवीर सांगवान और नीलोखेड़ी से धर्मपाल गोंदर से भी जेपी नड्डा और अनिल जैन को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
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मनोहर लाल खट्टर
ऐसे बनेगी सरकार
हरियाणा में विधानसभा की 90 सीटे हैं। भाजपा को 40 सीटें मिली हैं। विधानसभा तक पहुंचने के लिए पार्टी को 46 सीटों की जरूरत है। ऐसे में सात निर्दलीय को शामिल करके ही पार्टी सरकार बना सकती है, लेकिन सूबे की जनता को स्थाई सरकार देने के लिए जननायक जनता पार्टी (जजपा) के अध्यक्ष दुष्यंत चौटाला को शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है। चूंकि पार्टी प्रदेश में स्थिर सरकार देना चाह रही है। इसलिए दुष्यंत को साथ लेकर चलना मजबूरी बन गया है। ऐेसे में दुष्यंत को उप-मुख्यमंत्री का पद ऑफर किया जा सकता है। जजपा ने चुनाव में 10 सीटों पर जीत हासिल की है।
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गोपाल कांडा
- फोटो : फाइल फोटो
सिरसा विधानसभा सीट
सिरसा सीट से हरियाणा लोकहित पार्टी के गोपाल कांडा 602 वोट से जीते हैं। यहां दूसरे स्थान पर स्वतंत्र उम्मीदवार गोकुल सेतिया रहे। इस सीट से 2014 में इनेलो के माखन लाल सिंगला 2938 वोटों से विजयी हुए थे। गोपाल कांडा कभी कांग्रेस के दिग्गज नेता हुआ करते थे और हुड्डा सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। लेकिन विवादों में नाम आने के चलते कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
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बलराम कुंडू
- फोटो : फाइल फोटो
महम विधानसभा क्षेत्र
महम विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार बलराज कुंडू ने 12047 वोट से जीत हासिल की। यहां दूसरे नंबर पर कांग्रेस के आनंद शर्मा रहे। 2014 में इस सीट से कांग्रेस के आनंद सिंह डांगी चुनाव जीते थे। बलराज कुंडू टिकट न मिलने के चलते भाजपा से बगावत करके निर्दलीय मैदान में उतरे थे। पार्टी ने कुंडू की जगह महम सीट से शमशेर खरकड़ा को टिकट दिया था।
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रणधीर गोलन
- फोटो : फाइल फोटो
पूंडरी विधानसभा क्षेत्र
पूंडरी विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार रणधीर सिंह गोलन ने 12824 वोटों से जीत हासिल की। इस सीट से दूसरे स्थान पर कांग्रेस के सतबीर भाना रहे। 2014 में इस सीट से निर्दलीय उम्मीदवार दिनेश कौशिक 4832 वोटों से विजयी हुए थे। गोलन ने भी भाजपा से टिकट न मिलने से नाराज होकर बागी रुख अपनाया था, जबकि 2014 में पुंडरी सीट से गोलन भाजपा के ही प्रत्याशी थे। इसके बावजूद पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया था।
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रणजीत सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
रनियां विधानसभा क्षेत्र
रनियां विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी रंजीत सिंह ने हरियाणा लोकहित पार्टी के गोबिंद कांडा को 19431 वोटों से हराया। 2014 के चुनाव में इस सीट से इनेलो उम्मीदवार राम चंद कंबोज 4315 वोट से जीते थे। रंजीत सिंह कांग्रेस से बगावत करके मैदान में उतरे थे। 2009 से रंजीत सिंह इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ते रहे हैं।
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राकेश दौलताबाद
- फोटो : फाइल फोटो
बादशाहपुर विधानसभा क्षेत्र
बादशाहपुर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार राकेश दौलताबाद 10186 वोट से जीत चुके हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के मनीष यादव को हराया। इस सीट से 2014 में भारतीय जनता पार्टी के नरबीर सिंह 18132 वोटों से जीते थे। राकेश इस सीट पर दूसरी बार निर्दलीय मैदान में उतरे थे।
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सोमवीर सांगवान
- फोटो : फाइल फोटो
दादरी विधानसभा सीट
हरियाणा में भिवानी से अलग होकर बना नया जिला चरखी दादरी जिले की दो विधानसभा सीटों में से एक दादरी विधानसभा सीट पर भाजपा से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी सोमबीर चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने जजपा के सत्यपाल सांगवान को 14272 वोट से हराया। इस सीट से भाजपा ने बबीता फोगाट को मैदान में उतारा था। इस सीट पर कांग्रेस से पूर्व विधायक नृपेंद्र सांगवान मैदान में थे। वहीं, इनेलो ने अपने मौजूदा विधायक राजदीप पर ही दांव लगाया।
नीलोखेड़ी (एससी) विधानसभा सीट
नीलोखेड़ी सीट से धर्मपाल गोंदर 2222 वोट से जीत चुके हैं। इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी के भगवान दास दूसरे स्थान पर रहे। 2014 में भारतीय जनता पार्टी के भगवान दास 34410 वोटों से जीते थे। धरपाल पहले भाजपा में थे बाद में बागी हो गए और निर्दलीय ही चुनाव लड़े।