मेडिकल स्ट्रीम के देश भर के स्टूडेंट्स के लिए काम की खबर है। दरअसल, सिलेबस में अहम बदलाव किया गया है जो नए सेशन से लागू हो जाएगा।
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एडमिशन
- फोटो : अमर उजाला
फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया ने फार्मेसी के सिलेबस को लेकर बड़ा फैसला लिया है। देशभर में फार्मेसी का अब एक समान सिलेबस होगा, जो थ्योरी के साथ-साथ इंडस्ट्री बेस पर भी आधारित होगा। सत्र 2017-18 से नए सिलेबस से ही विद्यार्थियों की पढ़ाई कराई जाएगी।
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अभी तक फार्मेसी का सिलेबस विश्वविद्यालय अपने स्तर पर तैयार करते थे। वही सिलेबस संबद्ध कॉलेजों में भी लागू होता था। ऐसे में कोर्स पूरा करने के बाद विद्यार्थियों को अक्सर फार्मेसी इंडस्ट्री में समस्याएं आती थी।
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नई-नई तकनीक और अलग प्रारूप होने की वजह से वह कई बार असमंजस की स्थिति में रहते थे कि उन्होंने तो यह सिलेबस पढ़ा ही नहीं। विद्यार्थियों की समस्याएं और फार्मेसी इंडस्ट्री की नई तकनीक को देखते हुए फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया ने सिलेबस को लेकर यह फैसला लिया है।
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students
इसके तहत काउंसिल ने सिलेबस को अपने तरीके से तैयार किया है, जो देश के सभी फार्मेसी संस्थानों में लागू होगा। सभी विश्वविद्यालयों को नया सिलेबस भेज दिया गया था। सिलेबस के अवधि को पहले की तरह ही रखा गया है। बी-फार्मेसी चार साल और एम-फार्मेसी कोर्स दो साल का ही रहेगा।
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ओपेन डे कार्यक्रम में छात्र
- फोटो : अमर उजाला
सबसे बड़ा बदलाव यह रहेगा कि बी-फार्मेसी के विद्यार्थियों को तृतीय वर्ष में दो माह की इंडस्ट्री ट्रेनिंग करनी अनिवार्य होगी। इसके अलावा सिलेबस में ड्रग डेवलपमेंट, वर्तमान तकनीक, फार्मेसी इंडस्ट्री की डिमांड और शोध कार्य की नई तकनीक को शामिल किया गया है।
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ओपेन डे कार्यक्रम में छात्र-अभिभावक
- फोटो : अमर उजाला
एमडीयू के फार्मेसी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. मुनीष गर्ग ने बताया कि नए सत्र से फार्मेसी काउंसिल द्वारा तैयार किया गया सिलेबस ही लागू होगा। फार्मेसी काउंसिल की गाइडलाइन के अनुसार, हर तीन साल बाद सिलेबस बदला जाएगा। एमडीयू में फिलहाल कई वर्षों से सिलेबस नहीं बदला गया था।
हरियाणा में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, पीजीआईएमएस रोहतक, गुरू जंभेश्वर विश्वविद्यालय हिसार, कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरूक्षेत्र, चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय भिवानी और भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय खानपुर कलां समेत अन्य कई संस्थानों में फार्मेसी के कोर्स हैं।