प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर स्कीम, स्मृति ईरानी के मंत्रालय से मिलती थी ग्रांट तो ऐसा क्या हुआ कि कॉलेज से 13 कश्मीरी छात्रों को निकाल दिया। तस्वीरों में देखिए, पूरा मामला।
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कॉलेज से क्यों निकाले 13 कश्मीरी छात्र, गलती किसकी?
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प्रधानमंत्री विशेष छात्रवृत्ति योजना वर्ष 2010-11 में कश्मीर के लिए लागू की थी। इस योजना के तहत कश्मीर के पांच हजार बच्चों की पढ़ाई और रहने का खर्च सरकार को वहन करना था। इसके लिए जाति का कोई आधार नहीं है।
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इस योजना के तहत ही 2013 में जम्मू-कश्मीर के 23 छात्रों ने रोहतक इंस्टीट्यूट इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट कॉलेज में दाखिला लिया। बीटेक के तीन सेमेस्टर की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब कॉलेज ने 13 छात्रों के नाम काट दिए हैं और हॉस्टल से बाहर निकाल दिया। कॉलेज का तर्क है कि उनके नाम पर कोई छात्रवृत्ति नहीं आई है।
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प्रधानमंत्री विशेष छात्रवृत्ति योजना के झोल में फंसे 13 कश्मीरी छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। डीसी से मिलने पहुंचे छात्रों को निराशा हाथ लगी। प्रशासन ने छात्रों से पूरे दस्तावेज दिखाने के बाद ही कार्रवाई की बात कही है। वहीं, छात्रों को दाखिला दिलाने वाले कश्मीर के एक एनजीओ ने भी हाथ पीछे खींच लिए हैं। उनका कहना है कि हमें छात्रवृत्ति से कोई मतलब नहीं है, हमारा काम तो दाखिला दिलाने तक था।
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उधर, कॉलेज डायरेक्टर का कहना है कि 2014 में दस बच्चों की छात्रवृत्ति पास होने के बाद कई बार बाकी बच्चों के लिए स्मृति इरानी की एचआर मिनिस्ट्री को पत्र भेजा जा चुका है। मिनिस्ट्री की तरफ से वेबसाइट पर डाला गया है कि पांच हजार बच्चे पूरे हो चुके हैं और अब बाकी के लिए मिनिस्ट्री के पास फंड नहीं है।
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बकौल, उपायुक्त शुक्रवार को चंडीगढ़ के 60 छात्रों ने भी प्रधानमंत्री विशेष छात्रवृत्ति योजना को लेकर दिल्ली जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया है। माना जा रहा है कि छात्रवृत्ति का लालच देकर एनजीओ छात्रों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। छात्रवृत्ति नहीं मिलने पर छात्रों को कॉलेज से बाहर निकाला जा रहा है।