महिलाओं की चोटी काटने वाली कथित चुड़ैल की अफवाह देश के कई राज्यों में फैल चुकी है। कहीं इसके पीछे ये 5 वजहें तो नहीं...
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चोटी कटने के पीछे कहीं ये वजह तो नहीं?
दरअसल, चोटी कटने की सबसे पहली घटना राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में सामने आई थी। जुलाई महीने के पहले सप्ताह में महिलाओं की चोटी कटने की बातें सामने आई थीं। देखते ही देखते ये पहले राजस्थान के अधिकांश हिस्सों फिर उससे जुड़े हरियाणा तक आ पहुंचीं।
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चोटी कटने के पीछे कहीं ये वजह तो नहीं?
अब हालत यह है कि रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, भिवानी, रोहतक, गुड़गांव और मेवात से भी महिलाओं को चोटी कटने के बाद डाक्टरों के पास ले जाया जा रहा है। कई गांवों में दहशत की वजह से महिलाएं गर्मी में भी बंद कमरों में सोने को मजबूर हैं। हालांकि इन अफवाहों की वजह से कई गांवों में लोगों ने अब घर के टायलेट का इस्तेमाल शुरू कर दिया है और खुले में शौच के लिए जाना भी बंद कर दिया है।
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चोटी कटने के पीछे कहीं ये वजह तो नहीं?
जांच में कई घटनाएं झूठी निकलीं
राजस्थान के व्यावर के जवाजा में एक महिला को परिजन अर्द्धबेहोशी की हालत में अस्पताल लेकर पहुंचे। उसकी चोटी के कुछ बाल कटे थे। माथे पर सिंदूर से त्रिशूल बना था। डाक्टरों ने जांच में महिला को पूरी तरह स्वस्थ पाया। तब डॉक्टर ने सख्ती से पूछताछ की और पुलिस बुलाने की धमकी दी। महिला ने तब सारा सच उगल दिया।
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चोटी कटने के पीछे कहीं ये वजह तो नहीं?
उसने बताया कि घर पर उससे बहुत काम करवाया जाता है। वह काफी परेशान थी। उसने चोटी कटने की बातों के बारे में सुना था, इसलिए काम से बचने को यह नाटक किया। इसी तरह शुक्रवार को सांगनेर क्षेत्र में आईं तीन घटनाएं भी जांच में झूठी मिलीं। एक का झूठ तो बाकायदा सीसीटीवी कैमरे से पकड़ा गया।
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- फोटो : अमर उजाला
महिला पहले बेहोश होकर गिरी फिर उठकर हंगामा करने लगी कि जानवर से दिखने वाले एक व्यक्ति ने उसकी चोटी काट दी। अस्पताल के जिस कमरे में उसने चोटी कटने की बात कही थी वहां सीसीटीवी कैमरे लगे थे। फुटेज खंगाली गई तो दिखा कि पहले महिला खुद आकर अपनी चोटी का कुछ हिस्सा काट लेते ही फिर आधे घंटे के बाद कमरे से निकलकर गिरने का नाटक करती है और फिर हंगामा करने लगती है।
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- फोटो : अमर उजाला
मॉस हिस्टीरिया का उदाहरण
प्रदेशभर में महिलाओं की चोटी कटने की घटना वास्तव में मनोवैज्ञानिक रोग मॉस हिस्टीरिया का एक उदाहरण है। जिन लोगों में सुझाव ग्रहणशीलता का गुण अधिक होता है, वे लोग दूसरों की बातों में जल्दी आते हैं और इस रोग से पीड़ित हो जाते हैं। ज्यादातर यह रोग महिलाओं को होता है।
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- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, इस रोग के चलते बहुत सारे लोग एक जैसे व्यवहार या लक्षणों को ग्रहण कर लेते हैं। इससे बचने का सबसे अच्छा उपाय यही है कि इस मुद्दे पर बातचीत ही न की जाए। कुछ समय के बाद यह रोग स्वयं ही समाप्त हो जाता है। सरकार, मीडिया और लोग इसे एक सच्ची घटना के रूप में नहीं, एक रोग के रूप में समझें।
-प्रो. रविंद्र पुरी, मनोवैज्ञानिक।
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- फोटो : अमर उजाला
मकसद भय फैलाना - डॉ. राणा
प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में महिलाओं के बाल काटने की घटना को गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिक डॉ. संदीप राणा पूरी तरह से अंधविश्वास बताते हैं। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाओं के पीछे कुछ लोगों का मकसद भय या कोतूहल फैलाकर अपना मतलब निकालना होता है। कई बार इस तरह के असामाजिक लोग भय फैलाने के बाद इलाके में चोरी की वारदात को भी अंजाम देने लगते हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
डॉ. राणा का कहना है कि औरतों के मानसिक रूप से बीमार होने के बाद भी खुद के बाल या चोटी काटने की बहुत कम संभावना होती है। राजस्थान के बाद हरियाणा में इस तरह की घटनाओं के पीछे किसी गिरोह की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।
मुझे इस तरह की घटनाओं की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो इसे दिखवाया जाएगा। वैसे अगर यह किसी की शरारत है तो पुलिस इस बारे में अच्छी तरह बता सकती है।
-डॉ. यश गर्ग, डीसी, रेवाड़ी