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तस्वीरों में देखिए, आखिर क्या है आर्मी चीफ के मन में छिपा दर्द?

Sun, 27 Dec 2015 09:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर(हरियाणा)
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सेनाध्यक्ष बनने के बाद पहली बार पैतृक गांव पहुंचे आर्मी चीफ दलबीर सिंह के मन में एक टीस है जो उन्होंने साझा किया। देखिए तस्वीरों में क्या है उनके मन की टीस?
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तस्वीरों में देखिए, आखिर क्या है आर्मी चीफ के मन में ‌छिपा दर्द?

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सेनाध्यक्ष बनने के बाद पहली बार पैतृक गांव पहुंचे आर्मी चीफ दलबीर सिंह के मन में एक टीस है जो उन्होंने साझा किया। दरअसल उनके मन में टीस है कि सेना में अनेक अफसर देने वाले उनके गांव बिसाहन से अभी तक कोई बेटी सेना में अफसर नहीं बनी। उन्होंने कहा कि मै चाहता हूं कि हमारी बेटियां भी फौज में अफसर बनें। मुझे इस बात का इंतजार रहेगा कि यह काम पहले कौन सी बेटी करेगी।

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सेनाध्यक्ष बनने के बाद हरियाणा के झज्जर के बिसाहन स्थित अपने पैतृक गांव में शनिवार को पहली बार पहुंचे सेना प्रमुख ने मन की बात करते हुए युवाओं में जोश भरा। जनरल दलबीरसिंह ने कहा कि स्कूल में पीपल व कीकर के पेड़ के नीचे पढ़ाई कर मैं जनरल के पद तक पहुंच सकता हूं तो फिर आज तो पढ़ाई के लिए अनेक सुविधाएं हैं।  गांव में एक नहीं बल्कि 100 सेना प्रमुख पैदा होने चाहिए। इससे पहले सेना प्रमुख के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत किया।

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वे करीब डेढ़ घंटे तक गांव में रहे। इस दौरान उन्होंने गांव में बिताए समय की यादों को सहेजा। उनकी मौजूदगी में मातनहेल में सैनिक स्कूल और क्षेत्र में बेरोजगारी बढ़ने के मुद्दे भी उठे। सेना प्रमुख ने करीब 18 मिनट के अपने संबोधन में कहा कि मातनहेल में सैनिक स्कूल की घोषणा पिछले दिनों हो चुकी है और यह जरूर बनेगा। इसको लेकर जो रुकावटें थी, वे पीएम व रक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री से मिलकर दूर कर चुके हैं।

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सेनाध्यक्ष ने कहा कि क्षेत्र के जोशीले युवाओं को सेना मे लाने के लिए वे भर्ती का प्रबंध करेंगे। हर उस क्षेत्र में भर्ती का प्रबंध होगा,जहां युवाओं में जोश है। उन्होंने गांव के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में इंडोर गेम्स के लिए बनाए गए हॉल का उद्घाटन किया और कई अन्य कार्यक्रमों में शिरकत की। जनरल के साथ उनकी धर्मपत्नी नमिता के अलावा उनके पुत्र व पुत्री भी बिसहान पहुंचे।
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सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह ने अपने गांव के स्कूल को एक ट्रॉफी भी भेंट की और जीवन पर्यंत हर साल मेधावी छात्र-छात्रा को अपनी ओर से 2100-2100 रुपये छात्रवृत्ति व ट्रॉफी देने  की घोषणा की। सेना प्रमुख की धर्मपत्नी नमिता ने वीरांगनाओं को सम्मान के तौर पर कंबल भी भेंट किए।

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