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मंजीत सिंह यूं ही नहीं बने गोल्ड मेडलिस्ट, पत्नी ने खोले दो राज, सुनकर मां-बाप भावुक...5 अनकही बातें

Wed, 29 Aug 2018 03:03 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जींद(हरियाणा)
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मंजीत सिंह चहल
एशियन गेम्स 2018 में गोल्ड मेडल जीतने वाले धावक मंजीत सिंह के बारे में उनकी पत्नी किरण ने दो ऐसी बातें बताई, आप यकीं नहीं कर पाएंगे। उसने एक ऐसी बात कही, सुनकर मां-बाप भावुक हो गए।
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मंजीत सिंह चहल
800 मीटर दौड़ में मनजीत ने जीता गोल्ड
एशियाई खेलों में देश को शूटिंग में जींद के शूटर लक्ष्य श्योराण द्वारा सिल्वर मेडल दिलवाने के बाद अब उझाना गांव निवासी मनजीत सिंह चहल ने एथलीट में गोल्ड दिलाया है। मंगलवार को हुए मुकाबले में मनजीत सिंह चहल ने एक मिनट 46 सेकेंड 15 प्वाइंट में 800 मीटर दौड़ पूरी कर देश को गोल्ड मेडल दिलवाया। मनजीत चहल नरवाना उपमंडल के उझाना गांव के साधारण किसान परिवार से आते हैं। फिलहाल उनका परिवार नरवाना में ही रहता है। मनजीत के पिता रणधीर सिंह ने बताया कि मनजीत ने करीब तीन-चार पहले पढ़ाई छोड़ दी और पूरा ध्यान खेल पर दिया। मनजीत के पिता 30 एकड़ पर खेती करते हैं।
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मंजीत सिंह चहल
रचा कीर्तिमान, 56 साल बाद भारत को दिलाया पहला गोल्ड
इस गोल्ड के साथ मनजीत ने 56 साल पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। बता दें कि 1962 के बाद पहली बार हुआ है कि भारत ने एथलेटिक्स की इस स्पर्धा में स्वर्ण और रजत दोनों अपने नाम किए। 1962 में भारत के ही मिल्खा सिंह और मक्खन सिंह ने देश के लिए एक ही ईवेंट में सिल्वर और गोल्ड मेडल जीते थे। इसके अलावा साल 1982 के बाद भारत को 800 मीटर दौड़ में पहला गोल्ड मेडल मिला है। साल 1982 में इस इवेंट में चार्ल्स बोरोमियों ने जीत हासिल की थी। भारत की तरफ से इस इवेंट में केएम बिनु ने भी 2002 में मेडल जीते थे।

 

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मंजीत सिंह चहल
चार माह पहले हुए बेटे का अभी मुंह नहीं देखा
चार माह पहले जून में हुई इंटर स्टेट चैंपियनशिप में जब वह 800 मीटर दौड़ दौड़ने जा रहे थे। उसी दौरान उन्हें पता लगा कि उनके बेटा हुआ है, लेकिन मनजीत एशियाई खेलों की तैयारियों को भूटान चले गए और आज तक अपने बेटे का मुंह का नहीं देखा। मनजीत के कोच अमरीष के मुताबिक मनजीत ने बहुत त्याग किया है। जिस बेटे का उसने अब तक मुंह नहीं देखा है उसी के जन्म ने उसकी तकदीर बदली है। बेटे के पैदा होते ही उसने इंटर स्टेट में एशियाई खेलों के लिए क्वालिफाई किया और अब यहां गोल्ड जीत लिया।
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मंजीत सिंह चहल
नौकरी जाने के बाद टूट गए थे मनजीत
बात दो साल पुरानी है जींद के मनजीत सिंह ने यह तय कर लिया था अब एथलेटिक्स में कुछ नहीं रखा है। 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में दौड़ने के बावजूद यह एथलीट ओएनजीसी में कांट्रेक्ट पर लगी नौकरी नहीं बचा पाया था। तब कोच अमरीष कुमार के समझाने पर मनजीत खेल में बने रहे। बस यही धुन थी कि एशियाई खेलों में कुछ कर दिखा कर अपने को साबित करना है। पिता रणधीर सिंह ने बताया कि मंजीत ने कई माह भूटान में अभ्यास किया है। वह राष्ट्रीय कैंप में चयन होने के बाद घर नहीं लौटा। अपने खेल पर ही पूरा ध्यान दिया। इसी का परिणाम है कि मनजीत ने देश को गोल्ड दिलवाया।
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मंजीत सिंह चहल की पत्नी
पति से दूर रहने का नहीं गम
मनजीत की पत्नी किरण ने बताया कि मनजीत पिछले सात माह से प्रैक्टिस के लिए घर से दूर रहा। इसी बीच  उसने बेटे अबीर को भी जन्म दिया। दौड़ के प्रति जुनून के चलते मनजीत अपने बच्चे के जन्म पर भी घर आना जरूरी नहीं समझा। अब मंजीत का पांच माह का बेटा है। किरण ने बताया कि उसके पति की इस जीत के बाद उसकी खुशी का ठिकाना नहीं है।

 
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मंजीत सिंह चहल का परिवार
कबड्डी के खिलाड़ी रहे हैं पिता
मनजीत के पिता रणधीर सिंह अपने समय में क्षेत्र में कबड्डी के नामचीन खिलाड़ी रहे हैं। वहीं मनजीत का भाई अमर चहल भी राष्ट्रीय स्तर पर अंडर 19 आयु वर्ग में क्रिकेट के खिलाड़ी रहे हैं। घर पर खेल का माहौल होने से मनजीत को काफी मदद मिली।

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मंजीत सिंह चहल का परिवार
दौड़ना है मनजीत का जुनून, परिवार से मिली पूरी मदद
इंडोनेशिया में चल रहे एशियाई खेलों में एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले नरवाना के मनजीत चहल के लिए दौड़ना जुनून है। मनजीत को बचपन से ही दौड़ने का शौक है। उसके भाई अमर ने बताया कि जब भी घर से बाहर आसपास कहीं काम जाना होता तो मनजीत पैदल चलकर नहीं दौड़कर ही जाता था। उसके इसी जुनून ने आज देश को गोल्ड मेडल दिलवा दिया है। मनजीत का मेडल सोमवार को ही पक्का हो गया था, जब उन्होंने फाइनल के लिए हुए मुकाबले में एक मिनट 48 सेकेंड और 46 प्वाइंट में 800 मीटर दौड़ पूरी की थी। इससे पहले रविवार को परिजनों ने मनजीत की जीत के लिए घर में हवन भी करवाया।
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मंजीत सिंह चहल का परिवार
पिता ने बांटे लड्डू और दूध
मंजीत सिंह के गोल्ड मेडल जीतने के बाद परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं है। गोल्ड मिलते ही मनजीत के घर पर लड्डू व दूध बंटना शुरू हो गया। बधाई देने वाले लोगों का तांता लग गया। नरवाना के नवदीप स्टेडियम में भी खेल प्रेमियों द्वारा ढोल नगाड़ों के साथ खुशी मनाई गई। मनजीत के पिता रणधीर सिंह चहल ने बताया कि उसका बेटा पिछले 18 साल से अपने खेल का अभ्यास रहा है। उसका सपना था कि वह अपने देश के लिए गोल्ड मेडल जीते। यह मंगलवार को पूरा हो गया है। अब मनजीत की नजर ओलंपिक पर हैं।
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