फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महिला दिवस: वायुसेना की इन महिला अफसरों ने तोड़ा पर्वतों का गुरूर, आठ घंटे में नापी दुर्गम चोटी

Sun, 08 Mar 2020 01:51 AM IST
ajay kumar मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
1 of 5
विजयी चिह्न बनाते हुए पर्वतारोही - फोटो : अमर उजाला
वतन वालो! इसे तुम बेकस-ओ मजलूम मत समझो, यही औरत किसी दिन वक्त की तस्वीर बदलेगी। प्रख्यात शायर डा. नफस अंबालवी की इसी सोच को इंडियन एयरफोर्स की फ्लाइंग महिला अफसरों ने न केवल हकीकत में बदलकर दिखाया, बल्कि महज 8 घंटे में बर्फ से लकदक रूद्रगेरा की दुर्गम चोटी को नापकर इतिहास भी रच डाला। सन 1998 में ये कारनामा करने वाली महिलाएं इंडियन एयरफोर्स की पहली माउंटेनियरिंग टीम का हिस्सा थीं।
विज्ञापन

2 of 5
एयरफोर्स की फ्लाइंग अफसर - फोटो : अमर उजाला
इन आठ घंटों के भीतर इन महिलाओं ने कम ऑक्सीजन वाली इस चोटी पर तिरंगा लहराया और फिर सकुशल नीचे बेस कैंप तक भी पहुंच गईं। बताते चलें कि यह दुर्गम पर्वत उत्तराखंड में गंगोत्री से ऊपर करीब 19 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है और हिमस्खलन के खतरों के लिए माना हुआ है। सभी महिलाएं इंडियन एयरफोर्स में फ्लाइंग अफसर थीं और उनके इस कारनामे ने उस वक्त देश में सैन्य महिला अफसरों को बेहद चर्चा में ला दिया, जब सेना में महिला अफसरों का स्थायी कमीशंड नहीं था। उस दौर में इन्होंने दिखा दिया कि देश की सरहदों की रक्षा से लेकर हर बड़ी चुनौती को पार पाने में महिलाएं किसी से भी पीछे नहीं हैं। इस टीम की लीडर थीं फ्लाइट लेफ्टिनेंट रेनू बाहरी लांबा, जबकि मिशन ग्रुप कैप्टन नसीम अख्तर की देखरेख में पूरा किया गया। उनके पति कैप्टन अजय लांबा ने भी इस टास्क के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया।
विज्ञापन

3 of 5
एयरफोर्स की फ्लाइंग अफसर - फोटो : अमर उजाला
हिमस्खलन के खतरों के बीच लहराया तिरंगा
सन 1994 में बतौर पायलट अफसर कमीशंड हुई रेनू बाहरी लांबा वैसे तो टेक्निकल फील्ड से थीं। मगर एडवेंचर खासकर माउंटेनरिंग उनका शौक था। उन दिनों इंडियन एयरफोर्स ने अपना एडवेंचर क्लब भी गठित किया था। जो विभिन्न तरह के साहसिक कार्यों में सक्रिय रहता था। इस दौरान महिला एडवेंचर के लिए पांच फ्लाइंग अफसरों ने आगे बढ़कर पर्वतारोहण की चुनौती को स्वीकारा। टास्क में उन्हें उत्तराखंड की एक दुर्गमचोटी रूद्रगेरा को फतेह करना था। फ्लाइट लेफ्टिनेंट रेणु बाहरी लांबा ने बताया कि दिल्ली हेडक्वार्टर से लेकर इस टास्क को पूरा करने में कुल 13 दिन लगे।
 

4 of 5
एयरफोर्स की फ्लाइंग अफसर - फोटो : अमर उजाला
मगर बर्फ से लदी रूद्रगेरा चोटी पर टीम ने सुबह 5 बजे चढ़ाई शुरू की, 11 बजे चोटी पर तिरंगा फहराया और दोपहर 3 बजे सकुशल वापस लौट आई। उनके अनुसार टास्क बेहद खतरनाक था और कई तरह की दिक्कतों ने इसे नामुमकिन बनाने की भी कोशिश की। मगर किसी टीम मेंबर का हौसला न टूटे और कोई बीच में न छूट जाए, बतौर टीम लीडर उनके लिए ये काम भी बहुत मुश्किल था। नतीजतन पांचों महिला अफसरों ने 100 फीसदी इस टास्क को पूरा किया। उनके साथ दो अन्य सिविलियन पर्वतारोही भी थे, वे भी चोटी पर चढ़े। चोटी पर चढ़ने वालों में फ्लाइंग अफसर कल्पना चमोली, रीना एंजल, सुवर्ना जोशी और सिविलयन से 10वीं कक्षा की छात्रा वंदिता थीं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
एयरफोर्स की फ्लाइंग अफसर - फोटो : अमर उजाला
फ्लाइट लेफ्टिनेंट रेनू बताती हैं कि इस टास्क को लेकर शुरू से ही एक अजीब किस्म की चिंता बनी हुई थी। टीम को तत्कालीन वाइस एयर चीफ मार्शल एवाई टिपनिस (बाद में चीफ ऑफ स्टाफ बने) ने झंडी दिखाकर चुनौती के लिए रवाना तो कर दिया था। मगर आला अफसरों के दिमाग में यह चिंता लगातार घर कर रही थी कि इस बर्फ से ढकी दुर्गम चोटी को फतह करते हुए महिला अफसरों की टीम गुम या किसी हादसे का शिकार न हो जाए।इसलिए टीम को बिना बताए उन्होंने एक एयरफोर्स हेलीकाप्टर को फाइनल टास्क के दौरान उनकी लगातार रेकी के लिए तैनात कर दिया गया। मगर जब रूद्रगेरा पर तिरंगा फहराकर महिलाएं सकुशल दिल्ली लौटीं, तो उनका स्वागत, सत्कार भी हमेशा के लिए यादगार बन गया। रेनू लांबा इस बात से व्यथित हैं कि आज का युवा खासकर युवतियां सैन्य सर्विसिस की ओर आने में बहुत ज्यादा रुचि नहीं दिखा रही हैं। उनका कहना है कि एक बार यूथ देश सेवा का स्वाद चखकर तो देखे, वतन पर मिटने को खुद-ब-खुद बेकरार हो जाएगा। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें