मिलिए एक ऐसी मां से, जिसने दूध बेच-बेचकर अपनी बेटी को गोल्ड मेडलिस्ट बनाया। कहानी बड़ी दिलचस्प है और पढ़कर आप सेल्यूट करेंगे।
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अपनी मां नीलम के साथ कैथल की बॉक्सर निकिता
ये कहानी है, हरियाणा के कैथल जिले के गांव पट्टी अफगान की नीलम की। जो हाड़तोड़ मेहनत करके, कर्ज लेकर और दूध बेचकर अपनी बेटी निकिता के सपने को पूरा करने में जुटी है। बेटी का मैरीकॉम बनने का सपना अब मां का ख्बाव भी बन गया है। नीलम अब अपनी बेटी निकिता को मैरीकॉम बनाने के लिए हर मश्किल को पार करने में जुटी है।
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अपनी मां नीलम के साथ कैथल की बॉक्सर निकिता
बेटी भी मां की उम्मीदों पर खरी उतरते हुए तीन बार राज्य प्रतियोगिता में गोल्डन पंच लगा चुकी है। नीलम चाहती है कि निकतिा एक दिन महिला मुक्केबाज मैरीकॉम की तरह देश और हरियाणा का नाम रोशन करे। नीलम बताती हैं कि एक साल पहले बेटी निकिता ने बॉक्सिंग शुरू की थी। गरीबी के कारण उसने निकिता को खेलने से रोका था, लेकिन जब बेटी ने जिद नहीं छोड़ी तो उसने भी उसके सपने को पूरा करने की ठान ली।
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अपनी मां नीलम के साथ कैथल की बॉक्सर निकिता
नीलम ने बताया कि घर के साथ-साथ बेटी की पढ़ाई व खेल पर काफी खर्च होता है। घर में दो भैंस रखी हैं और उनका दूध बेचकर जो पैसा मिलता है उससे ही खर्च चल रहा है। निकिता बताती है कि उनकी माली हालत ठीक न होने के कारण वह बॉक्सिंग किट खरीदने में असमर्थ है। मां को इस बारे में कई बार कह चुकी हैं, लेकिन किट खरीदने के लिए पैसा बच नहीं पाता है।
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अपनी मां नीलम के साथ कैथल की बॉक्सर निकिता
नीलम ने बताया कि दूध बेचकर जो पैसा मिलता है वह घर का राशन, उसकी पढ़ाई व प्रतियोगिताओं में आने-जाने का किराया सहित अन्य खर्च में निकल जाता है। जिला व राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में निकिता गांव की ही साथी बॉक्सर शीतल की किट उधार लेकर जाती है। अब तक इसी किट से उसने जिला व स्टेट में हुई तीन प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल जीते हैं। जनवरी 2017 में रोहतक में सब जूनियर प्रतियोगिता में उसका चयन हुआ है।
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अपनी मां नीलम के साथ कैथल की बॉक्सर निकिता
नीलम बताती हैं कि सरकार से सहयोग नहीं मिलने के कारण उसे इस प्रतियोगिता के लिए भी बॉक्सिंग किट व जूते भी मांगकर ले जाने पड़ेंगे। वैसे तो सरकार ने बेटियों को आगे बढ़ने के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दिया है। लेकिन सच्चाई इससे विपरीत है। उसने बताया कि उसकी बेटी राज्य पर अपनी प्रतिभा को दिखा चुकी है, लेकिन इसके बाद भी सरकार ने कोई आर्थिक सहायता नहीं दी है।
बता दें कि निकिता महज 15 साल की हैं। उसने केवल डेढ़ साल पहले ही बॉक्सिंग खेलना शुरु किया था। पिछले वर्ष जब उसने मैरीकॉम की फिल्म देखी तो उसका मनोबल बढ़ा, जिसके बाद उसने अपनी प्रैक्टिस शुरु की और केवल एक साल बाद ही अपना मुकाम भी पा लिया। अब वह मैरीकॉम की तरह देश की नामी बॉक्सर बनना चाहती है, लेकिन आर्थिक तंगी इस रास्ते में खड़ी है।