इस महिला ने घर की दहलीज लांघी, समाज के सारे बंधन तोड़ दिए और ऑटो दौड़ाने लगी। जिद भी ऐसी की कि घरवाले भी हार गए, जानिए आखिर ऐसा क्या हुआ था।
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ई-रिक्शा महिला ड्राइवर शकुंतला
पंचकूला के मौली जागरां की रहने वाली शकुंतला उन महिलाओं के लिए मिसाल बनकर उभरी हैं, जो जरा सी मुश्किल देख घबरा जाती हैं। शकुंतला ई रिक्शा चलाकर अपने बच्चों का जीवन संवार रही हैं। खास बात यह है कि इनके ई रिक्शा में ज्यादातर महिलाएं व युवतियां ही सफर करती हैं। लड़कियों का कहन है कि शकुंतला आंटी के साथ वे खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हैं।
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- फोटो : File Photo
शकुंतला का कहना है कि कोई भी काम करने में शर्म कैसी। भगवान ने हाथ पैर कमाने के लिए दिए हैं, किसी के आगे फैलाने के लिए नहीं। आज वह पूरे सम्मान के साथ ई रिक्शा चला रही हैं और अपने बेटे को शिक्षित बना रही हैं। शकुंतला की जिंदगी में कम मुसीबतें नहीं थीं। 12 साल पहले की बात है, जब उसका पति छोड़कर चला गया। गोद में मात्र तीन दिन का बेटा था और सामने पूरी जिंदगी।
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लगा कि वक्त जैसे थम गया। छोटे बच्चे को लेकर कहां जाए, इसे कैसे पालेगी, गृहस्थी कैसे चलेगी आदि सवालों ने शकुंतला को घेर लिया। कई दिन तक वह घर से नहीं निकली। राशन खत्म हो गया। तीन चार दिन तक तो जैसे तैसे बीते लेकिन भूख से नहीं लड़ सकी। मजबूरन उसने अपना सोने का पैंडल बेचा और सड़क किनारे छल्ली बेचना शुरू कर दिया। कई महीने तक यही काम करती रही। फिर लोगों के घरों में झाड़ू पोंछा लगाना शुरू किया।
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इस तरह शकुंतला की गृहस्थी चलने लगी। लेकिन बेटे की बीमारी और घर के राशन का खर्च नहीं चल पा रहा था। शकुंतला ने इसी बीच ड्राइविंग सीखी और लोन लेकर ई-रिक्शा खरीद लिया। फिर ई-रिक्शा लेकर सड़कों पर निकल पड़ी। मोहल्ले के लोगों ने उसकी निंदा की। लेकिन उसने किसी की बातों पर ध्यान नहीं दिया। बकौल शकुंतला, उसके सामने अपने बेटे का भविष्य था। वह अपने बेटे को पढ़ाना चाहती थी। इसलिए उसने ई रिक्शा चलाने का निर्णय लिया।
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शकुंतला चाहती है कि वह नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं को घर छोड़कर आए। उसके ई रिक्शा में महिलाएं खुद को सुरक्षित भी महसूस करती हैं और छेड़खानी, अश्लील कमेंट्स आदि से भी बचती हैं। इसलिए उसके ई रिक्शा में बैठने वाली ज्यादातर महिलाएं और युवतियां होती हैं। वैसे भी चंडीगढ़-पंचकूला में बहुती सी महिलाएं और लड़कियां नाइट शिफ्ट में काम करती हैं, ऐसे में उसे कमाई का ठोस साधन भी मिल गया है।
लेकिन शकुंतला को मलाल है कि ज्यादा पढ़ी लिखी न होने के कारण उसे ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिल रहा है। वह कई बार आरएलए के दफ्तर में मिन्नतें कर चुकी है लेकिन वे कहते हैं कि 10वीं का सर्टिफिकेट लाओ, तब डीएल बनेगा। शकुंतला का कहना है कि वह कार और आटो चलाना भी जानती है। कई बार ऑटो चालक उस पर कमेंट करते हैं। उसकी उम्र का उपहास उड़ाते हैं। लेकिन वह इस सबकी परवाह नहीं करती।