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पटौदी खानदान की बेटी सोहा अली खान जेल जाने से बचीं, काट रही थीं पुलिस स्टेशन के चक्कर

Fri, 13 Mar 2020 10:03 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
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सोहा अली खान
नवाब मंसूर अली खां पटौदी के खानदान की बेटी सोहा अली खान जेल जाने से बच गई हैं। वे पिछले कुछ दिनों से थाने के चक्कर काट रही थीं। जानिए आखिर क्या मामला है।
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सोहा अली खान
दरअसल, हरियाणा के लोकायुक्त से फिल्म अभिनेत्री सोहा अली खान को विदेशी राइफल मामले में बड़ी राहत मिली है। लोकायुक्त एनके अग्रवाल ने सोहा के खिलाफ शिकायत को प्राइवेट पार्टी के विरुद्ध मानते हुए किसी भी कार्रवाई से इनकार कर दिया है। विदेशी राइफल को ट्रांसफर करने व सोहा का आर्म्स लाइसेंस 18 महीने एक साल की उम्र में बनने की फाइल भी सरकारी रिकॉर्ड से गुम है। लोकायुक्त ने संज्ञान लेते हुए सरकार से सिफारिश की है कि तीन महीने के भीतर ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई करने की गाइडलाइन तैयार करें और उनके कार्यालय को अवगत कराएं।
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सोहा अली खान
सोहा अली खान के खिलाफ पीपुल फॉर एनिमल संस्था के वर्तमान आयुक्त व तत्कालीन चेयरमैन नरेश कादियान ने 2005 में पुलिस में शिकायत की थी। जिसमें उन्होंने 21 साल से कम उम्र में आर्म्स लाइसेंस बनाने और विदेशी राइफल को गलत तरीके से ट्रांसफर करने के मामले में कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस ने जांच के बाद 2008 में सोहा का आर्म्स लाइसेंस निरस्त कर दिया था। इसके बाद कादियान ने आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की थी। जिसमें कई अधिकारियों के नाम भी शामिल थे।

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सोहा अली खान
मामले में कार्रवाई तो नहीं हुई, लेकिन डीसी गुरुग्राम कार्यालय से पूरे मामले की फाइल ही गुम हो गई, जिसका आज तक कोई पता नहीं है। फाइल गुम होने पर कादियान ने 2016 में लोकायुक्त के पास शिकायत की थी। इस पर लोकायुक्त के रजिस्ट्रार ने जांच की। उन्होंने इस मामले में सोहा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश लोकायुक्त से की थी, जिसे लोकायुक्त ने मंडलायुक्त गुरुग्राम को कमेंट्स के लिए भेज दिया था।
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सोहा अली खान
मंडलायुक्त ने डीसी से रिपोर्ट मांगी, जिसमें बताया गया कि फाइल गुम है, उनके पास इससे जुड़ा कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसके बाद लोकायुक्त ने फाइल गुम होने के मामले में गाइडलाइन बनाने की सिफारिश सरकार से की है। शिकायतकर्ता नरेश कादियान का कहना है कि वे फैसले के विरुद्ध हाईकोर्ट जाएंगे। इस मामले में आईपीसी 120 के तहत मामला बनता है। लोकायुक्त के समक्ष गलत तथ्य पेश किए गए हैं।
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