8 एकड़ में फसल उगा रखी थी। बारिश से फसल बर्बाद हुई तो 4 लाख कर्जा तो याद रखा, लेकिन 3 बच्चों को भूल गया किसान..और सल्फास खाकर जान दे दी। किसान की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग को लेकर जींद-महम बाईपास पर जाम लगा दिया। जब दो घंटे तक ग्रामीणों के पास कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा तो इन लोगों ने शव रखकर रोहतक-पानीपत नेशनल हाईवे जाम कर दिया।
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3 बच्चे, 4 लाख कर्जा, 8 एकड़ में फसल...दे दी जान
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पहले ग्रामीण सांसद रमेश कौशिक के मौके पर आने और 25 लाख मुआवजा और सरकारी नौकरी के ऐलान के बाद ही जाम खोलने की मांग पर अड़े रहे, लेकिन बाद में गोहाना विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी रहे रामचंद्र जांगड़ा के आश्वासन पर ग्रामीणों ने पांच घंटे बाद जाम खोला और शव का पोस्टमार्टम कराने को तैयार हुए।
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3 बच्चे, 4 लाख कर्जा, 8 एकड़ में फसल...दे दी जान
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परिजनों के अनुसार मरने वाले किसान ने चार लाख रुपये कर्ज लेकर आठ एकड़ फसल उगा रखी थी। उसे फसलों के माध्यम से कर्ज उतरने और बच्चों की शादी करने की आस थी, लेकिन बारिश व ओलावृष्टि से खराब हुई फसल को वह सहन नहीं कर सका और देर रात घर की छत पर जहर खाकर आत्महत्या कर ली।
3 बच्चे, 4 लाख कर्जा, 8 एकड़ में फसल...दे दी जान
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ग्रामीणों ने बताया कि युद्धवीर (40) शुरू से ही खेती का काम करता था। उसने खुद की दो एकड़ जमीन और ठेके पर ली छह एकड़ जमीन पर फसल उगा रखी थी। इसके लिए उसने विभिन्न स्रोतों से चार लाख रुपये कर्ज ले रखा है। उसके एक लड़का और दो बेटियां हैं। अभी तक किसी की शादी नहीं हुई है।
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ग्रामीणों के अनुसार किसान की मौत की जानकारी के बावजूद कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों ने नई अनाज मंडी के पास दो घंटे जींद-महम बाईपास जाम रखा। जब दो घंटे तक यहां पर भी कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा तो ग्रामीणों ने रोहतक-पानीपत हाईवे जाम कर दिया।
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ग्रामीणों ने बताया कि युद्धवीर के तीन बच्चे, बड़ी लड़की नीतू, छोटू लड़की स्वाति और एक तीन साल का लड़का जतिन है। दोनों लड़कियां दसवीं में पढ़ती हैं। युद्धवीर ने खेती के लिए चार लाख कर्ज लिया था। फसल से कर्ज और बड़ी बेटी नीतू की शादी करने की सोच रहा था। हालांकि बारिश ने उसके सारे सपने चकनाचूर कर दिए।
ग्रामीणों के मुताबिक युद्धवीर अकेला ही परिवार का कर्ताधर्ता था। उसकी मौत के बाद परिवार अकेला पड़ गया है। उसका बड़ा भाई पहले से ही पैरों से अपाहिज है और घर मे इस के सिवाय कमाने वाला कोई नहीं था। बारिश और ओलावृष्टि से खराब हुई गेहूं की फसल के चलते कटवाल गांव में दो किसान की मौत हो चुकी है।