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स्मार्टफोन में कोई ऐप डाउनलोड करें तो सावधानी बरतें, वरना लेने के देने पड़ेंगे

Fri, 29 Sep 2017 09:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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मोबाइल यूजर्स
अगर आप एंड्रायड फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं और कई सारी ऐप डाउनलोड कर रखी हैं तो सावधान रहें, नहीं तो लेने के देनों पड़े सकते हैं।
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मोबाइल यूजर्स
एंड्रायड फोन पर कोई भी नई ऐप डाउनलोड करने से पहले उसकी प्रमाणिकता और सत्यता के बारे में जरूर जान लें। क्योंकि कहीं ऐसा न हो कि आपका फोन ही आपकी जासूसी कर दे और आपके फोन में रखी आपकी निजी जानकारियां, कान्टेक्ट नंबर और अन्य सूचनाएं साइबर हैकर्स तक पहुंचा दें। साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार अधिकतर चाइनीज मोबाइल में पहले से ही ऐसे साफ्टवेयर आ रहे हैं, जिससे आपकी निजी जानकारियां निजी नहीं रह पाती हैं।
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मोबाइल यूजर्स
स्टैलर डाटा साल्यूशन कंपनी के फाउंडर और साइबर एक्सपर्ट राजेश राणा के अनुसार देश में बिक रहे अधिकतर चाइनीज मोबाइल में पहले से ‘मालवेयर’ लगा हुआ आ रहा है। इससे आपका फोन आपकी जासूसी कर आपकी कई जानकारियां कंपनी तक पहुंचा देती हैं। वहीं इसके अलावा आप फोन में कोई ऐप डाउनलोड करते हैं तो अक्सर वह आपसे अनुमति मांगता है आपके कान्टेक्ट नंबर, फोटो गैलरी व अन्य ऐप के इस्तेमाल की जानकारी मांगता है।

 

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Mobile User
अगर आप इस ऐप को इसकी मंजूरी देते हैं, तो वह आपके फोन की सारी निजी जानकारी ऐप बनाने वाले के पास पहुंचा सकते हैं। आपके कान्टेक्ट नंबर और बैंक अकाउंट, पासवर्ड संबंधी सारी निजी जानकारी डार्क साइट्स पर बेची जा सकती हैं। आपकों पता भी नहीं चलेगा और आपके फोन का सारा डाटा साइबर वर्ल्ड तक पहुंच जाएगा।
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मोबाइल यूजर्स
चंडीगढ़ निवासी एक युवती अंजली (परिवर्तित नाम) की शादी शहर निवासी और वर्तमान में गुरुग्राम में आईटी कंपनी में नौकरी करने वाले सुमित (बदला हुआ नाम) से तय हुई। दोनों केपरिवार इस रिश्ते को लेकर काफी खुश थे। दोनों की सगाई हुई तो सुमित ने अंजली को एक फोन गिफ्ट किया। इसके बाद से अंजली वहीं फोन इस्तेमाल करने लगी।
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Mobile User
कुछ दिनों बाद अंजली कहीं भी जाती या किसी से फोन पर बात करती तो सुमित उसे फोन कर इस बारे में पूछता। शुरू में तो अंजली को पता नहीं चला, लेकिन बाद में उसे शक होने लगा। क्योंकि सुमित को उसकी अंजली के हर दिन की दिनचर्या और कहां जा रही है और क्या करती है आदि की सभी जानकारी होती थी। दोनों में इसे लेकर लंबी बहस भी होती थी। एक दिन अंजली अपने माता-पिता को लेकर एक साइबर एक्सपर्ट के पास पहुंचे।
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Mobile App
वहां उन्हें पता चला कि सुमित ने जो फोन अंजली को दिया था, उसमें उसने स्पाई साफ्टवेयर लगाया हुआ था। इससे सुमित को अंजली के बारे में सभी कुछ पता चल जाता था। इसके बाद दोनों परिवारों में इसे लेकर बातचीत हुई तो सुमित ने इसे कबूल कर लिया। इसके बाद अंजली ने इस रिश्ते को तोड़ना ही बेहतर समझा।

 

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mobile app
साइबर एक्सपर्ट राजेश राणा के अनुसार इंटरनेट पर कई ऐसी ऐप हैं जो किसी के फोन की ऐप स्कैन कर लेती हैं। इससे उस ऐप पर कोई भी गतिविधि होगी तो दूसरे फोन पर इसका पता चल जाएगा। जैसे मान लीजिए आपके व्हाट्सअप को किसी ने स्कैन कर लिया तो उसके फोन पर मौजूद स्कैनर पर आपके व्हाट्सअप पर कोई भी चैट होगी तो दूसरा व्यक्ति आपकी वह सारी चैट पढ़ सकता है। इससे आपकी कोई भी निजी जानकारी दूसरे व्यक्ति तक आसानी से पहुंच सकती है।

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सर्वे में यह सच आया सामने
राणा के अनुसार यूएसए बेस वर्जिनिया टेक नामक संस्था ने एक सर्वे किया था। इसमें 1,10,150 ऐप की तीन साल तक जांच पड़ताल की। इसमें उन्होंने पाया कि 85 फीसदी ऐप फोन से निजी जानकारियां चुराकर साइबर वर्ल्ड में डार्क साइट्स को बेचती हैं।

 
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फ्री ऐप से साइबर अपराधी कर सकते हैं अटैक
अकसर लोग मोबाइल पर फ्री ऐप ही डाउनलोड करते हैं। राजेश राणा के अनुसार, इंटरनेट या प्ले स्टोर पर साइबर हैकर्स कई ऐप अपलोड करते हैं। इनमें गेम्स, शॉपिंग, रेस्त्रां आदि से जुड़ी ऐप अधिक होती हैं। एक बार आपने इन्हें फ्री ऐप होने पर डाउनलोड किया तो वह वह इस ऐप के जरिए साइबर अटैक भी कर सकते हैं। खास बात यह है कि फोन पर ऐप डाउनलोड करने वाले को इसका पता भी नहीं चलेगा और ऐप से हैकर्स साइबर अटैक भी कर देंगे।
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