इराक में आइएस आतंकियों के हाथों मारे गए 39 भारतीयों की मौत को लेकर 5 ऐसे सच सामने आए हैं, जानकर देशवासियों को यकीं नहीं होगा।
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IRAQ
दरअसल, इराक में आईएस आतंकियों ने 27 पंजाबियों और चार हिमाचलियों समेत 39 भारतीयों के सिर के बीचोंबीच नजदीक से गोली मारी थी, जो माथे के पार हो गई थी। इनकी हत्या ठीक वैसे ही की गई जैसे वीडियो आईएस अकसर जारी करता था। मंगलवार को जालंधर के गांव ढड्डे के बलवंत राय और हिमाचल के सुंदरनगर के हेमराज के पार्थिव अवशेषों के साथ इराक सरकार की ओर से भेजी डीएनए रिपोर्ट और डेथ सर्टिफिकेट से इसका खुलासा हुआ है।
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mosul indians
इसमें बलवंत राय और हेमराज की मौत साल 2014 में हुई बताई गई है। हेमराज की पहचान उसके सिर के मिले पिंजर के डीएनए टेस्ट से हुई। इराक सरकार के स्वास्थ्य, पर्यावरण और फोरेंसिक विभाग ने 11 फरवरी 2018 को इसकी फाइनल रिपोर्ट जारी की। फोरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार, मोसुल में दर्जनों नर कंकाल मिले थे, वहां से एक सिर के पिंजर का मिलान हेमराज के पिता बेली राम, माता रोशनी देवी के साथ-साथ छोटे भाई श्रवण कुमार के भेजे डीएनए टेस्ट से हुआ।
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इराक में 39 भारतीयों की मौत
वहीं, विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह सोमवार को अमृतसर के राजासांसी एयरपोर्ट आकर 31 शवों को सौंपकर वापस चले गए, लेकिन एक नए विवाद को जन्म दे गए। विवाद भी ऐसा कि मृतकों के परिजनों को एक धोखा महसूस होने लगा है। वीके सिंह का कहना था कि फारेंसिक रिपोर्ट में सामने आया है कि हत्या एक साल पहले की गई थी, कब की गई थी यह अंदाजा लगाना मुश्किल है, क्योंकि शवों की हालत खराब हो चुकी थी।
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इराक में 39 भारतीयों की मौत
अमर उजाला के हाथ एक डेथ सर्टिफिकेट लगा है, जोकि जालंधर के गांव ढड्डे के बलवंत राय के परिवार को सौंपा गया है। यह डेथ सर्टिफिकेट रिपब्लिक ऑफ इराक मनिस्ट्री ऑफ हेल्थ के लीगल मेडिकल अफसर द्वारा जारी किया गया है। जिसे 25 मार्च 2018 को जारी किया गया है। इसमें साफ लिखा है कि बलवंत राय की मौत सिर में गोली लगने से हुई थी और यह हत्या 2014 में की गई थी।
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इराक में 39 भारतीयों की मौत
दिलचस्प बात है कि सोमवार को विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह साफ दावा कर गए थे कि हत्या एक साल पहले की गई थी, कब की गई थी यह साफ नहीं है। दोबारा पूछा गया था तो उनका कहना था कि सही समय नहीं पता लेकिन हत्या एक-डेढ़ पहले ही हुई है। अब सवाल है कि एक तरफ वीके सिंह ने इराक की फारेंसिक लेबोरेटरी को विश्व की बेहतरीन लैब बताकर उनका धन्यवाद जताया और फिर उनके इस दावे को कि हत्या 2014 में की गई थी, इसके बारे में कोरा झूठ क्यों बोल गए।
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इराक में 39 भारतीयों की मौत
संगरूर के 52 वर्षीय प्रीतपाल सिंह, जो मोसुल में मारे गए थे, उनके बेटे नीरज व साले नंद लाल का कहना था कि हमें तो यही कहा जाता रहा कि प्रीतपाल जिंदा है। कभी सुषमा जी कह देती थीं कि वह मस्जिद में है, सुरक्षित हैं। कभी कहती थीं कि वह कहीं छिपकर काम कर रहे हैं। सरकार किसी सूरत में मानने के लिए तैयार ही नहीं थी कि भारतीयों की हत्या हो चुकी है। सोमवार को भी केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री इसी बात पर अडिग रहे कि हत्या 2014 में नहीं हुई।
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इराक में 39 भारतीयों की मौत
वहीं मृतक बलवंत राय के परिवार वाले खुद हैरान परेशान हैं। उन्होंने अमर उजाला के साथ बातचीत में कहा कि यह तो हमारे साथ फिर कोरा झूठ हो गया। रिश्तेदार जसपाल कैंथ का कहना है कि इराक सरकार की फारेंसिक लैब कह रही है कि 2014 में हत्या की गई थी, फिर भारत सरकार क्यों कतरा रही है। हमें कब तक अंधेरे में रखा जाएगा, आखिरकार सच्चाई को मान लेना ही समझदारी है।
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इराक में 39 भारतीयों की मौत
दरअसल, इराक में 15 जून 2014 से 39 भारतीय लापता थे। एक युवक हरजीत मसीह किसी तरह बचकर भारत लौटा और खुलासा किया कि उन सभी की हत्या कर दी गई है। इसके बाद से सरकार लगातार परिजनों को दिलासा देती रही कि आपके लोग जिंदा है। 20 मार्च 2018 को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में जानकारी दी कि सभी 39 भारतीयों की हत्या कर दी गई है और शवों को एक टीले पर दफना दिया गया।
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इराक में 39 भारतीयों की मौत
केंद्रीय राज्य मंत्री वीके सिंह 2 अप्रैल 2018 को दोपहर 2.20 बजे इराक के मोसुल में मारे गए 39 भारतीयों में से 38 शवों के अवशेष लेकर श्री गुरु रामदास एयरपोर्ट पहुंचे। उन्होंने मृतकों के परिवारों के जख्मों पर मरहम लगाने के बजाए उनको पीड़ादायक कर दिया। उन्होंने कहा कि उनको नौकरी या आर्थिक सहायता देना फुटबाल का खेल नहीं है और न ही यह बिस्कुट बांटने जैसा है, जिसे मैं जेब में डालकर ले आता और बांट देता।
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इराक में 39 भारतीयों की मौत
केंद्रीय राज्यमंत्री के इस बयान को उनके बगल में बैठे कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने संभाला। उन्होंने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार हरेक परिवार के एक-एक सदस्य को योग्यता के मुताबिक नौकरी देगी। साथ ही पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। सिद्धू के इस बयान के बाद भी वीके सिंह ने पीड़ित परिवारों को केंद्र सरकार की ओर से सहायता देने के लिए एक भी शब्द नहीं निकला।
केंद्र का डैमेज कंट्रोल
वी. के. सिंह की टिप्पणी पर काफी विवाद हो रहा था। उधर बिहार के सीवान जिले के मृतकों के परिजनों ने शवों के अवशेष लेने से इनकार कर दिया था। परिजनों ने कहा था कि सरकार जब तक मुआवजा देने की घोषणा नहीं करेगी तब तक अवशेष स्वीकार नहीं करेंगे। इसके अगले ही दिन प्रधानमंत्री ने मुआवजे की घोषणा कर दी। अब इराक में मारे गए 39 भारतीयों के परिजनों को मोदी सरकार 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देगी।