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देखिए, ऐसा क्या हुआ कि सड़क पर उतरे 15 हजार छात्र?

Tue, 19 May 2015 07:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर/फगवाड़ा
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जालंधर-फगवाड़ा रोड पर एक साथ 15 हजार छात्र सड़क पर उतर आए। वे सभी लवली यूनिवर्सिटी में हुए PMET एग्जाम में फिक्सिंग के आरोप लगा रहे थे। तस्वीरों में पूरा मामला।
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बाबा फरीद यूनिवर्सिटी की तरफ से रविवार को लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में पीएमईटी की परीक्षा कराई गई। इस दौरान विद्यार्थियों के अभिभावकों ने यूनिवर्सिटी पर पेपर को फिक्स करने तक का आरोप लगा दिया। पेपर की फिक्सिंग से भड़के विद्यार्थियों और अभिभावकों ने लवली में जमकर हंगामा किया और रोड जाम कर दिया।
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अभिभावकों का कहना था कि यूनिवर्सिटी द्वारा करीब 60 बच्चों का पेपर 11.30 बजे ही अलग बैठा कर ले लिया गया है। पेपर को लीक किया गया और परीक्षा में इन 60 बच्चों की मदद भी की गई है। बाकी विद्यार्थियों का पेपर 12 बजे शुरू करवाया गया। परिजनों का आरोप था कि पूरे प्रदेश के बच्चों के लिए सिर्फ एक सेंटर बनाया जाना गलत है।

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पेपर देने के लिए करीब 15 हजार विद्यार्थी एलपीयू पहुंचे थे। इन वाहनों के कारण एलपीयू से लेकर फगवाड़ा तक रोड जाम हो गया। लोगों को एलपीयू से जालंधर और फगवाड़ा पहुंचने में एक घंटे का समय लग गया। परिजनों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी में पार्किंग के प्रबंध भी अपर्याप्त थे, उन्हें अपने वाहन दूर ले जाने के लिए मजबूर किया गया।
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हंगामे की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे एसडीएम केशव हिंगोनिया और डीएसपी मनप्रीत सिंह ढिल्लों ने इन आरोपों का खंडन किया। 11.40 पर शुरू हुआ प्रदर्शन 2.40 पर खत्म हुआ। एसपी आई जगजीत सिंह सरोया ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और यातायात सुचारू करवाया।
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बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी की पीएमईटी 2015 की परीक्षा में 15152 विद्यार्थी शामिल हुए। विवि की तरफ से इस परीक्षा का 18 मई सोमवार को नतीजा घोषित किए जाने के आसार हैं।
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लवली यूनिवर्सिटी के चांसलर अशोक मित्तल ने कहा कि मुझे पता चला था कि ट्रैफिक में फंसे होने के कारण कुछ विद्यार्थी परीक्षा में देरी से पहुंच सकते हैं। मैंने उन बच्चों के भविष्य को देखते हुए पेपर को 20 मिनट देरी से शुरू करने का फैसला किया। परीक्षा देने के लिए बच्चों का आना जारी था। इसके चलते पेपर का समय कुछ देर के लिए ओर बढ़ा दिया गया। 11.45 पर मुझे लगा कि सभी विद्यार्थी पेपर के लिए पहुंच चुके हैं तो मैंने पेपर शुरू करने का आदेश दे दिया। बच्चों के भविष्य को देखते हुए पेपर का समय देरी से किया, यही मेरी गलती थी। यूनिवर्सिटी पर जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वो बेबुनियाद हैं।
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