दिल्ली के बुराड़ी में एक घर में 11 मौतों के मामले में नया सच सामने आया है। दरअसल, एक रिश्तेदार ने परिवार को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने ऐसी बात बताई है, जिसके बारे में शायद ही लोग जानते होंगे।
Trending Videos
विज्ञापन
2 of 7
burari death case
करीब पांच माह पहले परिवार के सदस्य हरियाणा में फतेहाबाद में टोहाना स्थित अपने मकान की सीढ़ियों का डिजाइन देखने आए थे। वह किसी तंत्र मंत्र विद्या में तो विश्वास नहीं रखते थे, लेकिन निरंकारी मिशन से जुड़ाव जरूर था। यह कहना है परिवार के रिश्तेदार व टोहाना के पार्षद तिलक भाटिया का। तिलक भाटिया ने बताया कि नारायणी देवी उनकी मौसेरी सास लगती थीं। गोपालदास का परिवार राजस्थान के चितौड़गढ़ के गांव रावत भाटा से करीब 45 वर्ष पहले रहने आया था।
विज्ञापन
3 of 7
burari death case
तिलकराज ने बताया कि उनका रिश्ता भी गोपालदास के परिवार से उन्हीं ने करवाया था। जब गोपालदास का परिवार टोहाना में रहता था तो वह भक्ति में लीन रहते थे, लेकिन अंधविश्वास जैसा कुछ नहीं था। उन्होंने बताया कि जब वे दिल्ली गए थे तो उन्होंने निरंकारी मिशन से जुड़ाव कर लिया था। इस परिवार के धार्मिक कार्यों में निरंकारी भवन के संत मौजूद रहते थे। गोपालदास के परिवार का नियम था कि वह सुबह व शाम के समय इकट्ठे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करते थे।
4 of 7
घर के बाहर जमा भीड़
- फोटो : अमर उजाला
पांच माह पूर्व टोहाना आया था परिवार
भाटिया नगर निवासी रामस्वरूप ने बताया कि गोपालदास ने लगभग 33 साल पहले उनसे भाटिया नगर में मकान खरीदा था। गोपालदास के परिवार से फोन पर कभी-कभी बातचीत हो जाती थी। रामस्वरूप ने बताया कि लगभग पांच माह पूर्व गोपालदास की दो बहुएं और पोते टोहाना आए थे। यहां मकान में जो सीढ़ियां लगी हैं, उनका डिजाइन देखा था। यह परिवार दिल्ली में भी मकान बना रहा था। उनको इन्हीं पौड़ियों का डिजाइन वहां लगवाना था।
विज्ञापन
5 of 7
burari death case
खेतीबाड़ी से शुरू किया था काम
तिलकराज ने बताया कि गोपालदास का परिवार गांव शक्करपुरा के एक नंबरदार के खेत में पार्टनरशिप के तौर पर काम करता था। इसके बाद उन्होंने टोहाना में जमीन लेकर भाटिया नगर में मकान बनाया और रतिया रोड पर जमीन ली। कुछ समय तक उन्होंने भैंस पालकर दूध का कार्य किया। लगभग 33 साल पहले परिवार दिल्ली चला गया। टोहाना रहने के दौरान गोपालदास का बड़ा बेटा भुनेश विदेश में कार्य करता था। लगभग 7-8 साल के बाद उसका बेटा भी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर आ गया था।
विज्ञापन
6 of 7
बुराड़ी में 11 लोगों की मौत मिस्ट्री
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली में दोनों भाइयों ने शुरू किया काम
तिलकराज ने बताया कि दिल्ली में जाकर गोपालदास के बेटे ललित ने प्लाइवुड की दुकान में नौकरी शुरू की और दूसरे बेटे ने भी नौकरी शुरू कर दी थी। इस दौरान लगभग 5 वर्ष पूर्व उनके पिता गोपालदास की मौत हो गई। कुछ समय पहले ललित की एक हादसे के दौरान आवाज चली गई थी। जब ललित के पिता की मृत्यु हुई तो उसके कुछ दिन बाद ललित की आवाज फिर आ गई। अपने पिता गोपालदास की आवाज में माता से बात करने लगे, जिसे सुनकर सब हैरान हो गए थे। कुछ समय बाद ललित नार्मल रूप से बात करने लगा। भाटिया ने बताया कि कुछ समय पहले ललित ने प्लाइवुड की दुकान कर ली और भाई ने भी किराने की दुकान कर ली थी।
बुराड़ी से लौटा नागपाल का परिवार, संवेदना जताने वालों का लगा तांता
दिल्ली के बुराड़ी में तीन दिन पहले एक ही परिवार के 11 लोगों की संदिग्ध मौत के बाद पानीपत के सेक्टर 11-12 में रहने वाले अघमी प्रवीन नागपाल के परिवार में अब भी सन्नाटा पसरा है। परिवार के लोगों की निगाहें दिल्ली पुलिस की जांच रिपोर्ट पर थमी हुई है। प्रवीन नागपाल का विवाह 36 साल पहले नारायणी देवी की बेटी सुजाता के साथ हुआ था। रविवार को संदिग्ध हालात में मरने वाले 11 लोगों में सुजाता की मां नारायण देवी भी है। मौत की खबर के बाद परिवार के लोग व रिश्तेदार दिल्ली गए हुए थे। जहां से पोस्टमार्टम व अंतिम संस्कार के बाद वापस पानीपत आ गए हैं। यहां पड़ोसियों व रिश्तेदारों का घर पर आना-जाना लगा हुआ है। बेटी सुजाता सदमे में है।