शनिवार को दुर्गा पूजा और विजयदशमी का जश्न मनाया गया। दुर्गा पूजा के पंडालों में 'सिंदूर खेला' की धूम रही। मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन करने से ठीक पहले 'सिंदूर खेला' की परंपरा के दौरान चंडीगढ़ में कोलकाता जैसा नजारा देखने को मिला।
विज्ञापन
2 of 6
चंडीगढ़ में 'सिंदूर खेला' की धूम
- फोटो : अमर उजाला
सबसे पहले दधी कर्मा किया गया। दधी कर्मा के बाद दर्पण विसर्जन का आयोजन हुआ। महिलाओं ने एक दूसरे को सिंदूर लगाकर बधाई दी। दोपहर बाद जुलूस की शक्ल में दुर्गा मां की प्रतिमा को विसर्जन के लिए जाया गया।
विज्ञापन
3 of 6
चंडीगढ़ में 'सिंदूर खेला' की धूम
- फोटो : अमर उजाला
सुबह बड़ी संख्या में माता के भक्त कालीबाड़ी पहुंचे। नवरात्रि के 10वें यानी दशमी के दिन बंगाली समाज की शादी शुदा महिलांओं ने सबसे पहले दुर्गा मां को सिंदूर लगाकर पूजा अर्चना की फिर एक दूसरे को सिंदूर लगाया। इसे सिंदूर खेला कहते हैं। खासतौर से बंगाली समाज में इसका बहुत महत्व है।
4 of 6
चंडीगढ़ में 'सिंदूर खेला' की धूम
- फोटो : अमर उजाला
ऐसी मान्यता है कि सिंदूर खेला से सौभाग्य का वरदान मिलता है। पति की उम्र लंबी होती है। यही कारण है कि सिंदूर खेला में महिलाएं बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती हैं।
विज्ञापन
5 of 6
चंडीगढ़ में 'सिंदूर खेला' की धूम
- फोटो : अमर उजाला
जम कर नाची महिलाएं
इस दौरान महिलाओं ने जमकर जश्न मनाया। एक दूसरे को सिंदूर लगाकर विजयादशमी की बधाई दी और मां के सामने नाच-गाकर अपने सुहाग की रक्षा के लिए आशीर्वाद भी मांगा।
चंडीगढ़ में 'सिंदूर खेला' की धूम
- फोटो : अमर उजाला
नवरात्रि पर सिंदूर से क्यों खेलती हैं महिलाएं
ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा साल में एक बार अपने मायके आती हैं और वह अपने मायके में पांच दिन रुकती हैं, जिसको दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है। कहा जाता है कि मां दुर्गा मायके से विदा होकर जब ससुराल जाती हैं, तो सिंदूर से उनकी मांग भरी जाती है। साथ ही दुर्गा मां को पान और मिठाई भी खिलाई जाते हैं।