...जब एक जोरदार आवाज के साथ अफरा-तफरी मच गई और उसमें दब गई 6 लोगों की बेशकीमती जिंदगी और रोती छोड़ गई अपनों की आंखे। जानिए हादसे का खौफनाक सच। रिपोर्ट: आशीष वर्मा/कुलदीप शुक्ला।
विज्ञापन
चंडीगढ़ हादसे का खौफनाक सच, जिसने छीन ली 6 जिंदगियां
2 of 11
स्थान-सेक्टर-26, ट्रांसपोर्ट एरिया, दिन- सोमवार, समय- सुबह 11:30 बजे। एक जोरदार आवाज के साथ अफरा-तफरी मच गई। वाइन शॉप के पास से लोग शोर मचाते हुए भागे। पड़ोस में ही रहने वाले रामकिशन ने बताया कि हादसे के बाद मंजर डराने और हैरान कर देने वाला था। कई लोग जान बचाने के चक्कर में सड़क की ओर भागे। सड़क क्रॉस करते समय उन्हें गाड़ियों तक का डर नहीं था। हादसा सुबह के वक्त हुआ ऐसे में पड़ोसियों में एक ही चर्चा थी कि छह बजे के बाद वाइन शॉप और ढाबे पर सैकड़ों की संख्या में लोग जुटते हैं। शुक्र है बड़ा हादसा टल गया।
विज्ञापन
चंडीगढ़ हादसे का खौफनाक सच, जिसने छीन ली 6 जिंदगियां
3 of 11
इसी दौरान एक शराबी आकर लोगों से पूछता है कि सेक्टर-26 में एक ठेका था। उसने कहा कि कल शाम को तो यहीं था अभी पता नहीं कहां चला गया। आज ठेका बंद तो नहीं रहता? इसके बाद सामने वहां मौजूद रामकुमार ने उसे समझाया कि सामने जो मलबा देख रहे हो। वह ठेके का ही है। सेक्टर-26 में इस तरह का दूसरा हादसा था। इससे पहले 2007 में मकान की छत गिरने से तबाही मची थी। इस हादसे में दो लोगों की जान गई थी।
चंडीगढ़ हादसे का खौफनाक सच, जिसने छीन ली 6 जिंदगियां
4 of 11
आशीष वर्मा/बिल्डिंग के नीचे दबने से मरे छह लोगों में से तीन लोग वे हैं, जो वाइन शॉप में शराब पीने आए थे। इनमें इस्तिकार और बहादुरी सब्जी मंडी में ही काम करते हैं। सोमवार को सब्जी मंडी की छुट्टी के कारण इस्तिकार और बहादुरी शराब के ठेके पर पहुंचे थे। यदि छुट्टी न होती तो वे शायद सब्जी मंडी में काम कर रहे होते। इस्तिकार मूल रूप से यूपी के बिजनौर में रहते थे। वह अपने पत्नी और चार बच्चों के साथ बापूधाम कॉलोनी में रहकर सब्जी मंडी में रेहड़ी लगाते थे।
विज्ञापन
चंडीगढ़ हादसे का खौफनाक सच, जिसने छीन ली 6 जिंदगियां
5 of 11
उनके दोस्त पवन कुमार ने बताया कि इस्तिकार की चार छोटी-छोटी बेटियां हैं। पहले इस्तिकार (30) शौक-शौक में शराब पीता था, लेकिन जब से चौथी बेटी हुई थी, तबसे उसे शराब की लत लग गई थी। सोमवार को जब वह ठेके पहुंचा तो उसने अपने दोस्तों को फोन कर उन्हें शराब के ठेके में बुलाया भी। शुक्र रही कि वे लेट हो गए।
विज्ञापन
चंडीगढ़ हादसे का खौफनाक सच, जिसने छीन ली 6 जिंदगियां
6 of 11
हादसे में जान गंवाने वाले बहादुरी भी सब्जी मंडी में लहसुन का काम करते हैं। सब्जी मंडी की छुट्टी के कारण वह भी सीधे शराब के ठेके पहुंच गए। उनके साले ज्योतिराम ने बताया कि तीन साल पहले उनकी शादी हुई थी। बहादुरी का दो साल का एक बेटा भी है। मौत की सूचना मिलते ही परिजन पीजीआई पहुंच गए। बहादुरी की पत्नी ने ट्रामा सेंटर के बाहर अपनी चूड़ियां तोड़ दी और बिलखकर रोने लगी।
