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ऐतिहासिक करतारपुर कॉरिडोर बनने के बाद पाकिस्तान से पहली तस्वीरें आईं सामने, देखिए

Fri, 01 Nov 2019 09:07 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब)
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करतारपुर साहिब - फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तान की तरफ से ऐतिहासिक करतारपुर कॉरिडोर की पहली तस्वीरें सामने आई हैं, तो देखिए यह कैसा नजर आता है...
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करतारपुर साहिब - फोटो : अमर उजाला
सिखों की अटूट आस्था के प्रतीक पाकिस्तान स्थित करतारपुर साहिब को भारत से जोड़ने के लिए एक कॉरिडोर का निर्माण किया गया है। पाकिस्तान की तरफ से भी और भारत की तरफ से भी एक कॉरिडोर बनाया जा रहा है, जिसे पर्यटन स्थल के तौर पर भी विकसित किया जाएगा।
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करतारपुर साहिब - फोटो : अमर उजाला
भारत और पाकिस्तान ने नवंबर 2018 में ऐतिहासिक गुरुद्वारा दरबार साहिब को भारत के साथ जोड़ने के लिए करतारपुर कॉरिडोर बनाने पर सहमति जताई थी। इसके तहत पाकिस्तान के कस्बे करतारपुर को पंजाब के गुरुदासपुर जिले में स्थित डेरा बाबा नानक के साथ जोड़ा गया है।

 

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करतारपुर साहिब - फोटो : अमर उजाला
अब कॉरिडोर बन चुका है और प्रतिदिन 5,000 भारतीय तीर्थयात्री इस रास्ते से पाकिस्तान जाकर गुरुद्वारा साहिब के दर्शन कर सकेंगे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने 28 नवंबर 2018 को करतारपुर कॉरिडोर का नींव पत्थर रखा था। भारत की तरफ से 26 नवंबर 2018 को नींव पत्थर रखा गया था।
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करतारपुर साहिब - फोटो : अमर उजाला
गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के रास्ते का मुद्दा आजादी के बाद कई बार चर्चा का विषय बना। सात दशक तक दोनों देशों की सरकारें यह रास्ता न खुलवा सकीं। संयुक्त राष्ट्र संघ भी इस मामले में सिखों को कोई बड़ी राहत नहीं दिला सका। लेकिन अब गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व ने इस दूरी को हमेशा के लिए मिटा दिया।
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करतारपुर साहिब - फोटो : अमर उजाला
गुरुद्वारा करतारपुर साहिब गुरु नानक देव का अंतिम विश्राम स्थल और निवास स्थान है। यह रावी नदी के पार पाकिस्तान के नरोवाल जिले में लाहौर से 120 किमी दूर स्थित है और डेरा बाबा नानक से इसकी दूरी लगभग चार किलोमीटर है। गुरु नानक जी के माता-पिता और उनका देहांत भी यहीं पर हुआ था।
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करतारपुर साहिब - फोटो : अमर उजाला
गुरु नानक ने अपनी जिंदगी का अंतिम समय करतारपुर साहिब में ही बिताया था, जहां उन्होंने 17 वर्ष 5 माह 9 दिन अपने हाथों से खेती तक की। इसी स्थान से उन्होंने समूची मानवता को काम करने तथा बांट कर खाने जैसे उपदेश दिए थे। इसी पवित्र स्थान पर श्री गुरु नानक देव जी ने 22 सितंबर 1539 को आखिरी सांस ली।

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करतारपुर साहिब - फोटो : अमर उजाला
इससे पहले उन्होंने इस महान स्थान पर दूसरे गुरु अंगद देव साहिब को गद्दी सौंपी थी। महाराजा पटियाला भूपिंदर सिंह ने गुरुद्वारा साहिब की मौजूदा इमारत का निर्माण करवाया था, जिसकी 1995 में पाकिस्तान की सरकार ने मरम्मत करवाई दी तथा 2004 में फिर इसका नवीनीकरण किया गया था।

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करतारपुर साहिब - फोटो : अमर उजाला
कुछ वर्ष पहले सिख संगत की मांग पर भारत सरकार ने बीएसएफ की सहमति से इस गुरुद्वारा साहिब के दर्शन करने की इच्छुक संगत को कांटेदार तार तक जाने की अनुमति दी थी, जहां बाकायदा एक ऊंचा दर्शनीय स्थल बना कर वहां से दूरबीन से संगत को गुरुद्वारा साहिब के दर्शन करवाए जाते हैं।

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करतारपुर साहिब - फोटो : अमर उजाला
13 अप्रैल 2001 से भाई कुलदीप सिंह वडाला के नेतृत्व में करतारपुर रावी दर्शन अभिलाषी संस्था ने हर अमावस्या वाले दिन डेरा बाबा नानक के निकट सरहद पर जा कर इस रास्ते को खुलवाने के लिए अरदास करने का सिलसिला शुरू किया था। 18 वर्षों के दौरान वह 211 बार अरदास कर चुके हैं।
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करतारपुर साहिब - फोटो : अमर उजाला
212वीं अरदास नवजोत सिद्धू ने की। गुरुद्वारा साहिब जाने के लिए डेरा बाबा नानक से कोई भी सीधा रास्ता नहीं है। पहले डेरा बाबा नानक से नारोवाल को जोड़ने वाली रेलवे लाइन के लिए रावी दरिया पर पुल भी था। लेकिन 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान इस पुल को तोड़ दिया गया था।
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