कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) 2018 में आयुष चौहान ने टॉप किया और खुद बताया अपनी सफलता का मूलमंत्र। स्टूडेंट्स जरूर पढ़ें ये खबर, बड़े काम आएंगे टिप्स।
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- फोटो : डेमो
कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) में पंचकूला के आयुष चौहान ने ट्राइसिटी में टॉप किया है। उन्होंने 99.99 पर्सनटाइल अंक पाकर काययाबी का झंडा बुलंद किया है। कैट का रिजल्ट शनिवार को दोपहर बाद घोषित कर दिया गया। पूरे रीजन से महज 15 स्टूडेंट्स को ही 99 पर्सनटाइल अंक मिले हैं। अब आयुष इंटरव्यू व ग्रुप डिस्कशन की तैयारी में जुट गए हैं। वहां से कामयाबी मिलने के बाद उनका चयन आईआईएम में एमबीए के लिए होगा।
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पंचकूला के सेक्टर- 20 निवासी आयुष के पिता प्रताप चौहान बिजनेसमैन हैं। उनकी मां पुष्पा चौहान गृहणी हैं। आयुष ने 2018 में थापर विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री ली। पिछले साल भी उन्होंने कैट का पेपर दिया, लेकिन संतोषजनक अंक नहीं मिले थे, इसलिए उन्होंने फिर से तैयारी की। हर दिन दो घंटे पढ़ाई करते थे। साथ ही कोचिंग का भी सहारा लिया।
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exam preparation
- फोटो : डेमो
कोचिंग के शिक्षक करते हैं मोटिवेशन
आयुष का कहना है कि कैट की पढ़ाई बिना कोचिंग के भी की जा सकती है, लेकिन कुछ टॉपिक्स ऐसे हैं, जिन्हें क्लीयर करने के लिए कोचिंग लेनी जरूरी है। मुझे कोचिंग का डबल फायदा हुआ। वो ये कि वहां शिक्षक मोटिवेट करने के साथ-साथ एग्जाम भी लेते हैं, जिसके कारण कैट के एग्जाम को समझना और आसान हो जाता है। उन्होंने अन्य स्टूडेंट्स को प्रेरणा देते कहा कि लक्ष्य निर्धारित कर उस पर डटे रहने से सफलता जरूर मिलती है।
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बहन है रोल मॉडल
आयुष के पिता व मां शिमला में व्यवसाय करते हैं। वह पंचकूला में अकेले रहते हैं। यहीं से उन्होंने कैट की तैयारी की। उन्होंने कहा कि उनकी बहन विशा मेरी रोल मॉडल हैं। बहन एमबीए करने के बाद जॉब कर रही हैं। उन्हीं से प्रेरित होकर आयुष भी मैनेजमेंट में जाना चाहते थे और भगवान के आशीर्वाद से उनकी इच्छा भी पूरी हो गई। माता-पिता ने भी उन्हें खूब सपोर्ट किया।
वित्त व्यवस्था में सुधार करना लक्ष्य
मैनेजमेंट करने के बाद मेरा लक्ष्य होगा कि मैं देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा प्रदान करूं। वित्त व्यवस्था का मैनेजमेंट बेहतर होता है तो देश भी प्रगति करता है जो अभी कुछ ठीक नहीं लगता। अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा हेल्थ व शिक्षा के क्षेत्र में अधिक खर्च होना चाहिए जो वर्तमान में नहीं है। आम आदमी को शिक्षा व स्वास्थ्य पहले चाहिए।