विज्ञापन
चंडीगढ़ हादसे का खौफनाक सच, जिसने छीन ली 6 जिंदगियां
7 of 11
बहादुरी सुबह चार बजे मंडी पहुंचते थे और रात दस बजे के बाद ही घर पहुंचते थे। धार्मिक कार्यों में वह बहुत बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। मद्रासी मेले में वह पिछले तीन साल से अपनी पीठ से कार को खींचते थे। बहादुरी कभी-कभार ही शराब पीते थे। हादसे में मारे गए अशोक शर्मा चाय की कंपनी में मार्केटिंग का काम करते थे। हादसे के समय अशोक शराब के ठेके में मौजूद थे।
चंडीगढ़ हादसे का खौफनाक सच, जिसने छीन ली 6 जिंदगियां
8 of 11
उनके दोस्त नवीन के मुताबिक 35 वर्षीय अशोक मूल रूप से नारलौन हरियाणा के रहने वाले हैं। उनके दो बच्चे हैं। एक बेटा व एक बेटी। उनके दोस्तों ने संभावना जताई कि हो सकता है कि वे शराब पीने गए हों। उनके दोस्तों ने बताया कि अशोक काफी मिलनसार थे। मारे गए छह लोगों में एक मजदूर प्रभु भी शामिल है। मूल रूप से बिहार के गोपालगंज के रहने वाले प्रभु अपने मजदूर साथियों के साथ बेसमेंट की साफ-सफाई कर रहे थे।
चंडीगढ़ हादसे का खौफनाक सच, जिसने छीन ली 6 जिंदगियां
9 of 11
साथी मजदूर मिथलेश कुमार ने बताया कि वे सभी मोहाली के मदनपुर गांव में रहते हैं। ठेकेदार व इंजीनियर बलविंदर ही मिथलेश, प्रभु सहित 11 मजदूरों को सेक्टर-26 वाइन शॉप के साथ लगते बेसमेंट के काम के लिए ले गए थे। मिथलेश के मुताबिक सभी 11 मजदूर काम कर रहे थे, तभी लगा कि इमारत गिरने वाली है। मिथलेश व अन्य लोग तो निकल आए, लेकिन प्रभु को निकलने का समय नहीं मिल पाया। वे वहीं पर दबकर रह गए।
चंडीगढ़ हादसे का खौफनाक सच, जिसने छीन ली 6 जिंदगियां
10 of 11
प्रभु अपने भाई के साथ मदनपुर में ही रहते थे। दोनों भाई मजदूर हैं। मिथलेश ने बताया कि खुदाई के दौरान पता चल गया था कि मिट्टी रेतीली है। कभी भी साथ वाली बिल्डिंग गिर सकती है। इसके बावजूद वहां पर काम जारी था। प्रभु चार दिन पहले ही अपने घर गोपालगंज से आए थे। दो दिन वे वाइन शॉप के साथ लगती जगह पर काम कर रहे थे। उनके तीन बच्चे और पत्नी हैं। वे यहां पर नहीं आएंगे। उनके भाई और दोस्त ही उनका अंतिम संस्कार करेंगे।
चंडीगढ़ हादसे का खौफनाक सच, जिसने छीन ली 6 जिंदगियां
11 of 11
वाइन शॉप के साथ ही निक्कू ढाबा है। ढाबे में चंद्रभान, सूरजभान, विष्णु, पाले, चुम्मन, राजू, सोहबुद्दीन काम करते थे, जबकि ढाबे का मालिक निक्कू है। जब छत गिरी तो उसमें सूरजभान और विष्णु भी दब गए। पीजीआई पहुंचते ही दोनों ने दम तोड़ दिया। सूरजभान के भाई चंद्रभान ने बताया कि सूरजभान व विष्णु भी यूपी के गोंडा जिले के रहने वाले हैं। सूरजभान के तीन बच्चे हैं। बच्चे व उनकी पत्नी यूपी में ही रहते हैं। उन्हें सूचना दे दी गई है। वे मंगलवार तक पहुंच जाएंगे। विष्णु का परिवार भी यूपी में रहता है। वह ढाबा में ही सोता था।