नन्ही परी के शुभ पांव घर में पड़े और वह शहीद पिता के लिए वरदान बन गई। राष्ट्रपति ने उसके बहादुर पिता के लिए बड़ा ऐलान किया। यहां जानिए।
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शहीद गुरसेवक सिंह के लिए वीरता पुरस्कार की घोषणा
- फोटो : फाइल फोटो
देश के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पठानकोट आतंकी हमले में शहीद हुए गुरसेवक सिंह के लिए वीरता पुरस्कार की घोषणा की है। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या को अपने भाषण में राष्ट्रपति ने ये ऐलान किया। जैसे ही गुरसेवक के परिजनों को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने मासूम बेटी को गले से लगा लिया। पुरस्कार की घोषणा होने से गुरसेवक के पिता और गांव के लोग बहुत खुश हैं और उन्होंने सरकार का आभार व्यक्त किया।
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शहीद गुरसेवक सिंह के लिए वीरता पुरस्कार की घोषणा
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हरियाणा में अंबाला जिले के गांव गरनाला का बहादुर बेटा गुरसेवक सिंह इसी साल दो जनवरी को पठानकोट एयरबेस में हुए आतंकी हमले में शहीद हो गया था। 24 वर्षीय गुरसेवक की शादी शहादत से दो महीने पहले ही 18 नवंबर 2015 को कुराली के वार्ड-6 में रहने वाले रणधीर सिंह की पुत्री जसप्रीत कौर से हुई थी। 8 महीने बाद 13 अगस्त को जसप्रीत ने बेटी को जन्म दिया और उसके दो दिन बाद ये घोषणा होने से गुरसेवक की पत्नी गौरवान्वित महसूस कर रही हैं।
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शहीद गुरसेवक सिंह के लिए वीरता पुरस्कार की घोषणा
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गुरसेवक सिंह के पिता सुच्चा सिंह कहते हैं कि वे बेटे को वीरता पुरस्कार मिलने से बेहद खुश हैं। बेटी अपने पिता के लिए वरदान बनकर आई है। वे अपने शहीद बेटे की आखिरी निशानी को पाकर बहुत खुश है। उनके अनुसार इस बेटी के लिए भी ये सौभाग्य की बात है वे भविष्य को खुद को उस शहीद पिता की बेटी कहलाएगी, जिसने अपने की रक्षा के लिए आतंकियों से लोहा लेते हुए एक जांबाज तरीके से शहादत प्राप्त की।
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शहीद गुरसेवक सिंह के लिए वीरता पुरस्कार की घोषणा
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सुच्चा सिंह ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि शनिवार को गुरसेवक की बेटी हुई है। परिवार इस बात को लेकर बहुत ही खुश है, लेकिन अब बेटे की बहादुरी अवार्ड मिलने की खबर ने गर्व का अहसास करवा दिया है। उन्हें व उनके सभी परिजनों को बहुत गर्व महसूस हो रहा है कि देश उनके बेटे को उसकी शहादत का इनाम दे रहा है। उनके अनुसार वो पल बहुत ही भावुक होंगे जब वे लोग गुरसेवक के इस अवार्ड को लेकर दिल्ली जाएंगे।
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गौरतलब है कि इसी साल दो जनवरी को पठानकोट एयरबेस पर आतंकियों ने हमला किया था। इस दौरान गुरसेवक सिंह को आतंकियों को ढेर करने का जिम्मा देकर आदमपुर से पठानकोट भेजा गया था। परिजनों को इसकी सूचना नहीं थी, क्योंकि उसे अचानक ही पठानकोट भेजा गया था। वहां वह दो जनवरी की रात को आतंकियों से भिड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ।
शहीद गुरसेवक सिंह के लिए वीरता पुरस्कार की घोषणा
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एयरफोर्स की कमांडों विंग गरूड़ फोर्स का गुरसेवक पहला ऐसा कमांडो था, जिसने शहादत पाई है। अमूमन सेना के पैरा कमांडो, नेवी के मरीन कमांडो व एनएसजी के कमांडो ही आतंकियों से भिड़ते हैं, लेकिन बरसों बाद ऐसा हुआ है कि आतंकियों ने एयरबेस को निशाना बनाया है, इसलिए उनसे लड़ने के गरूड़ कमाडों स्पेशल ऑपरेशन पर तैनात किए गए। इसी फोर्स में शामिल था अंबाला का लाल शहीद गुरसेवक।