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बर्थडे स्पेशल: इस बेटी ने जान दे बचाईं थीं 360 जानें, पाकिस्तान भी रोया था

Thu, 08 Sep 2016 09:34 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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5 सितंबर को हाईजेक हुआ प्लेन और नीरजा भनोट
चंडीगढ़ में आज के दिन जन्मी इस बेटी ने अपनी जान देकर 360 जानें बचाई थीं। इसकी मौत पर पाकिस्तान ने भी आंसू बहाए थे।
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5 सितंबर को हाईजेक हुआ प्लेन और नीरजा भनोट
ये बहादुर बेटी है चंडीगढ़ में आज के ही दिन 7 सितंबर 1964 को जन्मी नीरजा। भारत ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान अशोक चक्र दिया था, पाक ने तमगा-ए-इन्सानियत। भारत ने उनके नाम पर डाक टिकट भी जारी किया था। मोगा के गांव घलकलां के देशभगत पार्क में उसका एकमात्र स्टेच्यू स्थापित किया गया है। वहीं पर 16 फुट लंबा जहाज बनाया गया है और उस बहादुर बेटी की शहादत को सारी दुनिया सलाम करती है।
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5 सितंबर को हाईजेक हुआ प्लेन और नीरजा भनोट
उसके जन्मदिन से दो दिन पहले हाइजेक हुए प्लेन में दम तोड़ने से पहले 360 लोगों की जानें बचाई थी। Pan Am 73 एयरलाइंस का प्लेन आज ही के दिन, 5 सितंबर 1986 को पाकिस्तान के कराची एयरपोर्ट पर हथियार बंद 4 आतंकवादियों हाईजैक कर लिया था। आतंकवादी प्लेन को 9/11 की तरह इजराइल में क्रैश कराना चाहते थे। प्लेन में मौजूद नीरजा भनोट ने हिम्मत दिखाते हुए लोगों को बचा लिया, पर अपनी जान गंवा दी।

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5 सितंबर को हाईजेक हुआ प्लेन और नीरजा भनोट
चंडीगढ़ में 7 सितंबर 1964 को जन्मी नीरजा का बचपन मुम्बई में बीता। स्कूली शिक्षा बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल से हुई और सेंट जेवियर्स कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री ली। नीरजा को बचपन से ही प्लेन में बैठने और आकाश में उड़ने की इच्छा थी। नीरजा भनोट की शादी 1985 में हो गई थी, लेकिन उनके रिश्तों में खटास आ गई। वे शादी के दो महीने बाद ही मुम्बई लौट आई थीं। 1986 में मॉडल के रूप में उन्होंने कई TV और प्रिंट ऐड करना शुरू कर दिए थे।
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भारत की बहादुर बेटी नीरजा भनोट - फोटो : फाइल फोटो
शौक को पूरा करने के मकसद से नीरजा ने बाद में एयरलाइंस ज्वाइन कर ली। नीरजा ने इसकी विशेष ट्रेनिंग ली कि हाईजैक के दौरान क्या करना चाहिए? तब मां ने जो कहा, उसे भी नहीं माना था नीरजा ने, ब‌ल्कि जवाब दिया था। 5 सितंबर को अमेरिकी एयरवेज का विमान पैन एम73, करीब  380 यात्री लेकर पाकिस्तान के करांची हवाई अड्डे पर पायलट का इंतजार कर रहा था। अचानक उसमें चार हथियारबंद आतंकवादी घुस गए और सभी यात्रियों को गन प्वांइट पर ले लिया।
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भारत की बहादुर बेटी नीरजा भनोट - फोटो : फाइल फोटो
आतंकियों ने पाक सरकार से पायलट भेजने की मांग की, ताकि वो विमान को अपने मन मुताबिक जगह पर ले जा सकें, पाक सरकार ने मना कर दिया। इससे भन्नाए आतंकियों ने विमान में बैठे अमेरिकी यात्रियों को मारने का फैसला कर लिया। वो अमेरिका के जरिए पाक सरकार पर दबाव बनाने की ताक में थे। लेकिन उन्हें पता था इसी विमान की 23 साल की अकेली पतली-दुबली फ्लाइट अटेंडेंट एक भारतीय विरांगना है, जिससे वो टकरा नहीं पाएंगे।
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भारत की बहादुर बेटी नीरजा भनोट - फोटो : फाइल फोटो
आतंकियों ने गलती से उसी वीर भारतीय लड़की को बुला लिया और विमान में बैठे सभी यात्रियों के पासपोर्ट इकट्ठा करने को कहा, लेकिन भारतीय वीरांगना ने दिन में आतंकियों की आंखों में धूल झोंक दिया। विमान में अमेरिकी यात्री बैठे हुए थे, पर एक भी आतंकियों के हवाले नहीं हुए। लड़की ने सबके पासपोर्ट छुपा लिए। यह देख आतंकी तिलमिला उठे। उन्होंने गोराचिट्टा दिखने वाले एक अंग्रेज को खींचकर वीमाने के गेट पर ले आए और गोली मारने की तैयारी करने लगे।

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भारत की बहादुर बेटी नीरजा भनोट - फोटो : फाइल फोटो
नीरजा ने आतंकियों का ऐसा ‌दिमाग घूमाया कि उन्होंने उस ब्रिटिश को छोड़ दिया। आतंकी और पाक सरकार में लगातार खींचातानी चलती रही। इधर 380 डरे हुए लोगों में एक अकेली भारतीय लड़की डटी रही। लड़की ने 16 घंटे हिम्मत बांधे रखी। किसी भी यात्री को आंच नहीं आने दी। लेकिन उसे अचानक खयाल आया कि अब विमान का ईंधन खत्म होने वाला है। ऐसा हुआ तो विमान में अंधेरा छा जाएगा और ‌भागदौड़ मच जाएगी। जिसमें बेतहाशा खून बहेगा।

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भारत की बहादुर बेटी नीरजा भनोट - फोटो : फाइल फोटो
नीरजा ने तत्काल आतंकियों को खाने का पैकेट दिया और यात्रियों को आपातकालीन खिड़कियों के बारे में समझाया। तभी विमान का ईंधन खत्म होते ही अंधेरा छा गया। नीरजा ने यात्रियों को प्लेन से नीचे कूदाना शुरू कर दिया। इसी बीच दहशतगर्दों ने गोलियां दागना शुरू कर दी। बहादुर नीरजा ने एक शख्स को नहीं मरने दिया। जल्दबाजी और बेसुधगी के चलते कुछ घायल जरूर हो गए। दूसरी तरफ मौका देखकर पाक कमांडो भी विमान पहुंच गए।

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भारत की बहादुर बेटी नीरजा भनोट - फोटो : फाइल फोटो
धुआंधार गोलीबारी के बीच भारत की बेटी दुर्दांत आतंकियों को तरह तरह से छकाने में लगी थी। उसने आतंकियों को उलझाए रखा और वो कामयाब भी रही। सबके निकल जाने के बाद अंत में जब वो विमान से निकलने लगी, तो अचानक उसे कुछ बच्चों के रोने की आवाज सुनाई दी। वो भारत की बेटी नीरजा मां तो नहीं बनी थी, लेकिन वो रोते हुए बच्चों को छोड़कर भागना ठीक नहीं समझी। वो वापस विमान में आ गई और बच्चों को ढूंढ निकाला।

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भारत की बहादुर बेटी नीरजा भनोट - फोटो : फाइल फोटो
नीरजा आपातकालीन खिड़की ओर बढ़ी तो एक आतंकी सामने आ खड़ा हुआ। उसने बच्चों को खिड़की से नीचे धकेल दिया और सारी गोलियां खुद के सीने पर झेल ली। 17 घंटे तक चले इस खून खराबे में वो भारतीय वीरांगना नीरजा भी शहीद हो गई। पाक की धरती पर विश्वभर के लोगों की जान की रक्षा करने वाली उस भारत की बेटी का नाम है नीरजा भनोट। घटना के दो दिन बाद वो अपना 23वां जन्मदिन मनाने वाली थी। लेकिन सपने अधूरे रह गए।
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भारत की बहादुर बेटी नीरजा भनोट - फोटो : फाइल फोटो
2004 में इस बात का पता चला कि 5 सितंबर, 1986 में हुई उस भयावह घटना के पीछे लीबिया के चरमपंथियों का हाथ था। इस पूरे मामले को और भारत की बेटी नीरजा के बलिदान को याद कराने के लिए मूवी 'नीरजा भनोट' बनाई गई। नीरजा के किरदार में सोनम कपूर हैं। मुंबई एयरपोर्ट पर पहली शूटिंग हुई। डायरेक्टर राम माधवानी का कहना है कि इंडस्ट्री के कई बड़े नामों समेत 200 कलाकारों ने फिल्म बनाने में सहयोग किया।
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