मिलिए देश के असली उड़न सिख से, जो 1971 की जंग में 6 पाकिस्तानी विमानों पर अकेला ही भारी पड़ गया था। ऐसी रही बहादुरी की कहानी।
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निर्मलजीत सिंह सेखों
ये हैं पंजाब में लुधियाना के रूरका गांव में 17 जुलाई 1943 को जन्मे निर्मलजीत सिंह सेखों। सेखों ऐसे एकमात्र परमवीर चक्र विजेता वीर सपूत हैं, जिन्होंने 1971 में पाकिस्तान के विरुद्ध लड़ते हुए उस युद्ध में शहीद हुए, जिसमें भारत विजयी हुआ। महज 28 साल की उम्र में सेखों शहीद हो गए थे। जंग से कुछ ही महीने पहले उनका विवाह हुआ था और उसमें भी उन्होंने पत्नी मंजीत के साथ बहुत थोड़ा सा समय बिताया था।
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निर्मलजीत सिंह सेखों
मरणोपरांत मिला परमवीर चक्रः 1971 के युद्ध में देश की रक्षा करते हुए 14 दिसंबर को सेखों शहीद हो गए थे। उनकी वीरता को देखते हुए 26 जनवरी 1972 को राष्ट्रपति वीवी गिरी ने उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया था। परमवीर चक्र वीरता के लिए दिए जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। निर्मलजीत सिंह सेखों इंडियन एयरफोर्स के एकमात्र परमवीर चक्र विजेता है।
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निर्मलजीत सिंह सेखों
निर्मलजीत सिंह श्रीनगर वायु सेना के हवाई अड्डे पर मुस्तैदी से तैनात थे और नेट हवाई जहाजों पर अपने करिश्मे के लिए निर्मलजीत सिंह उस्ताद माने जाते थे। 14 दिसंबर को एयरपोर्ट पर 6 पाक लड़ाकू विमानों ने हमला कर दिया। उस वक्त एयरपोर्ट पर धूल का बादल था। उड़ान भरना मुश्किल था। उन्हें उस निर्णायक पल में सिर्फ अपना नेट विमान सूझा और दुश्मन के F-86 सेबर जेट, जिन्हें निर्मलजीत सिंह को मार गिराना था।
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निर्मलजीत सिंह सेखों
बस फिर क्या था, सेखों ने उड़ान भरी और पाकिस्तानी विमानों से भिड़ गए। सेखों ने दो दुश्मन जहाजों को मार गिराया और बाकियों को भी हमला करने से रोक दिया, लेकिन उनका अपना विमान हमले की चपेट में आ गया। जान गंवाने से पहले वह पाक विमानों को भगा चुके थे। सेखों की वीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुश्मन देश भी उनकी प्रशंसा करने से अपने आप को रोक नहीं पाता है।
पड़ोसी देश पाकिस्तान भी सेखों की बहादुरी का कायल था। पाकिस्तान के एक शीर्ष अधिकारी ने अपनी किताब में सेखों की बहादुरी की चर्चा करते हुए उनके बलिदान को खूब सराहा था। लुधियाना की अदालत में सेखों की प्रतिमा और साथ में उनके विमान का मॉडल इस वीर सपूत की शहादत की याद दिलाता है, जिसने अकेले के दम पर श्रीनगर एयरबेस को दुश्मनों के नापाक इरादों से बचाया।