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विनोद अग्रवाल ने जीते जी जाहिर कर दी थी आखिरी इच्छा, चाहते थे इस जगह पर हो मौत

Tue, 06 Nov 2018 02:44 PM IST
नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
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विनोद अग्रवाल
64 साल की उम्र में दुनिया से विदा ले चुके भजन गायक विनोद अग्रवाल ने जीते जी ही अपनी आखिरी इच्छा जाहिर कर दी थी, जानना चाहेंगे वो कौन सी इच्छा थी
 
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विनोद अ्रगवाल
‘मैंने सपनों की नगरी मुंबई से किनारा कर भक्ति की नगरी वृंदावन को आशियाना बना लिया है। जीवन भर कान्हा के भजन गाता रहा अब जीवन के अंतिम पड़ाव पर यही कामना है कि कन्हैया की नगरी में ही चिर निद्रा में सो जाऊं। जब भी मेरे प्राण निकलें तो वृंदावन में ही निकलें।’ कौन जानता था कि एक महीने पहले अमर उजाला को दिए साक्षात्कार में जताई भजन सम्राट विनोद अग्रवाल की यह इच्छा इतनी जल्दी पूरी हो जाएगी। लेकिन नियति को यही मंजूर था। मथुरा के नयति मेडिसिटी अस्पताल में मंगलवार को उन्होंने अंतिम सांस ले ली। सेक्टर-29 में एक शाम श्री राधामाधव के नाम कार्यक्रम में भजन पेश करने आए थे।
 
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विनोद अग्रवाल
यह मुलाकात सात अक्तूबर को सेक्टर 29 के अवल टेंट के कार्यालय में हुई थी। समय यही कोई साढे़ सात बजे थे। चेहरे पर परम संतोष के भाव थे। अपना परिचय देते हुए बातचीत का सिलसिला शुरू किया।  विनोद बोले-1978 से गायकी शुरू की। संगीत तो सीखा भी नहीं। बस कन्हैया की कृपा बरसती रही।

उन्होंने आगे कहा कि असल में संगीत विशाल समुद्र की तरह है। परिवर्तन सृष्टि का नियम है। पाश्चात्य संगीत तो उत्तेजना भरता है। संगीत में शब्दों की प्रगाढ़ता भी जरूरी है। आजकल संगीत के नाम पर शोर हो रहा है। शब्दों का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है। नए गायकों को शब्दों का सही इस्तेमाल करना आना चाहिए।
 

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विनोद अ्रगवाल
व्यापार करते करते कृष्ण की भक्ति में खो गया
भजन गायक विनोद अग्रवाल ने बताया था कि वे कपड़े के व्यापारी थे। मुंबई तक कारोबार फैला था। कब वे कृष्ण की भक्ति में खो गए पता ही नहीं चला। फिर मुंबई से पत्नी समेत वृंदावन आकर बस गए। बेटा बिजनेस संभाल रहा है। विनोद ने कहा था कि वे कोई समाज सुधारक, उपदेशक या वक्ता नहीं हैं। वे तो बस सामान्य व्यक्ति हैं, जो अपने आराध्य की भक्ति में डूबा रहता है। मेरी हमेशा से इच्छा थी कि जिंदगी का एक चौथाई हिस्सा वृंदावन में ही बीते। यदि मृत्यु भी आए तो वो आंगन भी मेरे कन्हैया का ही हो। अंतिम समय में भी मेरे होठों पर बंसी बजैया का ही नाम हो।

 
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विनोद अ्रगवाल
भाव जब दिल में नहीं समाते तो आंखों से बह जाते हैं
भजन गाते समय आंखों में आंसू आने के पीछे जो वजह उन्होंने बताई थी, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे कितने दयालु हृदय के मालिक थे। बताया कि मेरे दिल में कृष्ण के प्रति अगाध स्नेह है। अपनी भक्ति को व्यक्त करने का भजन की एकमात्र माध्यम है। लेकिन जब भाव दिल में नहीं समाते तो आंखों से बहने लगते हैं। हमेशा वृंदावन के संतों द्वारा रचित गीत ही गाते हैं। लेकिन वे किसी और ने न गाए हों।

 
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विनोद अ्रगवाल
मुझे तो बदलेव ने मुंबई से निकाला...
विनोद अग्रवाल ने बताया था कि मुंबई में अपने बिजनेस स्थल पर हर रविवार को कीर्तन करते थे। दिल्ली से बलदेव मुंबई ट्रांसफर होकर आए थे। वे प्राइवेट कंपनी में जॉब करते थे। 1993 में मुलाकात हुई और हम दोनों साथ साथ भजन गाने लगे। दोनों ने तीन हजार से ज्यादा कार्यक्रम एक साथ किए। देश ही नहीं विदेशों में भी भजन गाए। बलदेव कृष्ण दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में जॉब करते थे।
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विनोद अ्रगवाल
उनका ट्रांसफर मुंबई कर दिया गया। वहां पर संकीर्तन का साधन नहीं था। अपने बॉस से उन्होंने कहा कि दिल्ली बुला लो। बॉस बोले-कमाल है, सब मुंबई जाते हैं, आप दिल्ली आना चाहते हैं। इसके बाद बलदेव को पता चला कि कोई विनोद अग्रवाल नाम के बिजनेसमैन हैं, जो रविवार को अपनी गद्दी पर संकीर्तन करते हैं। जून 1988 में मुलाकात हुई। 1993 में विनोद को मुंबई से निकाला। दोनों के एक साथ ढाई सौ एलबम हैं।
 
फ्रंटियर मेल से मुंबई जा रहे थे...
विनोद ने एक वाकया याद करते हुए बताया था कि 1933 की बात है। वे अमृतसर से फ्रंटियर मेल में बैठकर मुंबई जा रहे थे। जगाधरी में 150 से भी ज्यादा लोग मिलने के लिए स्टेशन पर जुट गए। जबरन ट्रेन से उतार लिया। जगाधरी में श्यामा स्नेही संकीर्तन मंडल की ओर से हर रविवार को कीर्तन होता है। मुझे वहीं ले गए।

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विनोद अ्रगवाल
ट्राइसिटी में आने पर वे चंडीगढ़ के सेक्टर-15 में ठहरते थे...
गायक विनोद अग्रवाल जब भी ट्राइसिटी में कार्यक्रम में आते तो चंडीगढ़ के सेक्टर-15 सी में जयचंद बंसल के घर पर ही ठहरते थे। जयचंद के बेटे सुनील बंसल का कहना है कि 20 वर्ष पहले सेक्टर-15 में पहली बार कीर्तन करवाया था। उनका परिवार वर्ष 1971 से ही उन्हें जानता था। सुनील बंसल का कहना है कि वे भजन गायक विनोद अग्रवाल को अपना गुरु मानते थे। कभी साथ में नहीं बैठे हमेशा उनके सामने खड़े ही रहे। सुनील बंसल  का सेक्टर-17 में बंसल टेक्सटाइल नाम से शोरूम है।

 
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विनोद अ्रगवाल
हमारी संस्था ने कितनी ही बार भजन गायक विनोद अग्रवाल को चंडीगढ़ बुलाया। पिछले सात अक्तूबर को भी कार्यक्रम सेक्टर-29 में हुआ था। उनके भजनों को जनता भाव से सुनती थी। उनकी मृत्यु का समाचार सुनकर बहुत दुख हुआ। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। - राकेश पाल मोदगिल, प्रधान श्री कृष्ण भक्ति आश्रम मंडल चंडीगढ़।
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