26 मई 2012 का दिन याद कर आज भी रितू की आंखें भर आती हैं। 2 साल 6 माह 27 दिन बाद रोहतक कोर्ट में फैसला आया। अदालत ने आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। लेकिन रितू फैसले के लिए भी नहीं रुकी। कोर्ट फैसला सुना रहा था तो रितू दिल्ली में राजौरी गार्डेन में एसिड हमले से घायल 26 वर्षीय चिकित्सक नम्रता कौर को सांत्वना दे रही थीं।
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बहन तुझे सलाम! तेजाब को बना लिया ताकत
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जब फैसले की घड़ी आई तो संघर्ष के दिन आंखों में आंसू बनकर तैर गए। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में रितू का गला भर आया। कहा, न्याय से मैं संतुष्ट हूं। मैं चाहती हूं कि आरोपी जब सजा काटकर बाहर आएं तो वे दूसरों के लिए सबक बनें। रितू सैनी को इस लड़ाई में दिल्ली में तेजाब हमले की शिकार लक्ष्मी का साथ मिला। पीड़ितों की टीम उठ खड़ी हुई। टीम तेजाब हमले के खिलाफ और पीड़ितों के पुनर्वास के लिए काम कर रही है।
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लक्ष्मी आंदोलन का प्रतीक बन गई हैं। मार्च 2014 में अमेरिका की फर्स्ट लेडी मिशेल ओबामा ने दोनों को वुमन ऑफ करेज का खिताब दिया था। न्याय के लिए जंतर मंतर पर 12 दिसंबर से 10 दिन तक धरना भी दिया।
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रितू की मांग अपनी नहीं हैं। उसकी हर मांग अपनी जैसी दूसरी बहनों के लिए है। रितू का कहना है कि पीड़ित को सहानुभूति की बजाय समाज में उपेक्षा की शिकार होना पड़ता है। पीड़िता से लोग शादी करने से तो कतराते ही हैं, सभी योग्यता होने के बावजूद चेहरा खराब होने के कारण नौकरी देने में भी परहेज करते हैं।
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एसिड पीड़ित के लिए रितू ने मांग करते हुए बताया कि एसिड की खुलेआम बिक्री पर पाबंदी लगे और खरीद फरोख्त के लिए नियामक बनाया जाए।, एसिड अटैक के मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित हो और 3 माह में फैसला।, एसिड हमलों में पुलिस 15 दिन में चार्जशीट दाखिल करे।, पीड़िता के लिए सरकारी मदद, नौकरी और जीविका का इंतजाम।, सभी राज्यों में प्लास्टिक सर्जरी कराने के लिए बजट पास किया जाए।, पीड़िता को नि:शुल्क मेडिकल सेवाएं उपलब्ध कराई जाए।
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रितू सैनी ने सोशल मीडिया पर भी अभियान चला रखा है। फेसबुक पर एसिड अटैक फाइटर रितू के नाम से पेज बनाया गया है। रितू ने रोहतक कोर्ट का फैसला आते ही सबसे पहले इस पेज पर प्रतिक्रिया दी।
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रितू ने पोस्ट किया कि यह वो खबर है, जिसका मैं और मेरे सभी मित्र 26 मई 2012 से इंतजार कर रहे थे। इसलिए संभव हो पाया क्योंकि हर किसी ने मेरी और मेरे परिवार की सहायता की। साथ मिलकर लड़ाई लड़ी जाए तो सफ लता मिल ही जाती है।
रितू दूसरों के लिए लड़ाई तो लड़ ही रही है, अपनी पांच साथियों के साथ आजीविका के लिए कैफे भी चला रही हैं। आगरा में शीरोज हैंगआउट नाम से कैफे की शुरुआत मानवाधिकार दिवस पर 10 दिसंबर को की गई है। यह सिर्फ कैफे नहीं बल्कि यहां हैंडीक्राफ्ट प्रदर्शनी का भी इंतजाम है। पठन-पाठन से जुड़े लोगों के लिए यहां खास ख्याल रखा गया है।