पीयू में बवाल करने वाले छात्रों को जमानत मिल गई, जेल से बाहर आने के बाद छात्रों ने नारे लगाए और गाना गया।
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48 स्टूडेंट्स को मिली जमानत
पंजाब यूनिवर्सिटी में फीस वृद्धि को लेकर प्रदर्शन के बाद हुई हिंसा मामले में न्यायिक हिरासत में भेजे गए 53 विद्यार्थियों में से 48 को शनिवार को जिला अदालत से जमानत मिल गई। अदालत ने सभी को 25-25 हजार रुपये के बेल बांड पर जमानत मिल गई।
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48 स्टूडेंट्स को मिली जमानत
अदालत से जमानत मिलने के बाद शनिवार देर रात छात्रों को जेल से रिहा किया गया। इस दौरान माहौल देखने लायक था। आलम यह था कि जैसे ही जेल का गेट खोला गया तो पुलिस द्वारा काबू किए गए छात्र जबरदस्त हूटिंग के साथ बाहर आए।
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उसके बाद छात्रों ने एक गीत गुनगुनाना शुरू कर दिया, जो अपने हकों केलिए लड़ने हेतु प्रेरित कर रहा था। छात्रों ने बताया कि ये गीत छात्रों ने जेल के भीतर अपने फीस वृद्धि आंदोलन को मजबूती और छात्रों को प्रेरित करने के इरादे से लिखा है।
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उधर, छात्रों का घंटों जेल के बाहर खड़े होकर इंतजार कर रहे परिजनों ने भी अपने बच्चों को नम आंखों केसाथ गले लगाया। रिहा होने केबाद छात्रों ने दो टूक कहा कि अब चाहे कुछ भी जाए, फीस वृद्धि के लिए आंदोलन जारी रहेगा।
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इससे पहले सुबह याचिका पर जवाब दाखिल में सेक्टर-11 थाना पुलिस ने आरोपियों को जमानत देने का विरोध किया। जांच अधिकारी के अनुसार आरोपी छात्रों ने यूनिवर्सिटी में कानून व्यवस्था को तोड़ा है। छात्रों ने कैंपस में अराजकता का माहौल बनाया और पुलिस पर पथराव किया। इस पथराव में 26 पुलिसकर्मी जख्मी हुए।
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इसके अलावा उन्होंने सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया है। जांच अधिकारी के अनुसार अगर आरोपी छात्रों को जमानत का लाभ दिया गया तो वह बाहर आकर गवाहों और सबूतों पर असर डाल सकते हैं। इसलिए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी जाए।
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बचाव पक्ष की ओर पेश हुए वकीलों ने कहा कि उन्होंने खुद गुरुद्वारे से 38 स्टूडेंट्स का सरेंडर करवाया था। पुलिस ने किस आधार पर इन छात्रों को गिरफ्तार किया, ये स्पष्ट नहीं है। पुलिस के पास क्या सबूत हैं कि इन्हीं छात्रों ने पथराव किया।
बचाव पक्ष ने शनिवार को अदालत में समाचार पत्रों की कटिंग पेश की, जिसमें मामले में पंजाब गवर्नर और यूटी प्रशासक वीपी बदनौर की ओर से पीयू प्रशासन और पुलिस को दिए गए आदेश की खबर हैं। साथ ही वीसी की ओर से भी मामले में बेकसूर छात्रों की पहचान के लिए गठित की गई विशेष कमेटी का भी जिक्र किया गया है। बचाव पक्ष ने समाचार पत्रों की भी कटिंग को आधार बनाते हुए छात्रों को जमानत देने की दलील दी थी।