पेट्रोल पंपों पर डिजिटल ट्रांजेक्शन के जरिए सस्ता पेट्रोल मिलने की बात खुद वित्तमंत्री जी कह चुके हैं, लेकिन असलियत क्या है, यहां देखिए।
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सरकार द्वारा पेट्रोल व डीजल डलवाने पर आनलाइन पेमेंट करने पर 0.75 फीसदी का डिस्काउंट का एलान के बाद से शहर में कई पेट्रोल पंपों पर कार्डों से पेमेंट बढ़ गई है। हालांकि इससे कई पंपों पर स्वाइप मशीन हैंग होने की दिक्कतें भी आईं।
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दूसरी तरफ एटीएम काफी संख्या में चले, लेकिन उनकेआगे लाइनें अभी भी लगी हुई थीं। कई सेक्टरों में दोपहर बाद ही एटीएम में पैसे डाले गए। सेक्टर 20 के विजय खुरसिया ने बताया कि कैशलेस करने की बात कर रहे हैं लेकिन पहले इंटरनेट स्पीड ठीक करनी पड़ेगी।
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- फोटो : social media
पंपों व दुकानों पर स्वाइप मशीनें ही काम नहीं कर रही हैं। वहीं मंगलवार को शहर में करीब 70 फीसदी एटीएम चले। लेकिन सभी एटीएम पर भीड़ नजर आई। कई जगह पर तो पिछले एक हफ्ते से एटीएम बंद पड़े थे वो भी काम करते हुए दिखाई दिए। हालांकि कुछ एटीएम पर काफी भीड़ देखी गई।
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कैशलैस
15 दिसंबर तक सभी विभागों को कैशलेस करने में प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं। कैशलेस के लिए रोजाना मैराथन मीटिंग हो रही हैं। इसके बाद भी अभी कुछ ही विभागों में कैशलेस सुविधाएं शुरू हो सकी हैं। प्रशासन को अपने सभी विभागों के लिए करीब 2 हजार स्वाइप मशीन की जरूरत है, लेकिन बैंक जरूरत पूरा नहीं कर पा रहे।
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डेबिट,क्रेडिट कार्ड ने की मुश्किल आसान
- फोटो : ANI
उधर एक अधिकारी ने बताया कि बैंकों के सर्वर की क्षमता से अधिक स्वाइप मशीन लग चुकी हैं। जिस कारण स्वाइप मशीन से ट्रांजेक्शन में समय लग रहा है। बैंकों को अपना सर्वर अपग्रेड कर इनकी क्षमता बढ़ानी होगी। छोटे-छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-फड़ी वालों को भी स्वाइप मशीन दी जाएंगी तो स्थिति और गंभीर हो जाएगी।
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डिजिटल मोड से पेमेंट शुरू करने के दिए निर्देश
यूटी एडवाइजर परिमल राय ने बुधवार 14 दिसंबर तक हर हालत में सभी विभागों को कैशलेस करने के आदेश अधिकारियों को दिए हैं। इन आदेशों के बाद मंगलवार शाम को डीसी अजीत बालाजी जोशी ने बैंक और प्रशासन के अधिकारियों की मीटिंग बुलाई। यूटी में अभी तक आरएलए, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड, ई-संपर्क सेंटर, ग्रेन मार्केट और एस्टेट ऑफिस में स्वाइप मशीनें लगी है।
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कैशलैस
हेल्थ डिपार्टमेंट को अपने अस्पतालों के लिए 60 स्वाइप मशीन चाहिए, लेकिन अभी तक केवल 10 ही मिली हैं। इसके अलावा सीटीयू की बसों, एसटीए, सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट और स्कूल-कॉलेज सहित कई अन्य विभागों को स्वाइप मशीन नहीं मिल पाई हैं। एक कंपनी के ई-वालेट से केवल उसी कंपनी की एप पर ट्रांजेक्शन की जा सकती है। किसी दूसरी एप पर यह संभव नहीं है।
ऐसे में लोगों के जेहन में ये भी सवाल है कि आखिर कितनी ई-वालेट कंपनी की एप वह अपने फोन में रखें। साथ ही यह भी जरूरी नहीं है कि दुकानदार के पास भी वही एप हो जो आपके पास है। यानि सभी ग्राहकों को अटेंड करने के लिए दुकानदार को भी सभी ई-वालेट एप फोन में रखने जरूरी हैं। यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) ही एक ऐसी एप है, जिसमें किसी भी दूसरे बैंक या एप पर पेमेंट भेजी जा सकती है।