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जांबाज ने सुनाई 14 हजार फुट ऊंची पोस्ट छीनने की कहानी

Wed, 02 Sep 2015 08:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
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14 हजार फुट की ऊंचाई थी और जबरदस्त ठंड पड़ रही थी। उसके बावजूद दुश्मनों को धूल चटाकर छीन ली थी पोस्ट। ये बताते हैं वीर चक्र विजेता रणबीर सिंह। रिपोर्टः आशीष वर्मा
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रणबीर बताते हैं कि 1965 के युद्ध में भारत ने पाकिस्तान के हर हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया है। युद्ध की शुरुआत में पाकिस्तान ने कच्छ में भारत के हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसका जवाब देने के लिए भारत ने कारगिल सेक्टर में 14 हजार फुट की ऊंचाई पर पाकिस्तान पोस्ट को कब्जा करने की प्लानिंग की। इस पोस्ट को प्वाइंट 13620 कहते हैं।
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रणबीर ने बताया कि पोस्ट पर हमला करने की जिम्मेदारी चार राजपूत बटालियन की ब्रावो कंपनी को सौंपी गई। कंपनी के कमांडर मेजर बलजीत सिंह रंधावा थे और रणबीर उसमें बतौर वॉलंटियर शामिल थे। उन्हें शामिल किया गया, क्योंकि उन्हें इलाके की अच्छी जानकारी थी और वे कांफिडेंट थे कि युद्ध में अच्छा कर सकते हैं।

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रणबीर बताते हैं कि 16 मई 1965 को उन्होंने कारगिल सेक्टर में बनी पोस्ट की रेकी की। उस समय काफी ठंड थी। सभी चोटियां बर्फ से ढकी हुई थी। 17 मई को दुश्मन की पोस्ट पर हमला करने की योजना बनाई गई। उनकी कंपनी दुश्मन की चौकी से करीब 300 गज की दूरी पर थी। धीरे-धीरे कंपनी आगे बढ़ रही थी।
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रणबीर सिंह बताते हैं कि उस समय रात के ढाई बजे थे। कंपनी को लगा कि दुश्मनों को उनकी हलचल के बारे में पता नहीं होगा, लेकिन यह उनकी गलतफहमी थी। जब वे 150 गज दूर रह गए तो पाक की ओर से भारी फायरिंग शुरू हो गई। भारतीय फौज को संभलने का मौका नहीं मिला। ऐसा लगा कि कहीं सेना पीछे न हट जाए।
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रणबीर बताते हैं कि यही वक्त होता है लीडरशिप क्वालिटी का। उस समय जवानों का हौसला बढ़ाने की जरूरत होती है और उस दौरान यही किया गया। जवान आगे बढ़े और दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब दिया। जब दुश्मन की चौकी के करीब पहुंचे तो पाकिस्तानी सैनिकों के साथ हाथों से लड़ना शुरू कर दिया क्योंकि राइफल लोड करने का वक्त नहीं था।
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रणबीर बताते हैं कि इस दौरान एक गोली छूकर निकल गई और कुछ देर के लिए बेहोश हो गए। जब वे होश में आए तो कंपनी कमांडर बलजीत सिंह रंधावा ने उनसे कहा कि वे वापस चले जाएं। लेकिन वे गए नहीं। वे फिर दुश्मनों से लोहा लेने लगे। इस बीच कंपनी कमांडर रंधावा को दुश्मन के एक छिपे सैनिक ने गोली मार दी और वे शहीद हो गए।

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रणबीर ने बताया कि कंपनी कमांडर के शहीद होने के बाद सीओ कर्नल सुदर्शन सिंह ने उन्‍हें कंपनी का नेतृत्व करने का निर्देश दिया। भारतीय फौज के हौसले देखकर पाकिस्तानी सैनिक भागने लगे। सुबह करीब पांच बजे पोस्ट पर भारतीय फौज ने तिरंगा फहरा दिया। रणबीर सिंह की वीरता को देखते हुए उन्हें वीर चक्र से नवाजा गया।

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रणबीर सिंह इस समय मोहाली के सेक्टर 69 के मकान नंबर 53 में रहते हैं। उनका परिवार 146 साल से देश की सेवा कर रहा है। उनके दादा रिसालदार नारायण सिंह फौज में थे। उसके बाद उनके पिता ब्रिगेडियर सुखदेव सिंह ने फौज की सेवा की। ब्रिगेडियर सुखदेव सिंह को भी वीर चक्र से नवाजा गया था।
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रणबीर सिंह ने 1947-48 और सेकेंड वर्ल्ड वार में अपने साहस का परिचय दिया था। रणबीर सिंह के भाई भी फौज में थे। उनके बड़े भाई का बेटा श्रीलंका में शहीद हो गया था। देश में ऐसे बहुत कम परिवार होंगे, जिनमें पिता और बेटे को वीर चक्र से नवाजा गया हो।
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