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जानिए, कौन हैं हरियाणा के 17वें राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य और इनके पास क्या-क्या अधिकार...

Wed, 22 Aug 2018 01:32 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सत्यदेव नारायण आर्या
देश भर में कई राज्यों के गवर्नर बदल दिए गए हैं। सत्यदेव नारायण आर्य को हरियाणा का 17वां राज्यपाल बनाया गया है, जानिए कौन हैं ये और इनके पास क्या-क्या अधिकार हैं।
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सत्यदेव नारायण आर्या
सत्यदेव नारायण आर्य, एस एन आर्या के नाम से जाने जाते हैं। वे भारतीय जनता पार्टी के एक दिग्गज नेता रहे हैं और बिहार राज्य से संबंध रखते हैं। एस एन आर्या बिहार में खान एवं भूविज्ञान मंत्री रह चुके हैं। वे अपने विधानसभा क्षेत्र नालंदा के राजगीर से आठ बार विधायक रह चुके हैं। हरियाणा में वे 17वें राज्यपाल के रूप में प्रदेश की कमान संभालेंगे। एक जुलाई 1947 को जन्मे सत्यदेव नारायण ने एमए एलएलबी पार्ट वन की शिक्षा प्राप्त की है। खेती और समाज सेवा से जुड़े कार्य करना उनको पसंद हैं।
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सत्यदेव नारायण आर्या
सत्यदेव नारायण आर्य जनसंघ के पुराने नेता हैं। इनका जन्म राजगीर के गांधी टोला में एक साधारण परिवार में हुआ। जन्म से पहले ही पिता शिवन राम की मौत हो गई थी, इसलिए इनका लालन-पालन चाचा रामफल आर्य ने किया। दलित नेता आर्य सभी वर्गों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं। आर्य बिहार सरकार में पहली बार रामसुंदर दास मंत्रिमंडल में ग्रामीण विकास विभाग मंत्री और फिर 2012 में नीतीश मंत्रिमंडल में खान एवं भूतत्व मंत्री बनाये गए।

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सत्यदेव नारायण आर्या
राजनीति में आने से पहले आर्य चंडी प्रखंड में कार्यालय सहायक पद पर कार्यरत थे, लेकिन नौकरी छोड़कर आर्य ने 1972 में भारतीय जनसंघ के टिकट पर भाग्य आजमाया। यह चुनाव वह हार गये। 1977 में वह फिर चुनाव लड़े और भारी बहुमत से चुनाव जीते। इसके बाद वह एक के बाद एक चुनाव जीतते रहे। 2015 के चुनाव में भाजपा ने इन्हें राजगीर का उम्मीदवार बनाया था, लेकिन पार्टी की अंदरूनी कलह से जदयू प्रत्याशी से वह मात खा गए।
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सत्यदेव नारायण आर्या
राज्यपाल के पास क्या- क्या अधिकार
एक ही राज्यपाल होता है, लेकिन एक शख्स दो राज्यों का राज्यपाल नियुक्त हो सकता है। राज्यपाल संसद या विधानसभा का सदस्य नहीं हो सकता और उन्हें कई शक्तियां दी जाती है, जिसके अनुसार उसे गिरफ्तार करने के लिए भी अलग प्रावधान होता है। राज्यपाल की शक्तियां कार्यकारी, विधान, न्यायिक और आपातकाल के आधार पर विभाजित किया गया है। राज्यपाल मुख्यमंत्री समेत कई उच्च पद पर नियुक्ति करता है। राज्यपाल की स्थिति उसी तरह होती है, जिस तरह देश में राष्ट्रपति की होती है।
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governor - फोटो : self
राज्यपाल सुनिश्चित करता है कि वार्षिक वित्तीय विवरण(राज्य वजट) को राज्य विधानमंडल के सामने रखा जाए. धन विधेयकों को राज्यपाल की पूर्व अनुमति के बाद ही विधानसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है। उसकी सहमति के बिना किसी अनुदान की मांग नहीं की जा सकती। पंचायतों एवं नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की हर पांच साल में समीक्षा के लिए वह वित्त आयोग का गठन करता है। राज्यपाल किसी दोषी की सजा में बदलाव या फैसले पर रोक लगा सकता है। राज्यपाल अपने विवेक के आधार पर कुछ स्थितियों में बिना मंत्रियों की सलाह के काम करता है।
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governor
साथ ही राज्यपाल को विधानसभा में संदेश भेजने, संबोधन देने संबंधित वो सभी अधिकार होते हैं, जो कि एक राष्ट्रपति को संसद के लिए होते हैं। किसी भी विधानसभा में पास हुए बिल राज्यपाल की सहमति के बिना कानून नहीं बन सकते हैं। हालांकि मनी बिल के अलावा राज्यपाल सभी बिल को वापस भेज सकता है। जब कोई भी पार्टी को विधानसभा में बहुमत हासिल नहीं होता है तो राज्यपाल मुख्यमंत्री चुनने के लिए विशेषाधिकार का इस्तेमाल करता है। वहीं आपातकाल के वक्त वह राष्ट्रपति के बिहाफ पर राष्ट्रपति कानून लागू करता है।

 
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